Home अपना शहर जमीन का खेल, कीमत बढ़ाने बंद किया नाला

जमीन का खेल, कीमत बढ़ाने बंद किया नाला

रेन वाटर सीवरेज की लाइफ लाइन पर लगा दिया ताला

पारिवारिक प्रॉपर्टी विवाद के कारण उलझा करोड़ों का खेल

Episode – 1
छिंदवाड़ा।
छिंदवाड़ा नगर पालिका से नगर निगम 2014 में बना। उसके बाद से छिंदवाड़ा में जमीनों के खेल शुरू हुआ। प्राइवेट प्रॉपर्टी से शुरू हुए खेल अब सरकारी संपत्तियों तक पहुंच गया है। भू माफिया सरकारी संपत्ति पर नजर गड़ाए बैठे की कैसे इन्हें हड़प्पा जाए। हालांकि इसकी बिसात पहले ही बिछाई जा चुकी है।
2014 के बाद अचानक प्राइवेट प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ाने के लिए जो खेल खेले गए वह आज भी दिखाई दे रहे हैं । ऐसा ही एक मामला नगर निगम छिंदवाड़ा के अस्तित्व में आने के बाद नगर निगम के ही तात्कालिक रसूखदार नेताओं की शह पर शुरू किया गया था । लेकिन पारिवारिक प्रॉपर्टी विवाद के चलते करोड़ों की संपत्ति का यह खेल अब तक परवान नहीं चढ़ सका है।

यह मामला है शहर के एक मशहूर और जाने-माने डॉक्टर स्वर्गीय रामता प्रसाद वर्मा की संपत्ति का । स्वर्गीय डॉक्टर वर्मा उस जमाने के जाने-माने चिकित्सक थे और आसपास के कई जिलों में उनकी ख्याति थी। उनका एक बंगला बस स्टैंड – खजरी रोड पर ठीक इंडियन कॉफी हाउस के सामने स्थित है। 2014 में जब नगर निगम अस्तित्व में आया तो स्वर्गीय डॉक्टर रामता प्रसाद वर्मा के परिवार के एक सदस्य से शहर के कुछ रसूखदारों ने उनकी संपत्ति का कुछ हिस्सा खरीदा । खरीदा गया यह हिस्सा बंगले के बाजू मैं बने नाले की तरफ था । क्योंकि प्रॉपर्टी का फ्रंट पहले ही बेचा जा चुका है। अब पीछे की पूरी प्रॉपर्टी और बांग्ला बाकी है। और यह बहुत बड़ी प्रॉपर्टी है जो की बस स्टैंड – खजरी मुख्य सड़क से लगकर पीछे मोहन नगर तक गई हुई है। लेकिन इसका फ्रंट बेचा जा चुका है । शहर के चार पांच रसूखदारों ने डॉक्टर रामता प्रसाद वर्मा के एक उत्तराधिकारी से इस प्रॉपर्टी का कुछ हिस्सा खरीदा । फिर उस हिस्से को करोड़ों की संपत्ति बनाने के लिए बंगले के ठीक बाजू में बहने वाले लगभग 8 फीट के नाले को बंद करने का काम शुरू हुआ। इसमें तात्कालिक नगर निगम के बड़े नेता के साथ ही नगर निगम के अधिकारियों का बड़ा खेल था। आज स्थिति यह है कि उस नल को लगभग बंद कर दिया गया है। जिसमें एक चौथाई शहर का पानी बाहर जाता है । 8 फीट का नाला महज ढाई फीट का होकर रह गया है। उसे पर भी मलबा भरा हुआ है। यह एक अपराध है यह पुराना मामला है लेकिन आज इस पर गौर करना जरूरी है।

पारिवारिक प्रॉपर्टी विवाद के कारण अटका मामला

लगभग 7-8 साल पहले खरीदी गई डॉक्टर वर्मा की इस संपत्ति का सौदा हो गया। रुपयों का लेनदेन भी हो गया लेकिन जब संपत्ति बेची गई तो पता चला कि स्वर्गीय डॉक्टर रामता प्रसाद वर्मा कि इस बेस कीमती संपत्ति का बंटवारा उनके उत्तराधिकारियों में हुआ ही नहीं है। अब तक यह तय नहीं है कि किस उत्तराधिकारी को कौन सा हिस्सा मिलने वाला है । यहीं पर यह मामला उलझ गया और संपत्ति के दूसरे उत्तराधिकारी इस मामले में कोर्ट की शरण में चले गए । तब से मामला लगभग लंबित है और कोर्ट में चल रहा है । यही कारण है कि जिन रसूखदारों ने एक उत्तराधिकारी से संपत्ति खरीदी उसका उपयोग वे आज तक नहीं कर पाए। लेकिन इस संपत्ति को करोड़ों रुपए की बनाने के लिए बाजू के नाले को पूरी तरह से पर दिया गया और वहां एक 20 फीट चौड़ी सड़क बना दी गई । जो सड़क सीधे आखिरी तक जाती है। लेकिन इससे नुकसान सबसे ज्यादा हुआ शहर वासियों का क्योंकि नाला बंद होने के कारण शहर में कई जगह बारिश के दौरान जल भराव की स्थिति बनने लगी है।

सीवरेज प्लान में नहीं है रेन वाटर की निकासी

शहर में पिछले सात आठ सालों से सीवरेज लाइन बिछाने का काम चल रहा है। शहर की बड़ी चर्चित कंपनी लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन इसका काम कर रही है जो आज तक इसको पूरा नहीं कर पाई और कई जगह आज भी अधूरी पाइपलाइन डाली गई है। यह मामला अलग है लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि शहर के सीवरेज प्लान में जो पाइपलाइन पूरे शहर में बिछाई जा रही है। उसमें रेन वाटर सीवरेज की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। रेन वाटर सीवरेज की निकासी शहर के इन्हीं नालों से होगी जो पहले से अस्तित्व में हैं। और यही नाले रेन वाटर सीवरेज के लिए शहर की लाइफ लाइन है। इन नालों को एक के बाद एक बंद कर दिया जाएगा तो शहर में कई जगह जल भराव होने लगेगा। जिससे हालत बदतर होंगे और शहर वासियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ेगा । जिस नाले को रसूखदारों ने बंद किया है उसे नाले के बंद होने के कारण वहां के दोनों तरफ के कॉम्प्लेक्स और शहर के कई हिस्सों में पानी भरने लगा है । यह स्थिति तब से जारी है जब से की नाल बंद किया गया।

गंभीर मुद्दा… Avinash Singh
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