आयुष्मान कार्ड धारकों को भी खर्च करने पड़ रहे रूपए
जिला अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज की लापरवाही
छिंदवाड़ा। हेल्थ इंडस्ट्री की बात हो और जिला अस्पताल का नाम ना आए ऐसा संभव नहीं है । दरअसल निजी अस्पतालों की बढ़ती शह का सबसे बड़ा कारण जिला अस्पताल है। जहां 150 से भी ज्यादा डॉक्टर है , संसाधन मौजूद है मशीन मौजूद है लेकिन उनका उपयोग करने में जिला अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज की लापरवाही साफ दिख रही है। जिला अस्पताल में मामूली सी जांच करने के लिए भी मरीज को साफ या कह दिया जाता है कि इसका डॉक्टर हमारे पास मौजूद नहीं है। आखिर क्यों ? क्या जिला अस्पताल प्रबंधन या मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने ऐसे तकनीशियन और चिकित्सकों की डिमांड नहीं भेजी जिनकी आवश्यकता हर दिन लगभग हजार मरीजों को पड़ रही है।
जिला अस्पताल की कहानी सुने मरीजों की जुबानी 👇
दिव्य भारत समाचार की टीम हेल्थ इंडस्ट्री के अगले एपिसोड बनाने के दौरान जब जिला अस्पताल पहुंची तो लोगों ने यहां उन्हें अपनी व्यथा सुनाई । कोई सोनोग्राफी करने के लिए पिछले 7 माह से भटक रहा है तो किसी ने बाजार में 1200 रुपए देकर सोनोग्राफी कराई है। 7 महीने में भी हालत वही की वही । अस्पताल प्रबंधन का साफ कहना है कि हमारे पास रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। आम जनता ने सवाल अस्पताल प्रबंधन पर ही नहीं उठाए बल्कि जिले के कर्ताधर्ता जनप्रतिनिधि सांसद, विधायक और कलेक्टर तक पर उठाएं हैं । कि जब जिला अस्पताल में प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटी तय कर दी गई है । तो क्या प्रशासनिक अधिकारी केवल खाना पूर्ति के लिए जिला अस्पताल का निरीक्षण कर रहे हैं । आम जनता की समस्या सुलझाने की कोई योजना जिला प्रशासन के पास नहीं है। यह एक बड़ा सवाल दिव्य भारत समाचार ने सीधे जनता से बात की और उनकी व्यथा सुनी।
लापरवाही या चालाकी… Avinash Singh
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