ऑन कॉल भी 4 घंटे बाद ही नागपुर से पहुंच पाएगा कार्डियोलॉजिस्ट
जिला अस्पताल – मेडिकल कॉलेज में नहीं है डीएम कार्डियोलॉजी
छिंदवाड़ा । छिंदवाड़ा शहर में मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों की बाढ़ आ गई है। यह निजी अस्पताल हर तरह का इलाज करने का दावा कर रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा दवा तो हार्ट की बीमारियों का इलाज करने का है। जिसमें हार्ट अटैक से लेकर हार्ट की एंजियोग्राफी और एनजीओ प्लास्टि तक निजी अस्पताल कर रहे हैं। अब तक दावा करने वाले निजी अस्पतालों ने कई एनजीओ प्लास्टि कर दिए और कई मामलों में मरीज गंभीर रूप से बीमार हुआ है। मरीज उसकी मौत तक हो गई है। आखिर शहर के निजी अस्पताल हार्ट की बीमारियों का हर तरह का इलाज कैसे कर पा रहे हैं। जबकि उनके पास हार्ट के ऑपरेशन करने या हार्ट के ब्लॉकेज की जांच करने के लिए अधिकृत चिकित्सक ही उपलब्ध नहीं है।
हेल्थ इंडस्ट्री के इस एपीसोड में एक बड़ा सवाल सामने आया और वह सवाल यह है कि शहर में निजी अस्पतालों ने खुद को मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल तो बता दिया उसके बाद भी अब यह निजी अस्पताल हार्ट के ऑपरेशन, ब्लॉकेज की जांच जैसी गंभीर परिस्थितियों का इलाज करने का दावा भी करने लगे है। इन अस्पतालों में बाकायदा हार्ट के मरीज भर्ती किए जाते हैं और एंजियोग्राफी से लेकर एनजीओ प्लास्टि तक इन अस्पतालों में की जाती है। जबकि बड़ी बात यह है की वर्तमान स्थिति तक शहर के किसी भी निजी अस्पताल में परमानेंट कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है तो फिर बिना कार्डियोलॉजिस्ट के अस्पतालों में कैसे हार्ट की बीमारी का इलाज हो रहा है ? कैसे ऑपरेशन हो रहे हैं ? और कैसे मरीज की मॉनिटरिंग हो रही है यह एक बड़ा सवाल है ?
क्या है हार्ट की बीमारी के इलाज के दावे का सच सुने वीडियो…👇
जिला अस्पताल-मेडिकल कॉलेज में नहीं है कार्डियोलॉजिस्ट
वर्तमान में छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज का अस्पताल जिला अस्पताल में ही चल रहा है। यहां जिला अस्पताल के डॉक्टर के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज के भी सभी डॉक्टर मरीज का उपचार कर रहे हैं। बड़ी बात यह है कि निजी अस्पताल मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर के भरोसे कई बीमारियों का इलाज कर पा रहा है। क्योंकि यह डॉक्टर निजी अस्पतालों में भी सेवाएं दे रहे हैं । अगर बात की जाए हार्ट के ऑपरेशन और एंजियोग्राफी की तो यह जानना सबसे ज्यादा जरूरी है कि क्या जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के 175 डॉक्टर में से कोई डॉक्टर कार्डियोलॉजिस्ट भी है। दरअसल एमबीबीएस के बाद एमडी की मास्टर डिग्री हासिल की जाती है। और इसके बाद बारी आती है स्पेशलाइजेशन की जो अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग-अलग होती है। जैसे हार्ट की बीमारी के लिए किसी एमडी डॉक्टर को डीएम कार्डियोलॉजी में स्पेशलाइजेशन करना होता है। तभी वह एंजियोग्राफी और एनजीओ प्लास्टि के साथ-साथ ओपन हार्ट सर्जरी कर सकता है। लेकिन जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के 175 डॉक्टर में में से कोई भी डीएम कार्डियोलॉजी नहीं है। यानी की मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में एक भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं।
नागपुर से 4 घंटे बाद ही छिंदवाड़ा पहुंचेगा कार्डियोलॉजिस्ट
शहर के निजी अस्पताल दावा कर रहे हैं कि उनके पास ऑन कॉल कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध है । और यह कार्डियोलॉजिस्ट आता नागपुर से है। लेकिन हार्ट का गंभीर मरीज तत्काल इमरजेंसी में शहर के किसी अस्पताल में भर्ती होता है, तो एमडी मेडिसिन डॉक्टर उसका प्राथमिक उपचार तो कर सकता है। लेकिन हार्ट की बीमारी का गंभीर उपचार जैसे की एंजियोग्राफी और एनजीओ प्लास्टि की तत्काल आवश्यकता पड़े तो उसके लिए भी शहर के निजी अस्पतालों को नागपुर से डीएम कार्डियोलॉजी बुलाना पड़ेगा । नागपुर से कितनी भी जल्दी कार्डियोलॉजिस्ट छिंदवाड़ा पहुंचे तो भी उसे कम से कम 4 घंटे लगेंगे। क्योंकि कॉल मिलने पर कार्डियोलॉजिस्ट किस स्थिति में नागपुर में मौजूद होगा यह कहना मुश्किल है। ऐसा संभव नहीं है कि किसी कार्डियोलॉजिस्ट को कॉल जाए और वह छिंदवाड़ा की तरफ अपनी गाड़ी मोड़ कर खड़ा हो और कॉल आते ही छिंदवाड़ा के लिए निकल जाए। यह बड़ी व्यावहारिक बात है जबकि छिंदवाड़ा से किसी भी मरीज को नागपुर पहुंचने में केवल ढाई घंटे लगते हैं। तो फिर आखिर किस दम पर शहर के निजी अस्पताल दिल की बीमारियों का इलाज कर रहे हैं यह सवाल है हेल्थ डिपार्टमेंट से सीएमएचओ से और कलेक्टर से ?
Health industry… Episode -2 part -1…Avinash Singh
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