जल रही फसलें, मर रहे कुलबेहरा नदी के जीव जंतु और मछलियां
ग्रामीणो का बदबू से बुरा हाल, बच्चों और मवेशियों में बढ़ रही बीमारियां
छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले में प्रशासनिक सिस्टम पार्टी देखकर काम करता है। कि कौन कितना बड़ा रसूखदार है उसके हिसाब से तय होता है कि उस पर कार्रवाई होगी या नहीं होगी । ऐसा ही कुछ सिस्टम का खेल देखने को मिला छिंदवाड़ा तहसील के अंतर्गत आने वाले चांद क्षेत्र के सलैया गांव में। यहां एक स्टार्च फैक्ट्री पिछले कई वर्षों से संचालित हो रही है। और इस स्टार्च फैक्ट्री के संचालन में न सिर्फ लापरवाही बरती जा रही है। बल्कि फैक्ट्री के संचालन के लिए बनाई गए नियम और कानून को ताक पर रखकर फैक्ट्री का संचालन हो रहा है। ग्रामीण कई बार शिकायत कर चुके लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग, छिंदवाड़ा जिला प्रशासन, छिंदवाड़ा एसडीएम, छिंदवाड़ा तहसीलदार। लगभग सभी से फैक्ट्री से हो रही परेशानियों को लेकर किसान शिकायत कर चुके। लेकिन आज तक इन किसानों की किसी ने नहीं सुनी। करण वाही है कि सिस्टम आदमी देखकर काम करता है। जितना बड़ा आदमी उसके लिए सिस्टम की उतनी बड़ी मदद। जबकि आम आदमी लगातार परेशान है।
हम बात कर रहे हैं सलैया स्टार्च फैक्ट्री की, यह फैक्ट्री रीवा के किसी कांग्रेस विधायक या उनके रिश्तेदार की है। यह फैक्ट्री लगातार जहर उगल रही है। यह बात शिकायत और किसी के कहने के आधार पर नहीं कहीं जा रही। बल्कि जब दिव्य भारत समाचार की टीम ने खुद मौके पर पहुंच कर देखा । तो होश उड़ गए क्योंकि फैक्ट्री से लगातार जहरीला पानी निकल रहा है। यह पानी करीब ही मौजूद कुलबेहरा नदी में मिल रहा है। पानी इतना जहरीला हो गया है कि किसान जब इस पानी का उपयोग खेतों में करते हैं, तो फसलें जल जाती हैं। यहां तक की इस पानी में मछलियां मर चुकी है। और किसी भी तरह के जीव जंतु जो जल के भरोसे रहते हैं। वह यहां पर नहीं पनप रहे। किसानों की शिकायत केवल नस्ति बंद करके रखी जा रही है। और फैक्ट्री के संचालक को क्लीन चिट दी जा रही है।
फैक्ट्री को क्लीन चिट…लेकिन सच्चाई ये 👇
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों का खुला उल्लंघन
फैक्ट्री का संचालन अकेले जिला प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। बल्कि फैक्ट्री के संचालन के लिए कई विभागों को जिम्मेदारी सौंप जाती है। उनकी एनओसी इस संचालन के लिए लगातार लगती है। किसानों ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग से इस पूरे मामले की कई बार शिकायत की। लेकिन आज तक प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने भी इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की। जबकि यह पूरा मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों के खिलाफ दिखाई दे रहा है। फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला पानी न सिर्फ जमीन बर्बाद कर रहा है, फासले बर्बाद कर रहा है। बल्कि जलीय जीवन के लिए खतरा बन चुका है। इसी पानी को पीकर गांव के मवेशी अपनी ताकत को रहे हैं। और लगातार बीमार हो रहे हैं। जबकि ज्यादातर किसान मवेशियों को इस जगह का पानी नहीं पीने देते। फिर भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों की धज्जियां उड़ती इस फैक्ट्री में दिखाई दे रही है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग हमेशा की तरह गहरी नींद सोया हुआ है।
Episode 02 – किसने की जांच, किसने दी रिपोर्ट क्यों दी जा रही क्लीन चिट।
सिस्टम का खेल… Avinaash Siingh
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