बारिश में होती है सबसे ज्यादा कटाई, तस्कर करते हैं सप्लाई
बिछुआ, लावाघोघरी, सिलेवानी के जंगलों में सागौन की अंधाधुंध कटाई
छिंदवाड़ा। बारिश शुरू होते ही जहां सारे काम ठप्प पड़ जाते हैं। वहीं पर शुरू होता है जंगलों को लूटने का सिलसिला। जिले में सागौन की भरमार है बिछुआ लावा गोगरी और सिलवानी के अलावा सभी तरफ जंगलों में कीमती सागौन भरपूर मात्रा में है। और इसी सागवान पर चलती है बारिश में कुल्हाड़ी। वन विभाग इस अवैध कटाई को नहीं रोक पा रहा है ऐसा कहना ठीक नहीं होगा। क्योंकि वन विभाग को हर क्षेत्र की खबर होती है, उसके बाद भी भारी मात्रा में सागवन की कटाई करते माफिया को जंगल में वन विभाग ने आज तक नहीं पकड़ा। बल्कि जब सागवन की तस्करी हो रही होती है। तब कहीं ना कहीं मुखबिर की सूचना पर वन विभाग सागवन तस्करों को पकड़ता है। लेकिन जब 100 गाड़ियां गुजर चुकी होती है तब एक दो गाड़ियां पकड़ी जाती हैं। इससे भी बड़ी बात यह है की सावंरी में पिछले दिनों पकड़े गए एक तस्कर ने खुलासा किया है, कि जंगलों से सीधे फर्नीचर कारखाने में सागौन की सप्लाई हो रही है। इस तस्कर ने बाकायदा जो माल पकड़ा गया वह कहां जा रहा था। यह भी वन विभाग को बताया है लेकिन इस मामले में भी आज तक कोई पुख्ता कार्रवाई वन विभाग में नहीं की है।
दो बार फर्नीचर कारखाने पहुंची वन विभाग की टीम बैरंग लौटी
तस्कर की सूचना के बाद वन विभाग की टीम दो बार इस फर्नीचर कारखाने में पहुंची। यहां पर जांच की गई लेकिन दोनों बार वन विभाग की टीम बैरंग वापस लौट गई। आखिर किस बात की जांच वन विभाग कर रहा है। यह बात आज तक समझ नहीं आई। वन विभाग यदि इस कारखाने में सागवन ढूंढ रहा है तो वह उसे कभी नहीं मिलेगा। लेकिन तस्कर का खुलासा इस बात का गवाह है की इस कटाई में फर्नीचर कारखाने के मालिक भी शामिल है। जब उनका नाम सामने आया है तो अपराध उनके खिलाफ भी बनता है। लेकिन इसके उलट फर्नीचर कारखाने में बार-बार जाकर वन विभाग की टीम कुछ अलग ही दबाव बनाती नजर आ रही है। जबकि कार्रवाई करने के नाम पर अब तक कोई बात आगे नहीं बढ़ी है। ना ही किसी को सह आरोपी बनाया गया है। मतलब साफ है कि वन विभाग की टीम की सांठ गांठ भी और फर्नीचर कारखाने के मालिकों से है। यही कारण है कि वन विभाग की टीम बार-बार कारखाने में जाकर केवल खाना पूर्ति कर रही है क्योंकि जो सूचना मिली है वह दूसरी रेंज से मिली है।
छिंदवाड़ा में 500 करोड़ से ज्यादा का फर्नीचर कारोबार
छिंदवाड़ा शहर में लगभग 15 से 20 फर्नीचर कारखाने मौजूद है। जिनमें से 6 बड़े शोरूम हैं जिनके अलग से बड़े-बड़े कारखाने हैं। इसके अलावा 10 से 12 छोटे शोरूम भी छिंदवाड़ा शहर में मौजूद है और सभी के अपने-अपने कारखाने हैं। जहां पर लकड़ी के समान का निर्माण किया जाता है। पिछले दिनों सागौन तस्कर ने इस बात का खुलासा कर दिया है कि अब सागौन की कटाई ग्राहकों के मोहताज नहीं है। कटाई करने वालों और तस्करों को सीधे कारखाने से ठेका मिल रहा है। और जंगलों से सागवन काटकर कारखाने में सप्लाई हो रही है। उसके बाद भी वन विभाग का अमला मुंह पर पट्टी बांधे बैठा है। बारिश के चार महीना में कई जंगल सागौन से खाली हो जाते हैं। लेकिन इसकी जिम्मेदारी ना अधिकारी तय कर पा रहे हैं और ना फील्ड के कर्मचारी कि आखिर इतना अमला होने के बाद जंगल से सागवान कैसे बाहर निकल रहा है।
15 दिनों में सागौन के लट्ठों से भरे 4 वाहन पकड़े, कई गुजर गए
पिछले 15 दिन में ही जिलेभर में सागौन से भरे हुए चार वाहनों को वन विभाग की टीम ने पकड़ा है। लेकिन सागवन तस्करी का सिलसिला जून के महीने से चल रहा है। पिछले 3 महीना में करोड़ों रुपए की सागवान जंगलों से कटकर कारखाने में पहुंच गई। लेकिन वन विभाग की नींद नहीं खुली वन विभाग सागवन की कटाई और इसकी तस्करी के लिए केवल मुखबिरों पर निर्भर है। जबकि वन विभाग के पास जंगलों पर नजर रखने के लिए पर्याप्त अमला है। चार डीएफओ, एसडीओ, रेंजर, डिप्टी रेंजर फील्ड ऑफिसर जैसे कई अधिकारी वन विभाग में कटाई और जानवरों की सुरक्षा के लिए तैनात है। लेकिन उसके बाद भी करोड़ों रुपए की सागवन कट रही है। जंगली जानवरों का शिकार हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लाखों पौधे लगाए जा रहे हैं, दूसरी तरफ लाखों पुराने कीमती पेड़ों पर कुलहड़ियां चल रही है।
जंगलों में सागवन लूट… Episode 01
Avinaash Siingh
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