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शर्मसार खून के रिश्ते…पिता की गुहार मै जीना चाहता हूं…करा दो मेरा ऑपरेशन !

कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ बेटे ने कह दिया मर जाए तो कर जाए

जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा बुजुर्ग, नागपुर में होगी हार्ट सर्जरी

छिंदवाड़ा । निजी अस्पताल में भर्ती एक बुजुर्ग पिता अपने बच्चों से गुहार लगा रहा है कि यहां से मुझे रेफर कर दिया गया है, नागपुर ले जाकर मेरा ऑपरेशन करा दो ताकि मेरी जिंदगी बच सके । यह पिता 20 साल से अकेला रह रहा है। इसके दो बेटे हैं , दो बेटियां है एक बेटा तो कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ है। लेकिन पिता का इलाज निजी अस्पताल में दूसरे लोग करा रहे है। लेकिन अब बारी है छिंदवाड़ा के निजी अस्पताल से ओपन हार्ट सर्जरी के लिए बुजुर्ग को नागपुर ले जाने की। नागपुर ले जाकर बुजुर्ग का ऑपरेशन कराने के लिए कोई तैयार नहीं है। यह बड़ा ही मार्मिक मामला है जिसमें खून के रिश्ते शर्मसार हो रहे और जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे बुजुर्ग को अपने बेटों से दुनिया की हकीकत देखने को मिल रही है।

कौन लेगा जिंदगी और मौत की जिम्मेदारी ?

दरअसल पिछले 10 – 12 दिनों से यह बुजुर्ग शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती है। इनका वाल्व लगभग खराब हो चुका है और ओपन हार्ट सर्जरी की नौबत है। बुजुर्ग के पास आयुष्मान कार्ड है जिसके द्वारा उसका इलाज हो सकता है।निजी अस्पताल इसी कार्ड के आधार पर उसे नागपुर रेफर कर रहा है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर बुजुर्ग के साथ नागपुर कौन जाए। क्योंकि जो लोग फिलहाल बुजुर्ग का उपचार निजी अस्पताल में करा रहे हैं वे नागपुर तो चले जाएंगे लेकिन बुजुर्ग की जिंदगी और मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा । क्योंकि नागपुर में जब बुजुर्ग का ऑपरेशन होने वाला होगा तब अस्पताल एक फार्म भरवाएगा जिसमें बुजुर्ग के अपने बच्चों या करीबी रिश्तेदार का होना जरूरी है।

वीडियो में सुने बुजुर्ग की जुबानी उन्हीं की कहानी 👇

क्योंकि इस फॉर्म में साफ लिखा होगा कि वह ऑपरेशन के दौरान यदि बुजुर्ग को कुछ होता है तो उसके लिए तैयार हैं। समाजसेवी नागपुर ले जाकर ऑपरेशन तो करा सकते हैं लेकिन क्या यह समाजसेवी उस फॉर्म को भर सकते हैं जिस फार्म को भरने के लिए आज इस बुजुर्ग के साथ कोई मौजूद नहीं है। छिंदवाड़ा का यह मार्मिक मामला आज सभी के सामने मौजूद है । और शायद जब यह खबर आप तक पहुंचे तो आप लाचार पिता के बेटे को भी पहचान जाए । जिसकी पहचान हमने इस समाचार में उजागर नहीं की है।

कलयुग का सच…मौत होते ही शुरू होगा संपत्ति बांटने का खेल ?

आज जिस बीमार पिता की जिम्मेदारी उठाने से उसके बेटे और बेटियां किनारा कर रहे हैं। कल जब उस पिता की मौत हो जाएगी तो पिता की पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा लेने के लिए उसके अंतिम संस्कार के पहले से ही योजनाएं शुरू हो जाएगी। यह कलयुग का सच है। जीते जी पिता की जिम्मेदारी से किनारा करने वाले यह बेटे और बेटियां कल उसकी संपत्ति पर अपना अधिकार इस तरह जताएंगे जैसे उन्होंने पिता को सोने के पालने में झुलाया हो । अंतिम संस्कार से लेकर 13 दिन के भीतर ही संपत्तियां बाट ली जाएगी । बुजुर्ग की जुबानी सुनी जाए तो आज भी उनके बेटे ने संपत्ति को बेचने से मना कर दिया। और कहा कि खुद अपना इलाज कराओ यह बयान खुद अस्पताल से बुजुर्ग पिता ने जारी किए हैं।

खून के रिश्तों का सच…Avinash Singh
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