दांत का इलाज कराने गई थी, डॉक्टर ने इलाज में की गड़बड़ी
मुख्यमंत्री से सीएमएचओ तक शिकायत, पति ने लगाए आरोप
छिंदवाड़ा। जिले में मरीजों के साथ खिलवाड़ करने का खेल बदस्तूर जारी है। निजी अस्पताल सामान्य बीमारी को गंभीर बता कर ऑपरेशन कर रहे हैं। जगह-जगह कॉकरोच की तरह खुले क्लीनिक मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। और रुपए कमाने के लिए डॉक्टर देवता से दानव बन गए हैं। रुपए कमाने के ऐसे ही एक लालच का शिकार हुई 38 साल की महिला महज 8 – 9 महीने के इलाज के दौरान ही मौत के मुंह में समा गई। आज वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया है और महिला के दांत, मुंह, गाल सब गल गल कर गिर रहे हैं। इसका जिम्मेदार कौन है ? इस बात पर सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि इलाज में पूरी तरह से बर्बाद हो चुके महिला के पति ने इस बात की शिकायत मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, कलेक्टर, एसपी और सीएमएचओ यहां तक की थाना प्रभारी तक को की है। लेकिन आज तक इस पूरे घटनाक्रम पर किसी ने भी संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
मामला है चांदामेटा का वार्ड नंबर 11 में रहने वाली कामना बाजपेई लगभग 8 महीने पहले सरकारी अस्पताल चांदामेटा के डॉक्टर अंकुर बेलवंशी के निजी क्लीनिक में आपने दाढ़ के दर्द को लेकर पहुंची। कामना वाजपेई की दाढ़ काली पड़ गई थी। डॉक्टर अंकुर बेलवंशी ने जांच के बाद कामना को बताया कि उसको चार इंजेक्शन लगेंगे। डॉक्टर ने एक सामान्य प्रिस्क्रिप्शन दिया और जो इंजेक्शन वह लगा रहा था। वह सीधे सामने ही मौजूद एक मेडिकल स्टोर से बुलाया। इस इंजेक्शन की जानकारी प्रिस्क्रिप्शन में नहीं है। डॉक्टर ने एक महीने में चार बार वह इंजेक्शन कामना को लगाया। इस बीच अचानक कामना की हालत बिगड़ने लगी और जब मरीज के परिजन डॉक्टर के पास उसे लेकर पहुंचे तो डॉक्टर गायब हो गया । आखिरकार कामना के पति ने उसे छिंदवाड़ा में एक चिकित्सक को दिखाया जिसने देखते ही यह बता दिया कि यह तो कैंसर है। अब या बिगड़ गया है जिसके चलते उसे मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर कर दिया गया।
इंजेक्शन ने कैंसर इनिशियल स्टेज से फोर्थ स्टेज में पहुंचाया
कामना जब अपनी दाढ़ का इलाज कराने के लिए डॉक्टर अंकुर बेलवंशी के पास पहुंची थी। उस समय डॉक्टर ने उसे बताया था कि उसका मसूड़ों टाइट है और इसलिए दाढ़ को नहीं निकाला जा सकता। पहले उसके मसूड़े को ढीला करना पड़ेगा और उसके लिए इंजेक्शन लगेंगे। हर बार डॉक्टर ने मरीज से 600 रुपए लिए और एक इंजेक्शन लगाया। इस बात की संभावना सबसे ज्यादा है कि जिस समय महिला डॉक्टर के पास पहुंची थी। इस समय उसे कैंसर इनिशियल स्टेज पर था । लेकिन डॉक्टर के गलत डायग्नोसिस और गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने के कारण कैंसर इनिशियल स्टेज से सीधे फोर्थ स्टेज में पहुंच गया ।
जब महिला का पति उसे ले लेकर पूरे मध्य प्रदेश के बड़े-बड़े अस्पतालों में भटका तो चिकित्सकों ने ऑपरेशन से साफ इनकार कर दिया । जबकि डॉक्टर के इंजेक्शन लगाने के पहले इस महिला मरीज को सही जगह रेफर किया जाता । तो संभावना थी कि उसका वह कैंसर एक छोटे से ऑपरेशन के बाद ठीक हो जाता। लेकिन आज कामना मौत की दहलीज पर खड़ी है। उसकी दो छोटी-छोटी बच्चियां है। पति महिला के इलाज में पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है । आज उसके पास इतने रुपए भी नहीं बचे की वह घर का राशन खरीद सके। दोस्त और पड़ोसी महिला के पति उपेंद्र वाजपेई की मदद कर रहे हैं। लेकिन कब तक ? अब महिला के ठीक होने की उम्मीद ना के बराबर है।
सुने कामना की कहानी उसी की जुबानी 👇
मौत के पहले दिया बयान डाइंग डिक्लेयरेशन के बराबर
मौत की कगार पर खड़ी महिला कामना बाजपेई की हालत इतनी गंभीर है कि अब उसके गाल मसूड़े और दांत गलगल कर गिरने लगे हैं। बड़ी मुश्किल से महिला का पति उपेंद्र बाजपेई उसकी सेवा कर रहा है। महिला घर में पड़ी है ना ठीक से खा पा रही है ना ठीक से सो पा रही है। हालत इतनी दयनीय है कि प्रदेश भर के सभी कैंसर अस्पतालों ने महिला का ऑपरेशन करने से मना कर दिया है। इन हालात में जीवन की डोर कब उसके हाथ से निकल जाए यह कहना मुश्किल है। लेकिन महिला ने एक वीडियो में बयान जारी किया जिसमें उसने कहा है कि उसकी हालत बिल्कुल ठीक थी लेकिन जब डॉक्टर ने उसे चार इंजेक्शन लगाए और एक महीने तक इलाज करता रहा। उसके बाद अचानक उसकी हालत बिगड़ गई और फिर उसकी हालत कभी नहीं सुधरी और लगातार बिगड़ती गई। महिला का यह बयान आज कोई मायने नहीं रखता। और ना ही उसकी कोई सुनने वाला है। लेकिन कल कहीं यह बयान डाइंग डिक्लेरेशन में बदल गया । तो डॉक्टर की मुश्किलें बढ़ जाएगी। बताया जा रहा है कि सरकारी डॉक्टर खुद का क्लीनिक भी चला रहा है। जबकि अस्पतालों में इलाज के नाम पर यह डॉक्टर केवल खाना पूर्ति करते हैं। वही अपने निजी अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़ करते हैं।
महिला की जान पर बन गई और सिस्टम तमाशबीन बना
महिला के डॉक्टर अंकुर बेलवंशी के द्वारा इलाज किए जाने के बाद बिगड़ी हालत और आज तक उसकी लगातार बिगड़ती स्थिति की शिकायत महिला के पति उपेंद्र वाजपेई ने मुख्यमंत्री से लेकर सीएमएचओ तक की है। लेकिन आज तक मुख्यमंत्री, कलेक्टर, एसपी या सीएमएचओ ने इस मामले में कोई जांच आगे नहीं बढ़ाई। चांदामेटा के टी आई का कहना है की जांच चल रही है। लेकिन जांच कब की जाएगी और कैसे की जाएगी यह बात कोई नहीं कह रहा । पूरा सिस्टम तमाशबीन बना हुआ है। जबकि एक जान के साथ खिलवाड़ हो चुका है। महज 2400 रुपए कमाने के लिए डॉक्टर ने इस महिला को मौत के मुंह में धकेल दिया है। डॉक्टर ने बीमारी को परखा ही नहीं और उसका इलाज करता रहा। आखिरकार आज महिला दयनीय हालत में पड़ी है।
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