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12 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को पीने का पानी तक नहीं दे पा रहा पीजी कॉलेज !

गर्मियां बिना पानी के बीतीं, स्टाफ के लिए बाहर से आया पानी

हर विभाग की छत पर रखी हैं सूखी टंकियां, एक बोर वो भी बंद

छिंदवाड़ा। 2 दिन पहले पीजी कॉलेज में छात्र संघ चुनाव का रंग दिखाई दिया और छात्रों के दोनों महत्वपूर्ण संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एनएसयूआई आपस में भिड़ गए। पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी तब जाकर मामला शांत हुआ। इस दौरान भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों ने प्रिंसिपल के सामने ही अभद्र भाषाओं का प्रयोग किया। जिससे एडिशनल एसपी भड़क गए । इस घटना के बाद पीजी कॉलेज की तरफ ध्यान गया तो पता चला कि यहां विद्यार्थियों की संख्या लगभग 12000 या उससे भी ज्यादा है । शायद जिले के किसी भी कॉलेज में विद्यार्थियों की इतनी संख्या नहीं है। हजारों की संख्या में विद्यार्थी होने के बाद भी पीजी कॉलेज प्रबंधन इन विद्यार्थियों को पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं कर पा रहा है। यह बात भी पीजी कॉलेज में चल रहे हंगामे के बीच सामने आई।

कॉलेज में भिड़े nsui एबीवीपी 👇

पीजी कॉलेज में 12000 से ज्यादा विद्यार्थी है और पूरा साल कॉलेज में विद्यार्थी रहते हैं। साल में चार बार परीक्षाएं होती हैं उसके बाद भी पीजी कॉलेज में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां एकमात्र बोर है जो कभी भी बंद हो जाता है । इस बार गर्मियों में पीजी कॉलेज के विद्यार्थी पानी पानी के लिए तरस गए। लेकिन पीजी कॉलेज के प्रबंधन टैंकर तक बुलाने की जहमत नहीं उठाई। स्टाफ के लिए बाहर से पानी के कंटेनर बुलाए गए। लेकिन कॉलेज में पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। यह बात सुनने में सामान्य लग रही है। लेकिन जब 12 000 लोगों के एक जगह होने की परिकल्पना की जाए। तो आपको पता चलेगा कि इनके लिए पीने का पानी कितना आवश्यक है और एक संस्थान जो हजारों कर लाखों रुपए वसूल रहा है वह पीने का पानी का उपलब्ध नहीं कर पा रहा।

हर साल 80 लाख से ज्यादा कमाई फिर भी विद्यार्थी प्यासे

पीजी कॉलेज में लगभग 12000 विद्यार्थियों की स्ट्रेंथ हर साल रहती है। और प्रत्येक विद्यार्थी कॉलेज के रखरखाव और व्यवस्थाओं के लिए 700 रुपए देता है। इनमें से लगभग आधे रुपए स्पोर्ट्स के लिए होते हैं। और आधे कॉलेज की व्यवस्थाओं के लिए। इस हिसाब से 12000 विद्यार्थियों से कॉलेज हर साल 80 लाख से ज्यादा की कमाई करता है। जिसमें से महज 10 – 20 लाख रुपए ही स्पोर्ट्स पर खर्च होते होंगे। बाकी के रुपए कॉलेज के अकाउंट में जमा है। करोड़ों रुपए कॉलेज के पास है। उसके बाद भी पीजी कॉलेज का प्रबंधन विद्यार्थियों को साफ पीने का पानी तक नहीं दे पा रहा है। जबकि जन भागीदारी समिति के अध्यक्ष भारत गई के लिए एक कमरा निर्धारित किया कर दिया गया। इसी कमरे से छात्र संघ चुनाव की रणनीति तैयार हो रही है। इसी बात का विरोध एनएसयूआई ने किया तो हंगामा हो गया । यह सब हो रहा है लेकिन विद्यार्थियों को पानी नहीं मिल रहा जिसकी तरफ ना नेताओं का ध्यान है और ना ही कॉलेज प्रबंधन का।

टंकी तोड़ दी अब नई बनाने की तैयारी, पानी कहां से भरेंगे नहीं सोचा

पीजी कॉलेज में पानी की एक पुरानी टंकी थी जिसे तोड़ दिया गया है। अब पीजी कॉलेज प्रबंधन नई टंकी बनाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि अब नई टंकी की कोई आवश्यकता यहां पर है नहीं। क्योंकि उससे कम खर्चे में पीजी कॉलेज पानी की बड़ी-बड़ी टंकियां रखवा सकता है। लेकिन अकाउंट में जमा रुपयों की बंदर बांट कैसे की जाए इसका पूरा इंतजाम पीजी कॉलेज प्रबंधन ने कर लिया है। एक बार मान भी लिया जाए की नई टंकी की आवश्यकता पीजी कॉलेज को है। लेकिन इस टंकी में पानी कहां से भरा जाएगा इस बात की कोई तैयारी पीजी कॉलेज ने आज तक नहीं की है। पीजी कॉलेज प्रबंधन टंकी बनाने की तैयारी तो कर रहा है । लेकिन पीजी कॉलेज में बोर करने के लिए आज तक किसी की तरफ कोई ध्यान नहीं गया। जबकि पीजी कॉलेज में टंकी से ज्यादा जरूरी पानी के बोर कराना है। ताकि विद्यार्थियों को साफ पानी पीने को मिल सके । इसके अलावा हर विभाग के ऊपर जो पानी की टंकी रखी है उन टंकियां में पानी भरा जा सके। लेकिन पीजी कॉलेज प्रबंधन टंकी का निर्माण करवा कर भ्रष्टाचार की एक नई इबारत लिखने की तैयारी में है।

रिटायर हो रहे प्रिंसिपल, प्रोफेसर लगाने लगे भोपाल की दौड़

पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल का रिटायरमेंट करीब आ गया है। आने वाले एक महीने में प्रिंसिपल रिटायर हो जाएंगे। लेकिन उन्होंने रिटायरमेंट से तीन-चार महीने पहले ही काम करना बंद कर दिया है। ज्यादातर समय प्रिंसिपल छुट्टियों में रहते हैं । उनकी जगह एक प्रभारी प्रिंसिपल बैठा दिया जाता है । कई बार तो यह तक पता नहीं होता कि इस बार का प्रभारी प्रिंसिपल कौन है। लेकिन सवाल यह उठता है की रिटायरमेंट के पहले प्रिंसिपल का ध्यान पीजी कॉलेज पर क्यों नहीं है। जबकि वेतन तो हर महीने लिया जा रहा होगा। ठीक है रिटायरमेंट करीब आ गया लेकिन आखिरी दिन तक काम करना प्रिंसिपल की जिम्मेदारी है। जिसे वे निभा नहीं पा रहे है। इसी प्रिंसिपल के कार्यकाल में बच्चे प्यास से तड़पते रहे लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं की गई। इतना ही नहीं पीजी कॉलेज की अंदरूनी राजनीति भी अब हावी दिखाई देने लगी है। प्रिंसिपल के रिटायर होने की सूचना मिलते ही पीजी कॉलेज के चार से पांच प्रोफेसर भोपाल की दौड़ लगाने लगे। ताकि उन्हें प्रिंसिपल बनने का मौका मिल जाए । लेकिन कॉलेज में बच्चों को साफ पानी पिलाया जा सके इस तरफ किसी प्रोफेसर का भी ध्यान नहीं।

कॉलेज और राजनीति… Avinaash Siingh
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