मैनेजमेंट फेल, नए सत्र में स्कूल छोड़ गए कई टीचर
हॉस्टल में आत्महत्या, स्पोर्ट्स टीचर ने किया बेड टच
छिंदवाड़ा। दिल्ली पब्लिक स्कूल का नाम आते ही हर कोई चाहता है, कि उनका बच्चा डीपीएस में पढ़े। और उसे एक बेहतर शिक्षा के साथ-साथ प्रारंभिक शारीरिक एजुकेशन और उच्चतम वातावरण के साथ संस्कार भी मिले। डीपीएस ने अपनी पहचान ऐसे ही बनाई है। लेकिन छिंदवाड़ा का दिल्ली पब्लिक स्कूल ऊंचे मकान फीके पकवान जैसा हो गया है। यहां संस्कार तो बहुत दूर की बात है स्कूल अनुभवी शिक्षक तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। महंगी फीस के कारण ज्यादातर अमीरों के बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं। लेकिन उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जिस सोच के साथ परिजनों ने अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए डीपीएस स्कूल में डाला।
आज वही डीपीएस स्कूल अनुभवी शिक्षकों और अनुभवी ट्यूटर तक बच्चों को उपलब्ध नहीं कर पा रहा है। पिछला पूरा सत्र स्कूल चर्चाओं में रहा कई मामले स्कूल के सामने आए लेकिन सभी दबा दिए गए। आज हाल यह हैं की नए सत्र में अप्रैल में स्कूल खुलने के बाद से लेकर अब तक कई अनुभवी शिक्षकों ने स्कूल छोड़ दिया है। और स्कूल मैनेजमेंट अपनी कमियों को छुपाने के लिए ऐसे लोगों को स्कूल में बच्चों की शिक्षा और देख रेख के लिए भर्ती कर रहा है। जिनके पास अनुभव की कमी है। यहां तक की डीपीएस के संस्कारों की भी कमी है। हॉस्टल से लेकर स्कूल तक बच्चों के साथ की जाने वाली बदतमीजी और एब्यूज बातें आम बात हो गई है। जिसकी चर्चा अभिभावकों में भी होती है। क्योंकि बच्चे अक्सर स्कूल में होने वाली गतिविधियों को अपने परिजनों को जाकर या अपनी मां को जाकर बताते हैं।
हॉस्टल में आधी रात लाइव आत्महत्या, छात्रा से बेड टच
दिल्ली पब्लिक स्कूल छिंदवाड़ा का मैनेजमेंट केवल बच्चों के भविष्य से ही खिलवाड़ नहीं कर रहा। बल्कि पिछला पूरा सत्र डीपीएस स्कूल चर्चा में रहा इसमें कई मुख्य घटनाएं घटित हुई। जिसे दबाने का प्रयास किया गया । पिछले सत्र में एक हॉस्टल वार्डन ने अपने कमरे में सुसाइड कर कर लिया। और यह आत्महत्या उसने उस लड़की को लाइव वीडियो दिखाकर की जिसके कारण वह आत्महत्या कर रहा था। बड़ी बात यह है कि हॉस्टल का वार्डन तो स्कूल से जुड़ा हुआ था ही जिस लड़की के लिए यह कांड किया गया वह लड़की भी स्कूल से जुड़ी हुई थी। इतना ही नहीं पिछले सत्र में एक स्पोर्ट्स टीचर के खिलाफ स्कूल में बच्ची से बेड टच का मामला भी सामने आया। अभिभावकों ने इस मामले में मोहखेड़ थाना पहुंचकर शिकायत की लेकिन उसके बाद भी उस स्पोर्ट्स टीचर को कई महीनो बाद स्कूल से निकल गया । इससे भी बड़ी बात यह है की प्रिंसिपल की मनमानी इतनी ज्यादा इस स्कूल में चल रही है, कि जिस स्पोर्ट्स टीचर पर बेड टच के आरोप लगे थे और थाने में शिकायत की गई थी । इस सत्र के समर कैंप में इस टीचर को समर कैंप के लिए बुलाया गया। लेकिन जब अभिभावको ने इस बात का विरोध जताया तो उसे दूसरे तीसरे दिन ही बाहर कर दिया गया ।
DPS का मैनेजमेंट गायब, व्यक्तिगत मर्जी से संचालन
दिल्ली पब्लिक स्कूल का अपना एक मैनेजमेंट सिस्टम है। यही कारण है कि दिल्ली पब्लिक स्कूल ने अपना नाम आज भी बेहतर स्कूलों में शुमार कर रखा है। लेकिन छिंदवाड़ा का डीपीएस स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल के वास्तविक मैनेजमेंट से कोसों दूर है। यहां एक व्यक्ति विशेष की मर्जी से स्कूल चलाया जा रहा है । स्कूल के संचालकों का स्कूल पर ध्यान ही नहीं है। जबकि प्रिंसिपल इस स्कूल में सर्वे सर्वा है और उन्हीं की मर्जी से स्कूल का संचालन हो रहा है। प्रिंसिपल को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि अनुभवी शिक्षक स्कूल छोड़कर जा रहे हैं। बल्कि उनके विकल्प के रूप में प्रिंसिपल दूसरे ही दिन एक कम्यूनिटी विशेष के लोगों को स्कूल में भर्ती कर लेता है। जिसके चलते स्कूल का माहौल और ज्यादा खराब होता जा रहा है। स्कूल में ऐसे लोगों की भर्ती की गई है जो बच्चों से इंग्लिश में बात करना तो दूर उनसे बदतमीजी तक कर लेते हैं। जो वास्तविक डीपीएस के संस्कार के खिलाफ है। लेकिन अभिभावक चुप रहते हैं, क्योंकि वही स्कूल सिस्टम जो पूरे देश में चल रहा है। कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ ना हो। लेकिन हकीकत यह है की डीपीएस के संस्कार छिंदवाड़ा में बच्चों को दिए ही नहीं जा रहे। उन्हें एक आम स्कूल की तरह ही ट्रीट किया जा रहा है।
हॉर्स राइडिंग में घोड़े की सवारी, स्विमिंग में टीचर नहीं
दिल्ली पब्लिक स्कूल एडमिशन के समय बच्चों के अभिभावकों को शिक्षा के साथ-साथ कई सुविधाओं के बारे में भी बताता है। जिसमें खास तौर से सभी खेलों के स्पोर्ट्स टीचर, हॉर्स राइडिंग, स्विमिंग और फिजिकल एक्टिविटी जैसी महत्वपूर्ण बातें शामिल है। अभिभावक इन सुविधाओं के कारण ही अपने बच्चों को महंगी फीस देकर डीपीएस में पढ़ने के लिए भेजते हैं। लेकिन हकीकत कुछ और है। हकीकत यह है की दिल्ली पब्लिक स्कूल के घोड़ों को घास डालने वाले बच्चों को हॉर्स राइडिंग सिखाते हैं। या यूं कहा जाए कि हॉर्स राइडिंग के नाम पर केवल घोड़े की पारी कराई जाती है। ना कि हॉर्स राइडिंग सिखाई जाती है। इससे भी बड़ी बात यह है कि जिस टीचर को स्विमिंग सीखने के लिए रखा गया है। उस टीचर को खुद स्विमिंग नहीं आती और वह बच्चों को पानी में उतरने के लिए छोड़ देती है। फिजिकल एक्टिविटी के नाम पर हर खेल का टीचर डीपीएस में होना चाहिए। लेकिन यहां तो नौसिखियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। और वास्तविक फिजिकल एजुकेशन वालों को भगाया जा रहा है।
Episode 2 – हॉस्टल में कुपोषण, कैफेटेरिया में जंक फूड।
Episode 3 – फार्म हाउस में आए दिन पार्टियां और शोर शराबा।
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