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राजनीति : जिनके दरबार में लगता था नेताओं का मेला, अब वही घर – घर जाकर बांट रहे मिठाइयां !

भाजपाई रंग में डूबे दीपक सक्सेना, दिवाली पर नेताओं के घर खुद पहुंचे

कांग्रेस में थे तो पूरे जिले के नेता खुद लगाते थे रोहना में हाजिरी

छिंदवाड़ा। राजनीति में हो रहा लगातार बदलाव नेताओं को क्या-क्या रंग दिखाएंगे यह देखना अभी बाकी है। लेकिन इसकी शुरुआत हो चुकी है जिले के उस कद्दावर नेता से जिसके दरबार में जिले भर के कांग्रेस नेता, कई भाजपा नेता और कांग्रेस के आला पदाधिकारी और कई बड़े व्यापारी खुद बधाइयां देने पहुंचते थे। आज वही कद्दावर नेता भाजपा के हर स्तर के नेताओं के घर जाकर मिठाइयां और बधाइयां बांट रहे हैं। यह कद्दावर नेता कोई और नहीं बल्कि पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस में 1 साल पहले तक कमलनाथ के बाद सबसे बड़े नेता रहे दीपक सक्सेना हैं। दीपक सक्सेना का कांग्रेस में इतना बड़ा कद था कि वह केवल कमलनाथ के काफिले में ही शामिल होते थे । जबकि बाकी नेता दीपक सक्सेना के काफिले में शामिल होते थे। त्योहारों पर रोहना दरबार में नेताओं की भीड़ लगती थी और त्योहारों पर जिस दरबार में मेला लगा रहता था। आज इस दरबार के मालिक दीपक सक्सेना घर-घर जाकर मिठाइयां बांट रहे हैं। जिसकी चर्चा पूरे शहर और छिंदवाड़ा जिले भर में है। यह कुछ और नहीं बल्कि राजनीति के रंग है।

1 साल पहले लोकसभा चुनाव के दौरान कमलनाथ और कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में आए दीपक सक्सेना अब अस्तित्व की लड़ाई में शामिल है। हालांकि उनके बेटे अजय चुनमुन सक्सेना को संगठन में उपाध्यक्ष जरूर बनाया गया। लेकिन दीपक सक्सेना का कद फिर भी कांग्रेस से यहां बहुत कम है। भाजपा में कार्यकर्ता सर्वोपरि होता है और इसी थीम पर दीपक सक्सेना भी पहली बार दिवाली के एक दिन पहले अपने घर से निकले और अपने भाजपा के जिला उपाध्यक्ष बेटे अजय चुनमुन सक्सेना के साथ सांसद विवेक बंटी साहू के कार्यालय, भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव के घर, भाजपा नेता शानटी बेदी के घर, भाजपा नेता योगेश कांता सदारंग के घर, जिला भाजपा महामंत्री विजय पांडे के घर और भाजपा नेता दिवाकर सदारंग सहित कई नेताओं के घर पहुंचे। और दिवाली की बधाइयां के साथ मिठाइयां बांटी। इस नजारे को देखने के बाद राजनीति और राजनीति में होने वाले बदलाव से नेताओं के रुतबे में आने वाले बदलाव साफ दिखाई देते हैं।

कांग्रेस में छिंदवाड़ा जिले के सर्वोपरि नेता रहे दीपक सक्सेना

दीपक सक्सेना कमलनाथ के साथ 1980 से ही लगातार बने रहे। कमलनाथ ने भी छिंदवाड़ा को लेकर दीपक सक्सेना पर पूरा भरोसा जताया। यही कारण है कि दीपक सक्सेना पिछले 45 साल में छिंदवाड़ा जिले के कांग्रेस के सर्वोपरि नेता बने रहे। कमलनाथ केंद्र की राजनीति करते रहे और दीपक सक्सेना छिंदवाड़ा के कमलनाथ बने रहे । मंत्री रहते हुए भी दीपक सक्सेना का कार्यालय छिंदवाड़ा में ही होता था और उनसे बड़े कद का छिंदवाड़ा में कांग्रेस का कोई नेता नहीं था । या यूं कहें की कमलनाथ के कारण दीपक सक्सेना के कद का कोई नेता भाजपा में भी नहीं था। दीपक सक्सेना विधानसभा चुनाव 2018 के बाद तीसरे पायदान पर आए जब राजनीति में कमलनाथ सरकार के दौरान नकुलनाथ की एंट्री हुई। एक साल पहले भाजपा ज्वाइन करने के बाद से लेकर आज तक दीपक सक्सेना के साथ किए गए भाजपा के वादे भी पूरे नहीं हो पाए।

दीपक सक्सेना को भाजपा ज्वाइन करने के पहले निगम या मंडल में जगह देने की बात प्रदेश भाजपा संगठन ने की थी। लेकिन अब लगता है कि वह गुजरे जमाने की बात है। और दीपक सक्सेना का दौर लगभग समाप्ति की ओर और है। अब उनकी कमान भाजपा में अजय चुनमुन सक्सेना उनके छोटे बेटे ने संभाल रखी है। उन्हें भाजपा ने जिला उपाध्यक्ष भी बनाया है। लेकिन जो रुतबा दीपक सक्सेना का कांग्रेस में था उस रुतबे को वापस पाने में कई साल लग सकते हैं क्योंकि भाजपा में कई बड़े नेता है जो भाजपा के विचारधारा के साथ शुरुआत से जुड़े हुए और अब नए जोड़ने वाले नेताओं को यह संगठन कितनी तवज्जो देता है इस पर निर्भर करता है कि दीपक सक्सेना का रुतबा आने वाले समय में क्या होगा।

कांग्रेस में अपार संभावनाएं, भाजपा में नेताओं की अपार भीड़

छिंदवाड़ा की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा की तुलना करें तो दीपक सक्सेना के कांग्रेस छोड़ने के बाद कांग्रेस में नेताओं की अपार संभावनाएं यहां हैं। अब मेहनत करने वाला चेहरा बड़ा नेता बन सकता है। राजनीति में लगातार मेहनत करने वाले सोनू मागो जैसे युवा नेता अब सीधे वरिष्ठ नेताओं में शामिल हो गए हैं। ऐसे ही पूरे जिले में कांग्रेस में अपार संभावनाएं मौजूद है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा में भाजपा की विचारधारा को लेकर चलने वाले नेता बहुत ज्यादा है। उस पर अब कांग्रेस से भाजपा में आए कद्दावर नेताओं की संख्या भी बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इसका मतलब साफ है कि भाजपा में आने वाले दिनों में नेताओं के प्रमोशन की संभावनाएं बहुत जटिल है। कड़े कंपटीशन के बाद ही विधानसभा, लोकसभा, निगम और मंडल जैसे पदों पर टिकट या दायित्व मिल सकता है। उस पर अब बीडी शर्मा का दौर भी खत्म हो गया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए हेमंत खंडेलवाल फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं। वे संघ को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। इसको देखते हुए लगता है कि नए नेताओं के लिए भाजपा में जगह तो है लेकिन पदों पर आने की होड़ में बड़ी लंबी कतार है।

राजनैतिक विश्लेषण…पार्ट -1
Avinash Singh
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