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शुक्ला ग्राउंड स्टोरी पार्ट 5 : चार भूमि स्वामियों ने 56 हजार लेकर की रजिस्ट्री !

जमीन बेचने वाले भी सभी जैन समाज के प्रबुद्ध जन

मामला संत सन्मति सागर जी और समाज की जमीन का

छिंदवाड़ा। शुक्ला ग्राउंड और सन्मति शिक्षण संस्थान की जमीन यह मुद्दा अभी शहर में छाया हुआ है । सबसे बड़ी बात यह है कि एक जैन संत सन्मत सागर जी महाराज का आगमन और उनके अभियान का हिस्सा बनने की छिंदवाड़ा के जैन समाज की कोशिश नाकाम हो गई। इसका कारण यह है कि सन्मत सागर जी महाराज की आज्ञा से जिस जमीन को खरीदा गया वह जमीन आज गायब है। और इसी मुद्दे पर शुक्ला ग्राउंड स्टोरी का पांचवा पार्ट आज हम जारी कर रहे हैं। तो मामला यह है कि 1989 में सन्मत शिक्षण संस्थान के नाम से एक जमीन खरीदी गई। यह जमीन लगभग . 283 हेक्टेयर जमीन थी। जिसका रकबा लगभग 30 हजार वर्ग फुट से ज्यादा था। यह जमीन बाकायदा सम्मत शिक्षण संस्थान के नाम से रजिस्ट्री की गई ।

जमीन जिसके नाम पर थी वह सभी लोग जैन समाज से ही संबंधित थे और जब जमीन की तलाश चल रही थी उसी समय इन लोगों ने अपनी जमीन बेचने की इच्छा जताई थी। जिसके चलते बाकायदा चंदा करके 56000 रुपए जमा किए गए और यह 56000 देकर आज से लगभग 35 साल पहले शुक्ला ग्राउंड की जमीन में से 30000 वर्ग फुट जमीन सन्मत शिक्षण संस्थान के नाम से खरीदी गई। यह निर्विवादित सत्य है क्योंकि इसके सारे दस्तावेज, रजिस्ट्री सब कुछ मौजूद है। यहां तक की राजस्व दस्तावेजों में भी जमीन की रजिस्ट्री के बाद सन्मत शिक्षण संस्थान का नाम दर्ज हो गया था जो 2025 तक लगातार दर्ज था।

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चार भूमि स्वामियों ने की थी रजिस्ट्री

सन्मत शिक्षण संस्थान के नाम जो भूमि खरीदी गई वह भूमि भी जैन समाज के लोगों की ही थी। और इसके भूमि स्वामी भी जैन समाज के ही थे। इनमें श्री मनी जैन पिता प्रदुमन कुमार जैन, ललित कुमार पाटनी पिता धनपाल जी पाटनी, महेंद्र कुमार पाटनी पिता घीसुलाल जी पाटनी और नवीनचंद्र पिता केवलचन्द जी दुग्गल शामिल हैं। जिन्होंने अपनी जमीन का सौदा सन्मत शिक्षण संस्थान से किया और संस्थान के नाम से 56000 लेकर जमीन की रजिस्ट्री कर दी।

बिहाइंड द सीन स्टोरी… Avinaash Siingh
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