अवैध शराब के साथ पकड़ा गया था आरोपी, मारपीट का आरोप
तिगांव में आदिवासी और कांग्रेस का धरना, प्रदर्शन आंदोलन
छिंदवाड़ा । जिला जेल छिंदवाड़ा में एक विचाराधीन बंदी की मौत ने बवाल खड़ा कर दिया है। यह बंदी पांढुरना थाने से छिंदवाड़ा भेजा गया था। मृतक अवैध शराब के मामले में पकड़ा गया था लेकिन अचानक 16 जून को तबीयत बिगड़ने के बाद बंदी की मौत हो गई। इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। क्योंकि बंदी के शरीर पर पहले से ही चोटों के निशान थे जो 10 दिन पुराने बताए जा रहे हैं। इसके अलावा लगातार उसका उपचार भी किया जाता रहा और फिर अचानक बंदी की मौत हो गई। विचाराधीन बंदी की मौत के बाद उसके परिजनों और क्षेत्र वासियों ने मृतक का शव ले जाकर थाने में प्रदर्शन किया और उसके बाद तीगांव शराब दुकान के सामने धरना प्रदर्शन और तोड़फोड़ की। इस बात की शिकायत भी थाने में की गई है की भीड़ ने शराब दुकान में तोड़फोड़ करने के बाद लूटपाट भी की है। हालांकि पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया है। बंदी की मौत ने तूल पकड़ लिया है। सोमवार को जहां मृतक के परिजनों और क्षेत्रवासियों ने हंगामा मचाया वहीं मंगलवार को क्षेत्रीय विधायक निलेश उईके के साथ क्षेत्र के कई आदिवासी परिवार और ग्रामीण धरना प्रदर्शन करने लगे हैं।
कैसे हुई बंदी की मौत उठे गंभीर सवाल ?

जिला जेल छिंदवाड़ा में पांढुर्ना के विचाराधीन बंदी की मौत हार्ट अटैक से होने की बात की जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर बंदी के शरीर पर चोटों के निशान कैसे आए। वह लगातार बीमार था तो उसे अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं कराया गया। बंदी की मौत के बाद मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं। साथ ही कोतवाली पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम किया है।और जांच कर रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर 4 जून को ऐसा क्या हुआ की बंदी के साथ उसे पकड़ने के बाद मारपीट की गई। बंदी के परिजनों ने भी इस बात का आरोप लगाया है। कि उसे झूठे केस में फंसा कर उसके साथ मारपीट की गई है। उसके बाद जेल में डाल दिया गया। बंदी की मौत ने ऐसे कई सवालों को जन्म दे दिया है। जिसकी जांच की जा रही है और जांच के बाद मामले का पूरा खुलासा होने की संभावना है।
सामान्य नजर नहीं आती जेल में बंदी की मौत !
4 जून को पांढुर्णा पुलिस ने अवैध शराब के मामले में पकड़े गए एक आरोपी 48 वर्षी भाऊराव पिता भैया उईके को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया । जहां से उसे जेल रिमांड पर भेजा गया। विचाराधीन बंदी को जिला जेल छिंदवाड़ा शिफ्ट किया गया। हालांकि इस दौरान उसकी मेडिकल जांच भी कराई गई थी। लेकिन जिस तरह से महज 12 दिन बाद बंदी की जिला जेल में मौत हो गई। इस बात को लेकर संदेह गहरा गया है । इस घटना के समय 4 जून के बाद ही इस बात के आरोप लगे थे कि पुलिस और शराब ठेकेदार के लोगों ने आरोपी के साथ जमकर मारपीट की है । बाद में उसे प्रकरण बनाकर जेल भेज दिया है । यह मामला पहले से पांढुर्ना में पहले से चल रहा था। इसी दौरान बंदी की मौत हो गई जिससे बवाल और मच गया। जिस तरह के आरोप पहले से लगाए गए थे उसको देखकर या लगता है की बंदी की मौत सामान्य नहीं है। हालांकि मजिस्ट्रियल जांच के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकता है। लेकिन कई अनसुनी बातें भी है जो इस पूरे घटनाक्रम पर प्रकाश डाल सकती है।
मौत पर बवाल और सवाल…अविनाश सिंह
9406725725/7697930555









