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पुलिस का कारनामा : किशोर न्यायालय का मामला, सेशन कोर्ट में किया पेश !

जिसे जाना था किशोर सुधार गृह, 6 महीने से जिला जेल में क़ैद

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद किशोर न्यायालय भेजा प्रकरण

छिंदवाड़ा। पुलिस अधिकारियों की काम चलाऊ कार्यशैली का कारनामा लोगों को भुगतना पड़ता है। कई मामलों में पुलिस खाना पूर्ति के लिहाज से काम करती है। और नियम और कानून को ताक पर रखकर कार्रवाई करती है। ऐसा ही एक मामला परासिया सत्र न्यायालय में सामने आया। जहां एक प्रकरण जिसे किशोर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना था। वह प्रकरण पिछले 6 महीने से परासिया अपर सत्र न्यायालय में चल रहा है। दुष्कर्म के इस मामले में आरोपी ने जब अपराध किया तब वह नाबालिक था। लेकिन पुलिस ने मामले की शिकायत के आधार पर प्रकरण को सत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया। मामला चांदामेटा थाना क्षेत्र का है। चांदामेटा थाने में 20 अगस्त 2025 को एक शिकायत दर्ज कराई गई। यह शिकायत दर्ज कराई एक नाबालिक किशोरी ने जो 4 महीने की गर्भवती थी।

इस मामले में किशोरी ने आरोप लगाया कि उसके मामा का बेटा ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। इस मामले में पुलिस ने लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 सहित बीएनएस की अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जिस समय आरोपी को गिरफ्तार किया गया उस समय उसकी उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी थी। न्यायालय ने शिकायत के आधार पर प्रकरण तैयार कर अपर सत्र न्यायालय परासिया में प्रस्तुत कर दिया और पिछले 6 महीने से या प्रकरण सत्र न्यायालय में चल रहा है । इसी बीच आरोपी की वकील अधिवक्ता निकिता डेहरिया ने घटना के समय आरोपी के नाबालिक होने की जानकारी देकर न्यायालय से यह प्रकरण किशोर न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की । लेकिन अपर सत्र न्यायालय ने आवेदन खारिज कर दिया जिसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई ।

उच्च न्यायालय ने माना कि घटना दिनांक को जिस समय यह वारदात घटित हुई। उस समय आरोपी 17 साल 9 महीने का था। मतलब आरोपी घटना के समय नाबालिक था और उसका प्रकरण किशोर न्यायालय में चलना चाहिए । उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अपर सत्र न्यायालय परासिया गौतम गुजरे ने इस प्रकरण को किशोर न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया है।

आरोपी और पीड़िता दोनों आदिवासी, मामा बुआ के बच्चे

दरअसल नाबालिक किशोरी और आरोपी दोनों ही मामा बुआ के बच्चे हैं और आदिवासी है। आदिवासी परंपरा के अनुसार ऐसे रिश्तों में विवाह संपन्न कराए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले में भी ऐसा ही कुछ है । आरोपी और पीड़िता दोनों का विवाह उनके परिवार में पहले ही तय कर दिया था। इसी बीच पेट में दर्द होने की शिकायत के बाद जब पीड़िता की जांच कराई गई तो पीड़िता 4 माह की गर्भवती निकली। उसके बाद मामले की शिकायत थाना चांदामेटा में दर्ज कराई गई । हालांकि बताया यह भी जा रहा है कि पीड़ित पक्ष पहले ही कह चुका है की बालिक होने के बाद इनका विवाह भी कराया जाएगा। आरोपी और पीड़ित पक्ष दोनों इस बात के लिए तैयार हैं। लेकिन फिर भी पिछले 6 महीने से आरोपी जिला जेल में बंदी के रूप में कैद है और अपने प्रकरण के फैसले का इंतजार कर रहा है। जबकि यह प्रकरण किशोर न्यायालय में चलाया जाना चाहिए था जो प्रकरण अपर सत्र न्यायालय में चल रहा है । आरोपी जिसे बाल सुधार गृह भेजा जाना चाहिए था वह जिला जेल में कैद है।

सवाल क्या नशे में हो रही अपराध जांच और पुलिस कार्रवाई ?

चांदामेटा थाने के इस प्रकरण ने पुलिस पर एक सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रकरणों की और अपराध की जांच नशे में की जा रही है। उस पर की जाने वाली कार्रवाई पर मोहर लगाने वाले तंत्र पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं। दरअसल दुष्कर्म के इस मामले की शिकायत 20 अगस्त 2025 को चांदामेटा थाने में की गई । उस समय पीड़िता चार महीने से गर्भवती थी । पीड़िता ने उसके साथ हुए दुष्कर्म की तारीख 18 अप्रैल 2025 बताई थी। जिस समय आरोपी नाबालिक था। पुलिस ने शिकायत करने की तारीख को आधार बनाकर इस प्रकरण को अपर सत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया। जबकि मामले की जांच 18 अप्रैल 2025 घटना दिनांक से शुरू होनी चाहिए थी। घटना दिनांक के आधार पर प्रकरण बनाया जाना चाहिए था । प्रकरण किशोर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता। बड़ी बात यह है कि पुलिस के द्वारा बनाए जाने वाले प्रकरणों को अभियोजन अधिकारियों के पास भी जांच के लिए भेजा जाता है। लेकिन इस मामले में अभियोजन अधिकारियों ने भी कोई ध्यान नहीं दिया और प्रकरण को अपर सत्र न्यायालय में सुनवाई के लिए प्रस्तुत कर दिया।

लापरवाही… Avinash Singh
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