खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की लापरवाही से बने हालात
सरकार बता रही भरपूर रसोई गैस, यहां हो रहे चक्काजाम
छिंदवाड़ा । छिंदवाड़ा शहर में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। हर दिन रसोई गैस सिलेंडर लेने के लिए हजारों लोग सड़कों पर निकलते हैं। और परेशान होते देखे जाते हैं मंगलवार को तो रसोई गैस के लिए चक्का जाम तक कर दिया गया। और बेकसूर लोगों को पुलिस की लाठियां खानी पड़ी। लेकिन यह हालत क्यों बन रहे हैं ? यह सवाल सबसे बड़ा है । क्योंकि अब तक केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने हर बार यही कहा है की रसोई गैस की कोई किल्लत नहीं है। उसके बाद भी छिंदवाड़ा शहर में आपूर्ति लड़खड़ा गई है। लोगों को होम डिलीवरी नहीं की जा रही है।
जरूरतमंद लोग सिलेंडर लेकर दिन दिन भर परेशान हो रहे हैं । उसके बाद भी रसोई गैस नहीं मिल रही है। आखिर यह किसकी लापरवाही है ? क्या यह गैस एजेंटीयों की कलाकारी है ? या फिर प्रशासनिक फैलियर ? जिसके चलते सड़क पर सिलेंडर रखकर लोगों को आंदोलन करना पड़ रहा है। इस बात का जवाब केवल जिला प्रशासन के पास है। केंद्र और राज्य सरकार ने अब तक कहीं पर भी यह नहीं कहा कि गैस रसोई गैस की कमी है। सबसे बड़ी समस्या है वितरण, शुरुआत में लोगों में डर जरूर था लेकिन अब तो वे लोग सड़कों पर दिख रहे हैं जिनके घर में चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं। यह हालत क्यों बने इसके लिए जिम्मेदार कौन है । और क्या एजेंसियां प्राप्त सिलेंडरों का पूरा वितरण कर रही है ? इन सवालों के जवाब कोई नहीं तलाश रहा। जबकि पुलिस बेकसूरों पर लाठियां बरसाआने पर उतारू है।
शहर में ऐसे हैं हालात…देखे वीडियो 👇
शहर में अचानक कहां से दिखने लगे कमर्शियल सिलेंडर
छिंदवाड़ा में सभी गैस एजेंसी में डोमेस्टिक या घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति का केवल 40% हिस्सा ही लोगों के घरों में पहुंचता है । अब तक होता यह आया है कि गैस एजेंसीया सीधे छोटे व्यापारियों, रेस्टोरेंट, ढाबे और होटल में कमर्शियल सिलेंडर की बजाय कम कीमत में मिलने वाला घरेलू गैस सिलेंडर सप्लाई करते थे। लेकिन युद्ध के चलते जब सख्ती की गई तो गैस एजेंटीयों ने नया रास्ता निकाला है। अब होटल में रेस्टोरेंट में ढाबों में और सड़क पर लगे ठेलो में नीले कलर के सिलेंडर अचानक नजर आने लगे। आखिर इतने कमर्शियल सिलेंडर आ कहां से रहे हैं। यह एक बड़ा सवाल है, क्या इसमें गैस एजेंटीयों का गोलमाल है? और घरेलू गैस सिलेंडर का इस पूरे कांड में उपयोग हो रहा है। क्योंकि जितने गैस सिलेंडर अब भी गैस एजेंसी को प्राप्त हो रहे हैं , उतनी डिमांड घरेलू कनेक्शन की है ही नहीं। फिर डॉमेस्टिक सिलेंडर जा कहां रहे हैं। कहीं यह गैस एजेंटीयों की बड़ी कलाकारी तो नहीं है। जिसमें अधिकारियों की मिली भगत हो सकती है। तभी आपूर्ति और वितरण में इतनी असमानता देखने को मिल रही है।
बुकिंग के बाद भी घर नहीं पहुंचा रहे रसोई गैस सिलेंडर
शहर में पूरी तरह से रसोई गैस की आपूर्ति लड़खड़ाई हुई है। लोग सिलेंडर का इंतजार करते-करते परेशान हो रहे हैं । तो दूसरी तरफ बुकिंग के बाद भी रसोई गैस सिलेंडर घर नहीं पहुंचाए जा रहे। जिससे लोगों की परेशानी और ज्यादा बढ़ रही है। जबकि रसोई गैस की आपूर्ति का सबसे सीधा साधन होम डिलीवरी है। लेकिन गैस एजेंटीयों ने इतने वाहन रखे ही नहीं है कि पूरे शहर में रसोई गैस की आपूर्ति होम डिलीवरी के माध्यम से कराई जा सके। अक्सर गैस एजेंसी यह कहती नजर आ रही है कि हम घर तक सिलेंडर नहीं पहुंचाएंगे। आपको लेने के लिए आना पड़ेगा। जिस पर खाद एवं आपूर्ति विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। क्योंकि रसोई गैस वितरण और आपूर्ति के लिए यही विभाग जिम्मेदार है। लेकिन इस विभाग का कोई भी जिम्मेदाराना काम शहर में दिखाई नहीं दे रहा है। न हीं गैस एजेंटीयों पर नजर रखी जा रही है । कि आखिर आपूर्ति के बाद भी गैस सिलेंडर की सप्लाई इतनी धीमी क्यों हो रही है। बड़ी बात यह है कि खाद एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी कलेक्टर एवं आला प्रशासनिक अधिकारियों को भी गुमराह करते नजर आ रहे हैं।
अव्यवस्था….Avinash Singh
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