दो दिन बाद बताया पेशाब पिलाई और थूका, किसने बरगलाया ?
शिकायत के दौरान भी थाने में हंगामा, तब सिर्फ मारपीट बताई
छिंदवाड़ा । जिले में भोले भाले आदिवासियों को बरगलाने वाले तत्व सक्रिय हो गए है। पिछले 15 दिनों में ऐसी कुछ घटनाएं घटित हुई है जिसमें शिकायत के बाद शिकायतकर्ता के बयान बदले गए। और कुछ नए तरह के आरोप आरोपियों पर लगाए गए। जिससे सियासी हंगामा तेज हो गया है । 29 जून की रात भी हरई थाना क्षेत्र में एक मारपीट की वारदात को दो दिन बाद आदिवासियों के आत्म सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली घटना में बदल दिया गया। पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए प्रयास किया जा रहे हैं। इस मामले में पुलिस कप्तान ने जांच के आदेश दिए लेकिन बड़ी बात यह है कि जिस समय फरियादी ने मारपीट की शिकायत की उस समय किसी भी तरह के अन्य घटना की जानकारी फरियादी ने पुलिस को नहीं दी। पुलिस ने तत्काल एफआईआर भी दर्ज की लेकिन बाद में भोले भाले आदिवासी परिवार को बरगलाकर इस मामले में सियासी हंगामा खड़ा कर दिया गया। अब पुलिस इस पूरे मसले पर नए एंगल से जांच कर रही है । जिसमें वह लोग भी लपेटे में आ सकते हैं जिन लोगों ने मामले को गलत तरीके से पेश करने के लिए प्रयास किया और फरियादी को भड़काया । क्योंकि पेशाब पिलाने और मुंह पर थूकने जैसी घटना शिकायत के वक्त सामने नहीं आई इसका साफ मतलब यह है कि किसी न किसी ने भोले भाले आदिवासी परिवार को ऐसे बयान देने के लिए भड़काने का प्रयास किया है और अपनी सियासी महत्वकांक्षा को परवान चढ़ाने का प्रयास किया है।
29 जून की घटना, 30 जून को मारपीट की शिकायत
घटना 29 जून 2025 की रात 11:00 बज हर्रई थाना क्षेत्र के तुईयापानी में घटित हुई । यहां एक ढाबा संचालक और उसके साथियों ने दो आदिवासी युवकों के साथ मारपीट की। जिसकी शिकायत 30 जून को दोपहर लगभग 3:15 बजे थाने में की गई । इस दौरान शिकायतकर्ता ने पुलिस को ढाबे में काम छोड़ देने की बात पर ढाबा संचालकों के द्वारा उनके साथ मारपीट करने का आरोप लगाया। पुलिस ने शिकायत के बाद तत्काल घायलों की मेडिकल जांच कराई और 4:10 पर ढाबा संचालक राजा चौकसे, गोलू मालवी और अंकित कहार के खिलाफ बीएनएस और आदिवासी हरिजन एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिक की दर्ज कर ली। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया । इस दौरान फरियादी ने मारपीट के अलावा पेशाब पिलाने या मुंह पर थूकने जैसी किसी भी घटना का जिक्र पुलिस के सामने नहीं किया।
जबकि मारपीट के बाद शिकायत करने के लिए पूरा गांव थाने पहुंचा था और थाने में हंगामा भी किया गया और पुलिस के साथ बदतमीजी और गाली गलौज भी की गई। लेकिन किसी ने भी इस तरह की किसी अतिरिक्त घटना की जानकारी पुलिस को नहीं दी। फिर अचानक दो दिन बाद किसके कहने पर आदिवासी परिवार ने मामले को तूल देने के लिए नया बयान जारी कर दिया । अब यह बात जांच के घेरे में की क्या मारपीट में घायल फरियादी थाने में पहली बार सच बोल रहा था। या दो दिन बाद उसने जब एक नया बयान सोशल मीडिया पर जारी किया वह सच था। पुलिस दोनों पहलुओं पर जांच कर रही है । इस मामले में आदिवासी परिवार को बरगलाने और भड़काने का काम करने वालों पर भी पुलिस की नजर है।
जिले के भोले भाले आदिवासियों को भड़काने का दौर फिर शुरू !
2024 में अब से लगभग 10 महीने पहले जिले में मुकद्दम सरकार का मामला सुर्खियों में था । ग्रामीण क्षेत्रों में आदिवासियों की मुकदम और पटेल सरकार सक्रिय हो गई थी। जिसकी जानकारी सरकार को तक नहीं थी । यह मुकद्दम सरकार अपने मुकदमे चला कर सजा भी तय कर रही थी । लेकिन जब मामला उजागर हुआ और पुलिस और प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया। तो मुकद्दम सरकार के के नाम पर एक नए तरीके के संगठन के तैयार होने की जानकारी पुलिस को मिली। इस मामले में पुलिस ने लगभग 2 महीने तक सघन जांच कर दर्जन भर से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया। जिनमें से कई लोग बालाघाट, बैतूल झारखंड सहित अलग-अलग राज्यों के थे । जो आदिवासियों को भड़काने और गलत तरीके से घटनाओं को तूल देने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने इस मामले में 50 लाख की अवैध उगाही का एक मामला भी उजागर किया। ऐसी स्थिति जिले में फिर से निर्मित होती दिखाई दे रही है ।
2024 में मुकद्दम सरकार के नाम भड़काया गया…👇
ग्रामों में बन गई मुकद्दम सरकार, जिला प्रशासन को पता ही नही !
जिले के भोले वाले आदिवासियों को भड़काने के लिए जिले के आदिवासी अंचलों में अलग-अलग युवा तुर्क सक्रिय दिखाई दे रहे है। जो किसी भी सामान्य मामले को भड़काने के लिए आदिवासियों को उल्टे सीधे बयान देने के लिए बरगला रहे हैं । पिछले 15 दिनों में ऐसे तीन मामले सामने आए जिसमें पुलिस की संतोषजनक कार्रवाई के बाद भी आरोप लगाए गए और अन्य वर्ग के लोगों को इस मामले में घसीटने का प्रयास किया गया । अब पुलिस को एक बार फिर जिले में मुकदम सरकार और नक्सलवाद से जुड़े लोगों के कनेक्शन पर काम करना जरूरी हो गया है । कहीं एक बार फिर भोले भाले आदिवासियों को भड़का कर नए तरीके से अलग संगठन तो तैयार नहीं किया जा रहे।
भोले भाले आदिवासी…Avinash Singh
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