Home जिला बच्चों से पहले नेता अधिकारियों को भोजन, भड़के प्रभारी मंत्री !

बच्चों से पहले नेता अधिकारियों को भोजन, भड़के प्रभारी मंत्री !

मिड डे मील में नेता अधिकारियों के सामने चमचमाती थालियां

हम बच्चों के साथ भोजन करने आए है दावत में नहीं : प्रभारी मंत्री

छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले में एक ऐतिहासिक गणतंत्र दिवस मनाया गया। इस बार नेताओं में कैसी समझ होनी चाहिए, अधिकारियों को कैसा व्यवहार करना चाहिए, और जो तैयारी विशिष्ट अतिथि के लिए की जाती है। उस तैयारी में किस बात को प्राथमिकता देनी चाहिए यह बात जिले के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह जिले के नेताओं और अधिकारियों को सिखा कर चले गए। दरअसल मामला था गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के बाद भोजन का। यह भोजन हमेशा की तरह ही सरकार की योजना मिड डे मील में खजरी स्थित शासकीय स्कूल में रखा गया था। जिसमें प्रभारी मंत्री राकेश सिंह, जिला भाजपा अध्यक्ष शेषराव यादव, महापौर विक्रम आहके, कलेक्टर हरेंद्र नारायण सहित कई नेता और अधिकारी मौजूद थे। नेताओं और अधिकारियों के सामने चमचमाती थालियां रखी गई और बारी आई भोजन परोसने की। जिले के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह ने जब देखा कि भोजन में सांकेतिक तौर पर केवल दो-तीन बच्चों को बैठाकर नेताओं और अधिकारियों को बेहतरीन भोजन कराया जा रहा है । और भोजन परसने की तैयारी चल रही है।

वीडियो में देखें कैसे भड़के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह 👇

जैसे ही स्कूल प्रबंधन के स्टाफ ने प्रभारी मंत्री को भोजन परसने की लिए पहल की। तो प्रभारी मंत्री नाराज हो गए और उन्होंने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि हम यहां पर बच्चों के साथ भोजन करने आए ना कि किसी दावत में आए है। प्रभारी मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सभी बच्चों को भोजन के लिए बुलाए और पहले बच्चों को भोजन कराओ। उसके बाद हम भोजन करेंगे। लाख मिन्नतें करने के बाद भी प्रभारी मंत्री अपनी बात से हटे नहीं और पहले उन्होंने बच्चों को हाल में बिठाया। प्रभारी मंत्री ने जिले के नेता और अधिकारियों को यह सिखा दिया कि किसी भी चीज की तैयारी कैसी होनी चाहिए । केवल सांकेतिक तौर पर कम कार्यक्रमों का आयोजन नहीं होना चाहिए जबकि अब तक उल्टा ही होता है हमारे नेता पहले ही भोजन करके निकल जाते हैं और बाद में बच्चों को क्या मिलता है यह तक नहीं देखते।

नेता खानापूर्ति खरते हैं लेकिन प्रभारी मंत्री ने दिखाया असल प्रोटोकॉल

किसी भी पार्टी के नेता बनने के लिए सबसे पहली जरूरत होती है एक ऐसे अनुभव की जो कि आपको जनता की सेवा करने के लिए तत्पर करता है। एक ऐसी गंभीरता की जिसमें आप बातों को समझ सके, समस्याओं को समझ सके और उनका गंभीरता से निराकरण कर सके। और एक ऐसे वास्तविक नेतृत्व की जो आपको जनता के लिए सूटेबल बनता है। वास्तव में प्रभारी मंत्री राकेश सिंह ने भोजन के दौरान जो भी एक्शन लिया वह एक नेता के अनुभव, वास्तविकता और गंभीरता को दर्शाता है। जबकि आजकल नेता केवल अपनी रोटियां सेंकने में लगे हुए रहते हैं। कलेक्टर से कैसे अपने काम निकल जाएं। कलेक्टर को कैसे इस बात के लिए तैयार किया जाए कि वह उनकी बात सुने। अपनी पार्टी के दूसरे नेताओं से कैसे आगे बढ़ा जाए । इन सारी बातों का सरोकार आजकल के नेताओं से है जो की छिंदवाड़ा जिले में भी मौजूद है। इन नेताओं को आम जनता से कोई सरोकार नहीं है। और ना ही यह नेता आम जनता के लिए जनप्रतिनिधि बनते हैं। और ना ही नेता बनते हैं लेकिन राकेश सिंह ने अपने एक क्रिया से कम से कम नेताओं को यह तो दिखा दिया कि वास्तव में नेता कैसा होना चाहिए।

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