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अंधेर नगरी चौपटराजा : कन्हारगांव, माचागोरा से सप्लाई फिर भी शहर प्यासा !

तानाशाही : कन्हरगांव डेम का पानी किसने रोका

कमीशन में मस्त महापौर – कमिश्नर, जनता हलकान

छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा शहर की जनता ने शायद ही कभी ऐसा दौर देखा हो जब बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए हाहाकार मचा हो। एक जरा सी आंधी पूरी रात लोगों को अंधेरे में रखती है। और पानी के लिए पूरे शहर में हाहाकार मचा हुआ है। लोग अपने-अपने क्षेत्र में पड़ोसियों के बोर से पानी लेने को मजबूर है। और उनकी टंकियां खाली पड़ी। इतना बेगैरत नगरी प्रशासन शायद ही छिंदवाड़ा के लोगों ने कभी देखा हो। जो शहर की जनता को 30 – 40 साल पीछे लेकर चला गया। शहर में बिजली की समस्या है, शहर में पानी की समस्या है, कॉलोनी में हाहाकार मचा पड़ा है। और नगरीय प्रशासन के मुखिया और प्रबंधन प्रमुख कमीशन में मस्त है। शहर की जनता से इन लोगों को कोई सरोकार नहीं। हालात यह बन गए हैं कि जिन क्षेत्रों में कभी पानी की सप्लाई किसी भी कारण से नहीं रोकी गई। उन क्षेत्रों में दो-दो दिन से नल नहीं आ रहे।

नगर निगम के जिम्मेदार पदाधिकारी और अधिकारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं है। केवल टालमटोल की राजनीति चल रही है। पूरे शहर में पानी के लिए लोग परेशान हो रहे हैं । भीषण गर्मी में छिंदवाड़ा शहर के यह हाल तब देखने को मिल रहे हैं जब कन्हर गांव भरा हुआ है । और माचागोरा से भी शहर में पानी की सप्लाई हो रही है । उसके बाद भी शहर पर प्यासा है। इतना निकम्मा और नाकारा नगरी प्रशासन छिंदवाड़ा शहर में नगर पालिका के समय भी नहीं रहा और अब तो जबकि नगर निगम है उसके बाद यह हाल शहर की जनता को सोचने पर मजबूर कर रहे हैं कि आखिर यह कैसा विकास है जो शहर को विकास की तरफ ले जाने की बजाय सालों पीछे लेकर जा रहा है।

महापौर – कमिश्नर को कोई सरोकार नहीं

नगर निगम ने गरीबी का रोना रोते हुए शहर की जनता पर 10 गुना से ज्यादा टैक्स ठोक दिया । उसकी वसूली भी चल रही है । लेकिन जहां मूलभूत सुविधाओं की बात की जाए तो न महापौर को इस बात से कोई लेना देना है की शहर की जनता हलकान हो रही है । ना ही सत्ता दल के पार्षदों को । नगर निगम की एमआईसी और आमसभा की बैठक में हंगामा जरूर होते हैं लेकिन इन हंगामों की उम्र केवल नगर निगम का सभा कक्ष तक ही रहती है। महापौर विक्रम आहके कांग्रेस से जीतकर महापौर बने । उसके बाद विकास करने के लिए भाजपा में शामिल हो गए । लेकिन अब वह खुद का विकास करते नजर आ रहे हैं।

उनको इस बात से कोई लेना-देना नहीं है की शहर में चल क्या रहा है। और नाही वे शहर की आम जनता के साथ खड़े नजर आ रहे हैं । इन नेताओं को सिर्फ नेतागिरी करनी है। कमिश्नर को इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि शहर में पानी की सप्लाई हो रही है या नहीं । या इसकी व्यवस्था कहां से बनाई जानी चाहिए । कन्हर गांव डैम में पानी भरा हुआ है। लेकिन कमिश्नर उसे शहर तक नहीं पहुंचा पा रहे। माचागोरा से शहर में पानी आ रहा है। लेकिन उसकी सप्लाई शहर में नहीं हो पा रही। आखिर यह कैसा नगरी प्रशासन है जो विकास के नाम पर लोगों से 10 गुना ज्यादा टैक्स वसूल रहा है और सुविधाओं के नाम पर लोगों को हलकान कर रहा है।

किसने रोका कन्हरगांव डेम का पानी ?

कन्हरगांव से छिंदवाड़ा तक आने वाला पानी कई रासुखदारों के गांव से होकर गुजरता है। और हाल ही में एक रसूखदार नेता ने कन्हरगांव का पानी भरता देव तक आने से रोक दिया। जिसके चलते शहर में सप्लाई प्रभावित हुई। इस बात के चर्चे शहर में चल रहे हैं की एक बार फिर नेताजी ने शहर वासियों को प्यासा रखने का पूरा इंतजाम कर लिया। जबकि यही नेताजी घूम-घूम कर खुद को जनता का मसीहा बताते नजर आ रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि शहर के इन नेताओं को जनता से कोई सरोकार है ही नहीं। यह नेता भाजपा संगठन और सत्ता में पद पाने की लालसा लिए दिखाई तो दे रहे हैं। लेकिन इनके हाथी के दांत दिखाने के कुछ और है और खाने के कुछ और है। जनता का पानी रोककर अपने खेतों में पानी की सप्लाई कर दी जा रही है। छिंदवाड़ा का नगरी प्रशासन मुंह ताक रहा है। जबकि अगले साल नगर निगम के चुनाव है और हाल यह है कि जनता हलकान है। जल्द इस बात का खुलासा भी हम करेंगे कि आखिर किस नेता ने अपने खेतों की तरफ छिंदवाड़ा की आम जनता का पानी मोड़ दिया और जनता प्यासी रह गई। पूरे प्रमाण और वीडियो के साथ।

अंधेर नगरी चौपट राजा…Avinash Singh
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