सड़क और नाली के लिए कहां से लाया जमीन
आरआई – पटवारी के भरोसे राजस्व महकमा
छिंदवाड़ा। जिले का सबसे बड़ा महकमा जिसकी कमान खुद कलेक्टर के हाथ में होती है। कलेक्टर जिले के राजस्व अधिकारी है और इसी राजस्व विभाग के कारण कलेक्टर को इतनी सुविधा मिलती है। इतना बड़ा महकमा इन दिनों पटवारी और आरआई के हाथों की कठपुतली बनकर रह गया है। सरकारी जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं। सरकारी जमीन कॉलोनीयों के प्लाटों में काट दी जा रही है। और आरआई – पटवारी खानापूर्ति कर सरकार को चुना लगा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला शहर से लगे ग्राम गुरैया रमना में सामने आया है। जहां पर ग्रामीणों ने एक चारागाह की भूमि दो एकड़ की कॉलोनी में शामिल कर सरकारी जमीन पर कब्जा करने की शिकायत की। लेकिन जांच करने पहुंचे आर आई और पटवारी ने केवल खाना पूर्ति कर पंचनामा तैयार कर दिया।
यह मामला है शहर के निकटतम ग्राम गुरैया का जहां पर तनवीर ने एक दो एकड़ की कालोनी काटी है। इस कॉलोनी का रकबा कुल 88203 वर्ग फिट यानी कि दो एकड़ है। तनवीर ने इस कॉलोनी में 46 प्लॉट काटे हैं। जिसका कुल रकबा 77446 वर्ग फुट है। याने की इस दो एकड़ की कॉलोनी में तनवीर ने केवल 10 हजार स्क्वायर फीट जमीन पर रोड और नाली बना दी जो की संभव नहीं है। इस बात की शिकायत की गई लेकिन आरआई – पटवारी ने खाना पूर्ति की नपाई कर दी और शिकायत करने वाले ग्रामीण मुँह ताकते रह गए। इस दो एकड़ की कॉलोनी में तनवीर ने बड़ा खेल कर दिया और आरआई पटवारी की शह पर तानाशाह बन बैठा है।
2 एकड़ में 56 हजार वर्गफीट पर ही हो सकती है प्लाटिंग
कॉलोनी बनाने के लिए कॉलोनाइजर को पहले रोड और नाली के साथ-साथ कॉलोनी के लिए ओपन स्पेस की जमीन भी निकालनी पड़ती है । दो एकड़ भूमि पर लगभग 88 हजार वर्ग फुट भूमि मिलती है। जिस पर केवल 56 से 60 हजार वर्ग फुट जमीन पर ही प्लाटिंग की जा सकती है। क्योंकि बाकी बची लगभग 30 से 32 हजार वर्ग फीट जमीन पर रोड नाली और ओपन स्पेस छोड़ा जाता है। ताकि कॉलोनी को सु अवस्थित बनाया जा सके और यही सरकारी नियम भी है। गुरैया रमना में जो कालोनी काटी गई है वह दो एकड़ की कॉलोनी है। इस कॉलोनी में काटे गए 46 प्लांट लगभग 77000 वर्ग फुट जमीन पर काट दिए गए हैं।

अब सवाल यह उठता है कि जब कॉलोनी में 77000 वर्ग फुट पर केवल मकान बनेंगे तो फिर रोड और नाली कहां बनाई जाएगी। यह किस जमीन पर बनाई जाएगी और ओपन स्पेस के लिए जमीन कैसे छोड़ी जाएगी । इसका मतलब साफ है की कॉलोनी काटने वाले ने सरकारी जमीन का उपयोग किया है और लगभग 25 हजार वर्ग फुट से ज्यादा सरकारी जमीन कॉलोनी में मिला दी है। यहां पर संभावना यह भी है कि कॉलोनाइजर ने सरकारी जमीन को अपने रकबे में शामिल करके प्लाट काट दिया और सड़क भी बना दी हो । लेकिन आरआई – पटवारी के आगे कलेक्टर भी बौने साबित हो रहे हैं। क्योंकि रिपोर्ट तो आरआई और पटवारी की ही मानी जाएगी फिर चाहे वे सरकारी जमीन को तनवीर के नाम ही ना कर दे।
ऐसे गंभीर मामलों में भी मूक दर्शक बने रहते हैं तहसीलदार
किसी भी शिकायत पर भूमि का सीमांकन करने का आदेश तहसीलदार के द्वारा दिया जाता है। लेकिन ऐसे गंभीर मामलों में भी अक्सर तहसीलदार केवल मूक दर्शक बने नजर आते हैं। और अपने कार्यालय में बैठकर खाना पूर्ति करते दिखाई देते है। जबकि यह जिम्मेदारी तहसीलदार की है कि जब मामला सरकारी जमीन का हो तो मौके पर जाकर सरकारी जमीन का सीमांकन किया जाना चाहिए। लेकिन ज्यादातर मामलों में ऐसा होता ही नहीं। तहसीलदार केवल उन मामलों में ही मौके पर पहुंचते हैं जहां पर किसी नेता की एप्रोच लगाई गई हो और एसडीएम या कलेक्टर से सीधे आदेश मिले हो कि जाकर मामले का निराकरण करें। अन्य मामलों में तहसीलदारों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है जबकि राजस्व विभाग तहसीलदारों के भरोसे ही चल रहा है। पूरे जिले में सरकारी जमीनों पर अवैध उत्खनन चल रहे हैं। नदिया छलनी की जा रही है। सरकारी जमीनों पर कब्जे किए जा रहे हैं। लेकिन मजाल है कि तहसीलदार अपनी तरफ से किसी मामले में संज्ञान लेकर कार्यवाही कर दे। वह तो शिकायत आने का इंतजार करते हैं और जब शिकायत आती है तो आरआई और पटवारी के भरोसे जांच की जाती है।
राजस्व में भ्रष्टाचार… Avinash Singh
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