सांसद ने कलेक्टर को 22 अगस्त 2024 को लिखा था पत्र
प्रशासनिक तंत्र का असली चेहरा यही, सक्रियता का दिखावा
छिंदवाड़ा। 1 साल बाद फिर से कोयलांचल के जमकुंडा ग्राम पंचायत से दिल दहला देने वाली वैसी ही तस्वीर सामने आई है जो 1 साल पहले अगस्त 2024 में सामने आई थी। रविवार को फिर एक अंतिम संस्कार जमकुंडा ग्राम में तिरपाल के सहारे किया गया। जबकि एक साल पहले अगस्त 2024 में भी तिरपाल के सहारे आई एक तस्वीर के बाद सांसद विवेक बंटी साहू ने कलेक्टर को पत्र लिखा था। कि जमकुंडा ग्राम पंचायत में किसी भी हालत में मोक्ष धाम की व्यवस्था कराई जाए।
21 अगस्त 2024 की दिव्य भारत समाचार की खबर 👇
इस पत्र के बाद भी आज तक हालात वैसे ही है। प्रशासनिक तंत्र का असली चेहरा यही है जो सुविधाओं, व्यवस्थाओं और सरकारी योजनाओं को लागू करने का केवल दावा करता नजर आता है। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। कारण यही है कि हर मंगलवार हजारों लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते हैं। जबकि पूरा हफ्ता सरकारी महकमा फील्ड में होने का दावा करता है। जो कि सरासर झूठ है। जमकुंडा से आई फिर एक तस्वीर ने जिले वासियों को दहला कर रख दिया है। जीते जी सुविधाओं को तरसने वाले ग्रामीण मारने के बाद भी अंतिम संस्कार के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों को तिरपाल लगाकर उन्हें पंचतत्व में विलीन करना पड़ रहा है। इस तस्वीर ने एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर यह कैसा विकास है। जहां एक शव को आग लगाने के लिए भी ग्रामीणों को चारों तरफ तिरपाल पकड़ कर खड़े होना पड़ रहा है।
सांसद वही, कलेक्टर वही और हालात भी वही…बड़ा सवाल ?
22 अगस्त 2024 को दिव्य भारत समाचार की खबर 👇
जिले में विकास की तस्वीर का यह दूसरा नजारा 1 साल बाद फिर देखने को मिला । हालांकि पिछले 1 साल से ऐसी ही स्थिति इस गांव में मौजूद है। बारिश में होने वाले दाह संस्कार इसी तरह के से किया जा रहे हैं। ग्रामीणों ने भारी विरोध जताया, कई बार कलेक्टर से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को अपनी समस्या से अवगत कराया। लेकिन हालात वही है। बड़ी बात यह है कि सांसद विवेक बंटी साहू ने 22 अगस्त 2024 को कलेक्टर को पत्र लिखकर गांव में मोक्ष धाम की व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया था। लेकिन आज 1 साल बाद भी ना मोक्ष धाम बना और ना यहां दाह संस्कार की कोई दूसरी व्यवस्था की गई। बड़ी बात यह है कि सांसद वही है कलेक्टर भी वही है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि कलेक्टर बदल गए तो उन्हें इस बात का पता नहीं था कि सांसद ने एक पत्र लिखा है, जिसमें मोक्ष धाम या दाह संस्कार के लिए व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक तंत्र पर उठ रहा है कि जब सांसद के पत्र की ही कोई कीमत जिला प्रशासन के पास नहीं है तो आम जनता की समस्याओं पर प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका कैसी होगी। हालांकि सांसद के पत्र के बाद एक सर्वे तो जरूर हुआ लेकिन उसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
सरकार की हजारों की योजनाएं, और दाह संस्कार तिरपाल में !
मध्यप्रदेश में पिछले 21 सालों में 15 महीने को छोड़ दिया जाए तो भाजपा की सरकार है। और सरकार कई जनकल्याणकारी योजनाएं लागू करने का दावा भी कर रही है। जिसे अमल में लाने के लिए प्रशासनिक तंत्र सक्रिय किया गया है। हजारों योजनाएं हैं अरबों रुपयों के विकास के दावे हैं। उसके बाद भी शव का दाह संस्कार तिरपाल में हो रहा है। इसके लिए जिम्मेदार कौन है ? सरकार की योजनाओं पर अमल में लाने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन के साथ साथ ही जिले के जनप्रतिनिधियों की है । जो सरकार में बैठे हैं लेकिन छिंदवाड़ा जिले की हालत तिरपाल के नीचे जलती लाश बयां कर रही है।
जिम्मेदार कौन ?…Avinash Singh
9406725725/7697930555









