Dmart के पास अवैध बिल्डिंग, नाले की जमीन पर
पीछे 50 फिट से ज्यादा का नला बना 5 फिट की नली
छिंदवाड़ा। नगर निगम शहर में हर मोर्चे पर फेल नजर आ रहा है । शहर मैं पानी के लिए त्राहिमाम मचा पड़ा है। शहर के अंदर ही सरकारी जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं। अवैध कॉलोनी के निर्माण हो रहे हैं। कचरा गाड़ी समय पर नहीं पहुंच रही, कॉलोनी में झाड़ू नहीं लग रही, हर मोर्चे पर नगर निगम फेल है । लेकिन अधिकारियों का वेतन हर महीने बराबर हो रहा है। वेतन मारा जा रहा है तो केवल उन कर्मचारियों का जो इस चिलचिलाती धूप में भी सड़क पर मेहनत कर रहे हैं। नगर निगम का अतिक्रमण विरोधी अमला गाड़ियों में सोता नजर आ रहा है । हर तरफ नालों की जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है। जिसे रोकना नगर निगम के लाखों रुपए वेतन पाने वाले उन अधिकारियों की जिम्मेदारी है जिस बात का उन्हें वेतन मिल रहा है। इसके अलावा खुलेआम कमीशन खोरी भी कर रहे हैं।
नालों पर हो रहे इस अतिक्रमण को रोकने के लिए नगर निगम को किसी खास संसाधन की आवश्यकता नहीं है। जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टर पर होने वाले डीजल के खर्चे, अधिकारियों को मिलने वाले वेतन और अतिक्रमण रोधी दस्ते के साथ बिना किसी अतिरिक्त संसाधन या रुपए के यह अतिक्रमण हटाया जा सकता है। लेकिन नगर निगम यहां पर भी फेल है। क्या शहर की जनता केवल 10 गुना टैक्स देने के लिए ही बनी है। यह सवाल अब शहर में उठने लगा नगर निगम के चुनाव को केवल 1 साल रह गए हैं। प्रदेश में भाजपा की सरकार है उसके बाद भी शहर के हाल बस्तर है। बड़बन जैसी कॉलोनी जहां खुद कलेक्टर रहते हैं वहां पर भी अब एक दिन के बाद पानी मिल रहा है इतना गजब छिंदवाड़ा हमने पहली बार देखा है।
कैसे अतिक्रमण हुआ बन गई नली…👇
नालों पर एक पूरा कानून, लेकिन अधिकारी कमीशन में मस्त !
शहर के नालों और नालियों पर होने वाले अतिक्रमण को हटाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। और बाकायदा इसका प्रावधान मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 187 में साफ तौर पर किया गया है। नगर पालिकाओं में तो सीएमओ कमजोर पड़ जाते हैं। लेकिन नगर निगम के कमिश्नर को इस बात का पूरा अधिकार है की सरकारी नालों की नपाई कराए और इस पर हुए अतिक्रमण को केवल 7 दिन का नोटिस देकर तोड़ दे। शहर में नगर निगम के कमिश्नर कलेक्टर से ज्यादा पावरफुल हैं। और उन्हें अतिक्रमण हटाने के लिए किसी की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। बाकायदा अधिनियम में कमिश्नर को पूरा अधिकार दिए हुए हैं। लेकिन छिंदवाड़ा शहर के हाल देखते हुए लगता है कि यहां अधिकारी केवल वेतन और कमीशन के लिए नौकरी कर रहे हैं।
दर्जनों इंजीनियर, खुद कमिश्नर, राजस्व विभाग की एक पूरी टीम, अतिक्रमण रोधी दस्ता होने के बाद भी नाले, नालियों में बदल गए । अधिकारी आए और अपने जाने के इंतजार तक वेतन और कमीशन लेकर चले गए । इतना ही नहीं भ्रष्टाचार का यह बड़ा खेल अवैध कॉलोनी से शुरू होता है और नगर निगम के मार्फत होने वाले निर्माण कार्यों तक भारी भरकम कमीशन पर खत्म होता है। जो नहीं होता वह यह है कि अधिकारियों को जिस काम के लिए नगरी निकायों में पदस्थ किया गया है वह काम । अधिकारी केवल अपना दायित्व छोड़कर बाकी सब कुछ करते हैं जिससे रुपए आए।
Next Episode – भू माफिया एक और नाले पर कॉलोनी काटने कर रहा कब्जा ।
अंधेर नगरी चौपटराजा…Avinaash Siingh
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