सहकारी बैंक अध्यक्ष, फिर विधायक, दो बार कैबिनेट मंत्री सब कांग्रेस में
2018 में प्रोटेम स्पीकर और मुख्यमंत्री के लिए कुर्सी छोड़ने वाले विधायक
छिंदवाड़ा । मेरी एक पोस्ट से बवाल मचा। जिसमें मैंने यह दिखाने का प्रयास किया था कि दीपक सक्सेना के लिए किस तरह से उनके बेटे ने मुख्यमंत्री के साथ डिनर टेबल पर बैठने के लिए कुर्सी रोकी। इस पोस्ट पर जिला भाजपा अध्यक्ष ने मुझे नोटिस दिया और माफी मांगने की मांग की। लेकिन क्या वास्तव में दीपक सक्सेना का कद इतना छोटा हो गया है कि अब यदि उनके लिए कुर्सी रोककर ना रखी जाए तो कोई ना कोई उस कुर्सी पर बैठ जाएगा । जबकि दीपक सक्सेना जितने सीनियर नेता है उतनी सीनियरिटी वर्तमान में ना जिले के सांसद की है, और ना ही जिला भाजपा अध्यक्ष की । फिर भी दीपक सक्सेना को संघर्ष करना पड़ रहा है ।
दीपक सक्सेना और भाजपा की राजनीति 👇
एक दौर था जब कांग्रेस में अकेले दीपक सक्सेना ऐसे नेता थे जिनका नाम कमलनाथ के बाद दूसरे नंबर पर लिया जाता था। और जब कमलनाथ की अनुपस्थित होते थे तो दीपक सक्सेना ही कमलनाथ की भूमिका में दिखाई देते थे। हालांकि नकुलनाथ के सांसद बनने के बाद दीपक सक्सेना के प्रभाव में कुछ कमी आई थी। लेकिन फिर भी वे इतने प्रभाव हीन नहीं हुए थे की उनके लिए कुर्सी निर्धारित ना रहे। तब भी दीपक सक्सेना की जगह तय थी और उनकी जगह कोई और नहीं ले सकता था।
यही कारण था कि 2018 में जब कमलनाथ मुख्यमंत्री बने तो विधानसभा चुनाव में ही विश्वनाथ ओके और उनके समर्थकों के भारी विरोध के बाद भी दीपक सक्सेना को ही छिंदवाड़ा विधानसभा के लिए कमलनाथ ने चुनाव । कई अटकलों के बाद दीपक सक्सेना को ही इस बात के लिए भी चुना गया की मुख्यमंत्री के लिए अपनी सीट छोड़ने वाले नेता बन सके। लेकिन आज भाजपा में दीपक सक्सेना के लिए कुर्सी रोकना पड़ रही है । इसी बात का विश्लेषण इस वीडियो में है जिसे आप पूरा सुने और अपनी प्रतिक्रिया जरुर दें की क्या यह एक राजनैतिक विश्लेषण है या किसी विद्वेष के कारण डाली गई पोस्ट।
राजनैतिक विश्लेषण भाजपा…Avinash Singh
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