सरकारी अधिकारी ही नहीं कर रहे परिवहन नियमों का पालन
ज्यादातर सरकारी वाहन प्राइवेट उपयोग के, फिर भी किराए पर
छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले में सरकारी तंत्र की मनमानी की जितनी तारीफ की जाए कम ही है। यहां अधिकारियों को नियम कानून और कायदों से कोई फर्क नहीं पड़ता। ना सरकार का डर है, और ना ही नियम कायदों की पूछ। इस बात को साबित करने के लिए सरकारी तंत्र में कई ऐसे मामले मिल जाएंगे जो सरकारी तंत्र की कारगुजारी की तरफ साफ-साफ इशारा करते नजर आएंगे। अब सरकारी महकमों में किराए पर चलाए जाने वाले वाहनों को ही देख लीजिए। यहां सरकारी तंत्र इतना लापरवाह है की खुद अपर कलेक्टर किराए पर लगाए गए सरकारी वाहन में फर्जी नंबर प्लेट लगाकर जिले भर में घूम रहे हैं।
इस बात से ना ही परिवहन विभाग को कोई फर्क पड़ता है और ना ही पुलिस को। परिवहन विभाग जिले भर में लोगों पर कार्रवाई कर रहा है।दूसरी तरफ सरकारी महकमों में कहीं फर्जी नंबर प्लेट लगाकर बड़े अधिकारी घूम रहे हैं, तो कहीं प्राइवेट उपयोग के वाहनों को किराए पर लगाकर बाकायदा किराया दिया जा रहा है। यह हाल है छिंदवाड़ा के जहां अंधेर नगरी चौपट राजा जैसे हालात पूरे जिले में ही बनने लगे हैं। दरअसल अपर कलेक्टर का वाहन विभाग ने किराए पर लगाया है इस वहां का नंबर MP 28 BD 4325 है। आरटीओ में या वहां व्यक्तिगत उपयोग के लिए पंजीकृत है 2022 में रजिस्ट्रेशन हुआ है।
परिवहन नियमों के अनुसार इस वहां का कमर्शियल उपयोग नहीं किया जा सकता यानी की पहली बात तो यह है कि व्यक्तिगत उपयोग के लिए पंजीकृत वहां को वहां का स्वामी खुद अपने उपयोग के लिए या अपने परिवार के उपयोग के लिए उपयोग कर सकता है लेकिन उसे किराए पर नहीं चढ़ा सकता फिर भी यह वहां किराए पर चल रहा है। बात यहीं आकर खत्म नहीं हो जाती इससे भी बड़ा गोलमाल टू इस वाहन के नंबर प्लेट में व्यक्तिगत उपयोग का या वहां जिसकी नंबर प्लेट सफेद कलर की होनी चाहिए वह पीले कलर की पट्टी पर बनी हुई नंबर प्लेट है मतलब व्यक्तिगत उपयोग के वाहन को कमर्शियल दिखाया जा रहा है यानी कि नंबर प्लेट में सीधा-सीधा फर्जी वाला है और अपर कलेक्टर पूरे जिले में सिवान से घूम रहे हैं।
सरकारी महकमे ही नहीं कर रहे आरटीओ नियमों का पालन
जिले के ज्यादातर सरकारी विभागों में वाहन किराए पर लगाए गए हैं। अधिकारियों के लिए यही वाहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लेकिन वाहनों को किराए पर लगाने के लिए आरटीओ के कुछ नियम है। जिसके तहत इन वाहनों को अधिकारियों या सरकारी महकमे के उपयोग के लिए किराए पर लिया जा सकता है। इसके लिए बाकायदा टेंडर जारी होता है और लगभग हर बार टेंडर एक ही फर्म को चला जाता है। परिवहन विभाग व्यक्तिगत उपयोग के वाहनों और कमर्शियल उपयोग के वाहनों के लिए अलग-अलग रजिस्ट्रेशन करता है। व्यक्तिगत उपयोग के वाहनों के नंबर अलग होते हैं और उनमें सफेद कलर की नंबर प्लेट लगाई जाती है।

जबकि कमर्शियल उपयोग के वाहनों में पीले कलर की नंबर प्लेट लगाई जाती है। ताकि यह पता चल सके की कौन सा वाहन व्यक्तिगत उपयोग का है और कौन सा वाहन व्यावसायिक उपयोग कर रहा है। अपर कलेक्टर के नंबर प्लेट में यही फर्जी वाड़ा किया गया है। प्राइवेट रजिस्ट्रेशन के नंबर प्लेट को पीला करके व्यावसायिक उपयोग का दिखाया गया है। जबकि ज्यादातर विभागों में व्यक्तिगत उपयोग के वाहनों को किराए पर लगाया गया है। जो की आरटीओ के नियम के तहत गलत है। सरकारी महकमे में किराए पर लगने वाले वाहन का आरटीओ रजिस्ट्रेशन व्यावसायिक उपयोग का होना चाहिए न कि व्यक्तिगत उपयोग का।
दो साल से ज्यादा पुराने वाहन नहीं ले सकते किराए पर
जिला प्रशासन और अलग-अलग विभाग वाहनों को किराए पर लेने के लिए हर साल टेंडर निकलते हैं। और इस टेंडर में साफ-साफ लिखा होता है कि 2 साल से ज्यादा पुराने वाहन, सरकारी कार्यालय में अधिकारी या विभागों के उपयोग के लिए किराए पर नहीं लिए जाएंगे। लेकिन उसके बाद भी छिंदवाड़ा जिले में 90% किराए पर लगाए गए वाहन सालों पुराने हैं। कई वाहन तो 10 साल से भी ज्यादा पुराने हैं जो सरकारी कार्यालय में किराए पर चल रहे हैं। खुद अपर कलेक्टर जिस गाड़ी से चल रहे हैं। वह भी 5 साल पुराना वाहन है। सरकारी अधिकारी खुद नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। और जिले भर में कानून कायदे का पाठ पढ़ा रहे हैं। यहां वाहनों को किराए पर लेने के लिए आरटीओ के नियमों की कोई जरूरत नहीं है। यहां तक की आरटीओ प्राइवेट वाहनों पर कार्रवाई करते नजर आते हैं, लेकिन इन सरकारी महकमे में चल रहे प्राइवेट वाहनों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि साफ-साफ प्राइवेट उपयोग का वाहन रुपए कमाने के लिए उपयोग किया जा रहा है।
अंधेर नगरी चौपट राजा… Avinaash Siingh
9406725725
7697930555







