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बाघ की हत्या और अफीम की खेती : फॉरेस्ट – पुलिस पर उठे सवाल ?

एक एकड़ जमीन पर 4 महीने से लगी थी अफीम की फसल

खुल न जाए राज इसलिए किसान ने कर दी बाघ की हत्या

छिंदवाड़ा । जिले के पश्चिमी वन मंडल में हुई एक बाघ की हत्या के बाद एक ऐसा राज खुला जिसने पुलिस और फॉरेस्ट के अधिकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए। यह मामला तो बाघ की हत्या से जुड़ा था। लेकिन जब बाघ का शव बरामद हुआ तो शव के साथ बरामद हुई एक एकड़ जमीन पर लगी अफीम की फसल । जो कि लगभग चार महीने पुरानी फसल है। और जिस पर फूल के बाद अब डोडा भी आ गया था। लेकिन आज तक फॉरेस्ट और पुलिस के अधिकारी कर्मचारियों को इस बात का पता नहीं चल सका कि उनके क्षेत्र में अफीम की इतनी बड़ी मात्रा में खेती की जा रही। घटना है पश्चिम वन मंडल के सांगाखेड़ा बीट की और तामिया थाना क्षेत्र की।

दरअसल 26 मार्च से पश्चिम वन मंडल के सांगाखेड़ा बीट के अधिकारी कर्मचारी नर्मदापुरम सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के एक कॉलर आईडी वाले बाघ की तलाश कर रहे थे। तलाश करते-करते फॉरेस्ट की टीम को तामिया थाना क्षेत्र के छाती आम के पास एक बैल का शव मिला। शव देखते ही फॉरेस्ट की टीम समझ गई की इसका शिकार बाघ ने किया है। फिर बाघ की तलाश तेज कर दी गई । लेकिन बाघ की हत्या तो पहले ही की जा चुकी थी। बाघ को मारने वाले किसान को हिरासत में लिया तो एक और राज खुला और वह राज था अफीम की खेती का। अफीम की खेती लगभग एक एकड़ जमीन में की जा रही थी। जिसमें डोडा आ चुका है और किसान अब इस डोडा पर कट लगाने की तैयारी कर रहा था ताकि उस चरस बनाई जा सके।

फसल का राज छुपाने बाघ की हत्या, कॉलरआईडी काटकर फेंकी

नर्मदा पुरम का बाघ सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से होते हुए छिंदवाड़ा के जंगल में पहुंच गया। और उसने छातीआम में एक बैल का शिकार किया। टाइगर का मूवमेंट होने के कारण अफीम की खेती करने वाले किसान को इस बात का संदेह हो गया था कि बाघ को ढूंढते हुए फॉरेस्ट की टीम जब यहां आएगी तो उन्हें अफीम की फसल भी दिखाई दे जाएगी। इस दौरान बाघ बैल का शिकार करने के बाद वहां से चला गया था। लेकिन किसान को पता था की बाघ दोबारा बेल को खाने के लिए आएगा। इस जानकारी का फायदा उठाते हुए किसान ने बैल के शव पर ढेर सारा यूरिया लगा दिया और जब बाघ दोबारा बैल को खाने के लिए आया तो उस जहरीले यूरिया के कारण बाघ की मौत हो गई। यही किसान चाहता था। बाघ की हत्या करने के बाद किसान ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर इस बाघ को गड्ढा खोदकर गड़ा दिया। जिसे बाद में फॉरेस्ट की टीम ने निकाला। बड़ी बात यह है कि पूरी घटना को छुपाने के लिए किसान ने बाघ की कॉलर आईडी काटकर कहीं और ले जाकर फेंक दी थी। ताकि फॉरेस्ट को भ्रमित कर सके लेकिन फिर भी वह पकड़ा गया।

पुलिस और फॉरेस्ट की कार्यप्रणाली क्यों हैं संदेह के घेरे में

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी बात यह है कि बाघ की मौत ने एक ऐसा राज उजागर किया इसके बारे में फॉरेस्ट और पुलिस के अधिकारी कर्मचारियों को कोई खबर तक नहीं थी। और यही वह बात है जिसने फॉरेस्ट और पुलिस के अधिकारी कर्मचारियों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए है। बड़ी बात यह है कि दोनों ही विभाग जमीनी विभाग है और उनके कर्मचारियों को लगातार क्षेत्र में गस्ती करने, मुखबिर तंत्र को मजबूत करने और लोगों से जान पहचान बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है। लेकिन 4 महीने की अफीम की फसल का आज तक पता नहीं चला था। इसका मतलब साफ है कि न ही फॉरेस्ट के कर्मचारी फील्ड पर पहुंच रहे हैं और ना ही पुलिस के कर्मचारी अपने क्षेत्र में नजर रख रहे हैं। मतलब साफ है कि दोनों ही विभागों के अधिकारी कर्मचारी निकम्मे में हो गए हैं। और उनको कंट्रोल करने वाले आला अधिकारियों का उन पर दबाव खत्म हो चुका है। तभी एक बाघ की मौत से करोड़ों की अफीम की फसल का राज खुल सका वरना यह राज- राज ही रह जाता।

Next Episode – कौन है खरीददार, किसके इशारे पर हो रहा नशे का कारोबार।

नाकामी… Avinash Singh
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