भाजपा के सरकारी मंच पर भी आयातित कांग्रेसी
कांग्रेस सुस्त नेताओं के भरोसे राजनीति की दौड़ में
छिंदवाड़ा। 45 साल तक पूरे देश में छिंदवाड़ा की राजनीति की चर्चा बड़े जोर-जोर से होती रही। इसका कारण यह था की देश के बड़े नेता कमलनाथ छिंदवाड़ा से चुनाव लड़ते रहे और कभी केंद्रीय मंत्री तो कभी मुख्यमंत्री तक बने। यही कारण है कि छिंदवाड़ा की राजनीति की चर्चा सब तरफ होती रही। क्योंकि यहां एक बड़े नेता का दखल था। लेकिन आज छिंदवाड़ा की राजनीति आयातीत नेताओं और सुस्त नेताओं के भरोसे चल रही है। छिंदवाड़ा में दोनों ही बड़े दलों भाजपा और कांग्रेस की स्थिति लगभग एक थी है। भले ही देश में और प्रदेश में भाजपा की सरकार हो। भले ही छिंदवाड़ा में अब बीजेपी से स्थानीय राजनेता सांसद हो और भले ही कांग्रेस में एक बार के सांसद नकुलनाथ सक्रिय हो। लेकिन लगभग दोनों दलों की हालत एक सी है। उस पर राजनीतिक गुटबाजी इतनी हावी है कि इसका असर सरकारी मंचों पर भी दिखाई देने लगा है। बड़ी विडंबना है कि एक तरफ छिंदवाड़ा 45 साल तक राजनीतिक शीर्ष पर रहा और आज छिंदवाड़ा को नेता नहीं मिल रहे है। या ऐसे नेता नहीं मिल रहे जिनके अंदर छिंदवाड़ा की तरक्की, विकास और ऊंचाइयों को बनाए रखने की क्षमता हो।
भाजपा के वरिष्ठ नेता गायब अब कमान आयातित कांग्रेसियों को
छिंदवाड़ा में भाजपा की स्थिति बेहतर हुई है। लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 ने छिंदवाड़ा भाजपा की राजनीति में आधे से ज्यादा कांग्रेसियों को भर दिया है। दल बदलवाने की होड़ और कमलनाथ की राजनीतिक हार के लिए रचे गए षड्यंत्र ने भाजपा में कांग्रेसियों को भर दिया । आज हालात यह है की बात संगठन की हो या सत्ता की छिंदवाड़ा भाजपा में कांग्रेस हावी है । या वह कांग्रेसी हावी है जो अब भाजपा का दामन थामें बैठे हैं। यहां तक कहना गलत नहीं होगा कि संगठन से लेकर सत्ता तक भाजपा के पुराने नेताओं का नामोनिशान अब नजर नहीं आता। अब किसी सरकारी आयोजन में पुराने नेता बुलाये भी जाते हैं तो उनका नंबर कांग्रेस से आयातित बड़े नेताओं के पीछे लगता है।

सरकारी मंच को ही देख लीजिए पिछले दिनों मुख्यमंत्री छिंदवाड़ा पहुंचे और जब एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। तो मंच पर भाजपा के नेताओं के साथ आयातित कांग्रेसियों की संख्या लगभग बराबर थी । एक तरफ जिला भाजपा अध्यक्ष शेषराव यादव और छिंदवाड़ा पांढुर्णा सांसद विवेक बंटी साहू भाजपा के पुराने नेताओं में मंच पर थे । तो वही कांग्रेस से भाजपा में आए अमरवाड़ा के विधायक राजा कमलेश शाह और महापौर विक्रम आहके भी मंच पर थे। इसका मतलब साफ है कि भाजपा ने आयातित कांग्रेसी नेताओं के भरोसे राजनीति शुरू कर दी है। अब भाजपा आने वाला समय और चुनाव आयातित कांग्रेसियों के भरोसे ही लड़ने की तैयारी कर रही।
कांग्रेस की राजनीति हवाई पट्टी से शिकारपुर और राजीव भवन में खत्म
कांग्रेस में कमलनाथ का दौर लगभग समाप्त होता नजर आ रहा है । एक तरफ कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं का भाजपा में जाना और दूसरी तरफ कमलनाथ का दखल छिंदवाड़ा में कम होना। कांग्रेस को अंदर से खोखला कर चुका है। नकुलनाथ छिंदवाड़ा में कांग्रेस को दोबारा स्थापित करने का प्रयास जरुर कर रहे हैं। लेकिन यह प्रयास केवल सुस्त और दिशाहीन नेताओं में जोश भरने जैसा है। दरअसल कांग्रेस में नेता बचे ही नहीं और जो बचे हैं। उनमें से बहुत कम ऐसे हैं जो छिंदवाड़ा कांग्रेस को फिर से स्थापित करने का काम कर सकते हैं। पिछले दिनों प्रशिक्षण वर्ग हुआ पीसीसी चीफ जीतू पटवारी भी छिंदवाड़ा पहुंचे, पूर्व सांसद नकुलनाथ भी छिंदवाड़ा पहुंचे और साथ में आईसीसी से आए प्रदेश के प्रभारी भी छिंदवाड़ा पहुंचे।

लेकिन यह प्रशिक्षण वर्ग सुस्त नेताओं में जोश भरने जैसा रहा। छिंदवाड़ा में कांग्रेस की राजनीति हवाई पट्टी से शुरू होती है और शिकारपुर होते हुए राजीव भवन में खत्म हो जाती है। कांग्रेस में नेतृत्व की कमी और नेताओं की भी कमी है। एक बात तो साफ है कि कांग्रेस जिस तरह से छिंदवाड़ा में काम कर रही है। अब वह दौर लौटना मुश्किल लग रहा है जो कमलनाथ के कार्यकाल में हुआ करता था। हालांकि आज भी कमलनाथ छिंदवाड़ा से विधायक है और सौसर, पांढुर्णा, परासिया, चौरई और जुन्नारदेव में भी कांग्रेस के विधायक है। लेकिन फिर भी कांग्रेस में वह उत्साह नजर नहीं आ रहा जो छिंदवाड़ा जिले के लिए अपने तथाकथित नेता को मजबूत कर सके।
राजनैतिक विश्लेषण… Episode 01
Avinaash Siingh
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