सबसे विश्वासपात्र रहे दीपक सक्सेना बदल सकते हैं पाला
भाजपा नेताओं के संपर्क में पूर्व कैबिनेट मंत्री
छिंदवाड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से बातचीत के बाद भी उनके सबसे विश्वास पात्र माने जाने वाले दीपक सक्सेना नामांकन रैली में शामिल नहीं हुए यहां तक कि वह नकुलनाथ का नामांकन दाखिल करने के लिए कलेक्ट्रेट तक नहीं पहुंचे। हालांकि नकुलनाथ के द्वारा भरे गए एक फार्म के प्रस्तावक दीपक सक्सेना है। सूत्रों की मानें तो आज कमलनाथ को बड़ा झटका लग सकता है। सूचनाएं मिल रही हैं की पूर्व कैबिनेट मंत्री दीपक सक्सेना भाजपा के आला नेताओं के संपर्क में है और संभावना है कि बुधवार को मुख्यमंत्री के छिंदवाड़ा आगमन के दौरान दीपक सक्सेना भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं।
पूर्व कैबिनेट मंत्री दीपक सक्सेना के छोटे बेटे अजय सक्सेना चुनमुन ने भोपाल में भाजपा का दामन थाम लिया। चुनमुन के भाजपा में जाने के बाद दीपक सक्सेना ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन संभावना थी की कमलनाथ के सबसे विश्वासपात्र रहे दीपक सक्सेना भाजपा में नहीं जाएंगे और वह कमलनाथ का साथ हमेशा देंगे। इस्तीफा देने के बाद दीपक सक्सेना ने भी कुछ ऐसा ही कहा था। लेकिन नकुलनाथ की नामांकन रैली में शामिल नहीं होने के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि अब दीपक सबसेना भी भाजपा का दामन थाम सकते हैं। ऐसी संभावना है कि आज मुख्यमंत्री के समक्ष दीपक सक्सेना भी भाजपा की सदस्यता ले लेंगे। हालांकि अब तक उन्होंने इनकार ही किया है लेकिन जिस तरह की संभावना दिखाई दे रही है उससे लगता है कि कमलनाथ को अब तक का सबसे बड़ा झटका इस दल बादल में लगेगा।
1970 में पहली बार बने पंचायत के पंच
पूर्व कैबिनेट मंत्री दीपक सक्सेना वरिष्ठ और कद्दावर नेता है। 1970 में पहली बार में ग्राम पंचायत के पंच चुने गए थे। छात्र राजनीति से ही राजनीति करने वाले दीपक सक्सेना लगातार राजनीति में सक्रिय रहे 1979 में जब कमलनाथ छिंदवाड़ा आए तो दीपक सक्सेना इस समय से कमलनाथ के साथ अब तक रहे हैं। कमलनाथ ने ही दीपक सक्सेना को सहकारी बैंक अध्यक्ष बनने के लिए प्रमोट किया। इसके पहले कोयलालांचल क्षेत्र का जाना माना नाम लाला सुंदरलाल जायसवाल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष हुआ करते थे। लेकिन कमलनाथ के संपर्क में आने के बाद दीपक सक्सेना की राजनीति में निखार आ गया और वह न सिर्फ कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रहे बल्कि चार बार छिंदवाड़ा विधानसभा सीट से विधायक और दो बार केबिनेट मंत्री भी रहे।
पिछले पांच सालों की अनदेखी ने किया नाथ परिवार से दूर
2018 में जब कमलनाथ मुख्यमंत्री बने तब दीपक सक्सेना ने कमलनाथ के लिए अपनी सीट छोड़ी। 15 महीने की सरकार में दीपक की नाराजगी उजागर हुई। और पिछले 5 सालों में दीपक सक्सेना अनदेखी का शिकार होते रहे। यही कारण है कि उनके परिवार में छोटे बेटे चुनमुन ने भाजपा का दामन थाम लिया। अब दीपक सक्सेना भी अपने बेटे की राह चलते दिखाई दे रहे है। हालांकि दीपक सक्सेना के बड़े बेटे रोहन से सरपंच जय सक्सेना ने साफ कहा है कि वह कमलनाथ और नकुलनाथ के साथ ही रहेंगे।









