शराब ठेकेदारों ने कारोबार चलाने सैकड़ों को बाहर से बुलाया
पुलिस – पब्लिक दोनों बेखबर, उनके आसपास शातिर अपराधी
छिंदवाड़ा। जिले की एक शराब दुकान में काम करने वाला हरभजन निकाला साबिर अली। यह कोई नेशनल मीडिया न्यूज़ नहीं है। बल्कि यह खबर छिंदवाड़ा की एक शराब दुकान से गायब हुए लाखों रुपयों के बाद पुलिस की जांच में सामने आई है। हालांकि इस खबर पर बड़ी सामान्य प्रतिक्रिया हुई है। पुलिस ने भी अपनी पीठ थपथपाई लेकिन कहीं ना कहीं यह मामला छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले की सुरक्षा, लोगों की जान और संपत्ति पर खतरे की ओर इशारा कर रहा है। दरअसल छिंदवाड़ा जिले के शराब ठेकेदारों ने शराब दुकानों का संचालन और शराब कारोबार को फैलाने का काम करने के लिए यूपी,बिहार, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ जैसे राज्यों से लोगों को बुलवाया है। शराब ठेकेदार इन लोगों को पर्सनली नहीं जानते फिर भी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली शराब दुकानों और उसके सराउंडिंग कारोबार के लिए दूसरे राज्यों से लोगों को बुलवाया गया है। यह लोग छिंदवाड़ा शहर सहित छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले की शराब दुकानों में काम कर रहे हैं।
इनका कार्य क्षेत्र अकेले शराब दुकान की खुदरा बिक्री नहीं है। बल्कि शराब दुकान की सीमा क्षेत्र के ग्रामीण इलाके भी है। बड़ी बात यह है की लगभग ढाई सौ से 500 बाहरी लोग छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले में काम कर रहे हैं जिनमें से ज्यादातर अपराधी किस्म के हैं। लेकिन किसी का भी पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया गया। कौन हरभजन है या हरभजन के नाम पर रह रहा कोई अपराधी। खुलेआम पुलिस और आबकारी विभाग का वरदहस्त लेकर घूम रहा है। यह बड़ी वारदात की तरफ इशारा कर रहा है। क्योंकि जितने बाहरी अपराधी जिले में घूम रहे हैं। किसी भी दिन कोई बड़ी वारदात सामने आ सकती है। अब सवाल यह है की शराब ठेकेदारों को जो पुलिस और आबकारी विभाग ने छूट दे रखी है। इसके चलते कोई वारदात घटित होती है तो इसका जिम्मेदार शराब ठेकेदार होगा ? आबकारी अमला होगा ? या फिर पुलिस होगी ? इस सवाल का जवाब इन सभी को खुद ही ढूंढना होगा।
पुलिस से रहते हैं गहरे संबंध, क्यों पूछे आपराधिक रिकॉर्ड, नाम पता
शहर हो या गांव शराब दुकान और शराब ठेकेदारों से जितना संबंध आबकारी विभाग का है । उससे कहीं ज्यादा गहरे संबंध पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के है। शराब ठेकेदार के यहां काम करने वाला आदमी अक्सर पुलिस कर्मियों और अधिकारियों के साथ दिखाई दे जाता है। जिससे साफ होता है कि शराब ठेकेदारों के ये बाहरी लोगों के पुलिस से गहरे संबंध होते हैं। यही कारण है कि पुलिस ने पूरे सिस्टम को ताक पर रख दिया है। क्योंकि जिले और शहर की सुरक्षा के लिए पुलिस का एक नियम बना हुआ है। की कोई भी बाहरी व्यक्ति जिस थाने की सीमा में आता है और वहां ठहरता है।
उसे थाने पहुंच कर अपनी आमद की सूचना जरूर देनी होती है। यह नियम शहरी और ग्रामीण सभी थानों के लिए बने हुए हैं। बाकायदा बाहर से आने वालों की मुसाफ़िरी दर्ज होती है। यह बात भी दर्ज होती है कि वह कितने दिन के लिए आया है। और क्या कारोबार करने आया है। लेकिन शराब दुकानों में काम करने वाले 500 से ज्यादा बाहरी लोगों की मुसाफ़िरी छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले के किसी भी थाने में दर्ज नहीं है। पुलिस ने बाहरी तत्वों के आपराधिक रिकॉर्ड नहीं खंगाले और ना ही पुलिस के अधिकारी कर्मचारी इन पर किसी तरह की कोई सख्ती करते नजर आते हैं। करण वही है की शराब ठेकेदार का आदमी है। इसका मतलब साफ है कि पुलिस को उस बाहरी व्यक्ति को फुटेज देना है और उस पर अपना वरदहस्त बनाए रखना है । यह गंभीर बात है।
ठेकेदार के ही साढ़े 5 लाख उड़ाए, तब खुला शाकिब अली का राज
छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले में 500 से ज्यादा बाहरी लोग शराब दुकानों में काम कर रहे हैं । इनके संबंध क्षेत्रीय पुलिस और आबकारी से भी बने हुए हैं । क्योंकि अवैध शराब पकड़ने के लिए पुलिस आबकारी दोनों ही इन्हीं बाहरी तत्वों का सहारा लेती हैं। इतना गंभीर मामला खुलता ही नहीं, यदि जिले की खमारपानी शराब दुकान में काम करने वाला हरभजन सिंह शराब ठेकेदार के साढे 5 लख रुपए लेकर गायब नहीं हो जाता। दरअसल 20 मई को खमारपानी शराब दुकान के लगभग 5 लाख 45 हजार लेकर हरभजन सिंह छिंदवाड़ा में मौजूद शराब ठेकेदार के कार्यालय में जमा कराने निकला था। लेकिन फिर वापस ही नहीं लौटा , इस बात की शिकायत शराब ठेकेदार ने कोतवाली थाने में की। इस पूरे मामले में कोतवाली थाने की कार्यप्रणाली काबिले तारीफ है।
कोतवाली टीआई आशीष धुर्वे के नेतृत्व में एक पूरी टीम बनाई गई। इस टीम ने हरभजन की तलाश शुरू की। आखिरकार टीम की मेहनत रंग लाई और हरभजन चंडीगढ़ से पकड़ा गया। साढ़े 5 लाख रुपए में से लगभग साढ़े 3 लाख रुपए हरभजन उड़ा चुका था। और उसके खाते में केवल 2 लाख रुपये मौजूद थे। इससे भी बड़ी बात यह है कि जब पुलिस ने पड़ताल की तो पता चला कि हरभजन दो आधार कार्ड लेकर घूम रहा है। एक आधार कार्ड तो हरभजन के नाम का है। लेकिन दूसरा आधार कार्ड शाकिब अली के नाम का है। यानी शराब ठेकेदार अपनी दुकान में अपराधी को शरण देकर जिले की सुरक्षा में सेंध लगा रहा था। यह बात पुलिस नहीं बोलेगी लेकिन हकीकत यही है। और जिले की शराब दुकानों में ऐसा एक शाकिब अली काम नहीं कर रहा। बल्कि 500 से ज्यादा शाकिब अली काम कर रहे हैं। जो आने वाले समय के लिए खतरा है।
एसपी ने की कोतवाली थाने की टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा
शराब ठेकेदार के लिए काम करने वाले अपराधी हरभजन सिंह उर्फ साकिब अली को पकड़ने में कोतवाली पुलिस ने पूरी जान झोंक दी। आखिरकार हरभजन सिंह को पड़कर उसके साकिब अली होने का प्रमाण भी जुटा लिया। इस पूरे मामले में कोतवाली टीआई आशीष धुर्वे, एएसआई बृजेश रघुवंशी, आरक्षक आकाश बैस, सागर डेहरिया, साइबर सेल से आदित्य रघुवंशी, नितिन सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पूरी टीम को पुलिस कप्तान अजय पांडे ने मामले के तुरंत निराकरण और एक गंभीर बात के खुलासे के लिए पुरस्कृत करने की घोषणा की है।
Episode 2 – क्या आम आदमी के लिए भी इतनी तत्परता दिखाती पुलिस ।
शराब कारोबार और अपराधियों की फौज… Avinaash Siingh
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