Home अपराध अमित तुलस्यान को जेल वार्ड में फाइव स्टार सुविधाएं !

अमित तुलस्यान को जेल वार्ड में फाइव स्टार सुविधाएं !

रईसों की ऐशगाह बना जिला अस्पताल का जेल वार्ड !

प्रॉपर्टी विवाद में पिता पुत्र को मारी थी गोली, 5 साल की सजा

छिंदवाड़ा। जिला जेल केवल उन कैदियों के लिए है। जिनके पास कोई अप्रोच नहीं है या जिनके पास रुपए नहीं है। लेकिन रईसों, रसूखदारों और नेताओं के लिए जिला जेल छिंदवाड़ा भी अब यूपी और बिहार की तर्ज पर ऐशगाह से कम नहीं है। कोर्ट जब रसूखदार रईसों को सजा देता है। तो उन्हें जिला जेल भेजा जाता है , लेकिन जिला जेल में कुछ घंटे भी यह रसूखदार नहीं कटते। जेलर से लेकर डॉक्टर तक सब सेट हो जाते हैं जो इन रसूखदारों कैदियों को जिला जेल की बजाय जिला अस्पताल के जेल वार्ड में शिफ्ट कर देते हैं। यहां पर इन रसूखदारों को फाइव स्टार सुविधा, शहर की बड़ी से बड़ी होटल का खाना और अपने परिजन, रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलने जुलने की आजादी मिल जाती है। इस बार जिला जेल से जेल वार्ड भेजा गया है शहर का वह रसूखदार जिसका नाम अमित तुलस्यान है।

शहर के पुराने रईस अंबिका तुलस्यान का बेटा अमित तुलस्यान है जिसे एक गोली कांड में 5 साल की सजा हुई है। और हाई कोर्ट ने सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी को सीधे जेल भेजने के आदेश जारी कर दिए। गुरुवार को अमित तुलस्यान को जेल भेजा गया लेकिन अपराधी जिला जेल में न रहकर अपने रुपयों और रसूख के दम पर जिला जेल के जेल वार्ड में फाइव स्टार सुविधा ले रहा है। ना कोई बीमारी और ना कोई जान का खतरा। उसके बाद भी रसूखदार जिला अस्पताल के जेल वार्ड में आराम फरमा रहे हैं। जबकि कई कैदी जिन्हें गंभीर बीमारी होती है उनकी जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो जाती है। उन्हें जिला जेल प्रबंधन अस्पताल तक नहीं पहुंच पाता। लेकिन यहां तो एक रसूखदार के लिए जेल प्रबंधन और जिला अस्पताल के डॉक्टर सब की मिली भगत दिखाई दे रही है।

13 साल पहले के गोलीकांड में हुई है सजा, कट्टे से मारी थी गोली

अंबिका तुलसियान के बेटे अमित तुलस्यान को जिस मामले में सजा हुई । वह मामला लगभग 13 साल पुराना है। अप्रैल 2013 में अमित तुलस्यान सहित उसके साथियों ने परासिया रोड स्थित परतला रेलवे क्रॉसिंग के पास शमीमुद्दीन और उसके बेटे अफसानउद्दीन पर कट्टे से हमला किया। जिससे उन्हें चोटें आई थी इस घटना की शिकायत के बाद पुलिस ने अमित तुलस्यान सहित पांच लोगों के खिलाफ बलवा, हत्या का प्रयास सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया। अमित तुलस्यान ने इस पूरे प्रकरण को झूठा बताया और खुद को घटना के दिन इंदौर के एक अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी। इस जानकारी के आधार पर हाईकोर्ट ने अमित तुलस्यान को अग्रिम जमानत दे दी थी।

मामले की सुनवाई के दौरान सत्र न्यायालय ने आरोपी अमित को 5 साल की सजा सुनाई। जिसके लिए अपराधी अमित तुलस्यान ने हाईकोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई में यह पाया कि अमित तुलस्यान ने इंदौर के अस्पताल में भर्ती होने की जो जानकारी दी है। उसके कोई डॉक्यूमेंट प्रस्तुत नहीं किया है। यहां तक कि उस समय इस घटना के जांच अधिकारी थाना प्रभारी एचआर पांडे ने खुद इंदौर जाकर इस मामले की तस्दीक नहीं की है। जबकि जांच के लिए एक एएसआई को भेजा था। पुलिस ने भी इस मामले से संबंधित कोई डॉक्यूमेंट न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया। उच्च न्यायालय जबलपुर ने अमित तुलस्यान की अपील खारिज करते हुए उसे तत्काल जेल भेजने के आदेश जारी किया है। जिसके बाद गुरुवार को अमित तुलस्यान को जिला जेल भेजा गया।

जेलर से लेकर डॉक्टर तक सब सेट, फर्जी बीमारी पर मोहर

जिला जेल जाने वाले रईसों और रसूखदारों के लिए हर सुविधा उपलब्ध हो जाती है। जिला जेल के जेलर से लेकर जिला जेल का डॉक्टर और जिला अस्पताल के डॉक्टर सब सेट हो जाते हैं । और शुरू होता है कैसा खेल जिसमें कानून और सजा के प्रावधानों की धज्जियां उड़ाई जाती है। कोर्ट इस बात की सजा देता है कि अपराध हुआ है। लेकिन जेलर से लेकर डॉक्टर तक अपराधियों से सेट होकर कानून को अपनी जेब में रख लेते हैं। और ऐसे रसूखदार अपराधियों को पूरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए फर्जी बीमारियों को असली बताने की मोहर लगा देते हैं। यही कारण है कि रसूखदार और रईस अपराधी जिला जेल की बजाय जिला अस्पताल के जेल वार्ड में आराम फरमा रहे होते हैं। इस मामले में भी कुछ ऐसा ही है डॉक्टर हर दिन एक नई जांच लिख रहा है। ताकि अपराधी को जिला अस्पताल से छुट्टी ना दी जाए और उसे जेल न जाना पड़े। जबकि अपराधी को ऐसी कोई बीमारी है ही नहीं जिससे उसकी जान को खतरा हो। फिर भी मध्य प्रदेश का सिस्टम अब उत्तर प्रदेश और बिहार की तरह खोखला और भ्रष्ट हो चुका है। जिसका नजारा हम जिला जेल और जिला अस्पताल के जेल वार्ड में बार-बार देख रहे हैं।

मजाक बनी सजा… Avinash Singh
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