Home राजनीति कांग्रेस : फ्लाइंग पॉलिटिक्स के भरोसे कब तक चलेगी राजनीति !

कांग्रेस : फ्लाइंग पॉलिटिक्स के भरोसे कब तक चलेगी राजनीति !

युवा कांग्रेस और एनएसयूआई से ज्यादा भीड़ सेवा दल में

जिले की कहानी दूर, शहर ही नहीं साध पा रहे कांग्रेस नेता

छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा में कांग्रेस की राजनीति हमेशा से ही फ्लाइंग पॉलिटिक्स की राजनीति रही है। इसका कारण यह है कि 1979 में छिंदवाड़ा आए कमलनाथ तब से लेकर 2018 तक छिंदवाड़ा के भाजपा और कांग्रेस के नेताओं से बहुत ऊंचे ओहदे पर रहे। बल्कि यह कहना भी गलत तो नहीं होगा कि छिंदवाड़ा ही नहीं छिंदवाड़ा के आसपास के कई जिलों में इतने बड़े कद का नेता कोई नहीं था। यही कारण था कि छिंदवाड़ा की राजनीति फ्लाइंग पॉलिटिक्स के साथ चलती रही। कमलनाथ छिंदवाड़ा का पर्याय बन गए और इन 45 सालों में पूरे विश्व को यह पता चल गया कि भारत के नक्शे में छिंदवाड़ा भी एक जगह है जहां से कमलनाथ आते हैं। लेकिन अब 2025 में यह सवाल सबसे बड़ा कांग्रेस के लिए या कमलनाथ कांग्रेस के लिए होगा की छिंदवाड़ा जिले में कब तक फ्लाइंग पॉलिटिक्स के भरोसे राजनीति चलती रहेगी। कमलनाथ के बाद अब नकुलनाथ छिंदवाड़ा में कमलनाथ के साथ कदम से कदम मिलाकर राजनीति कर रहे हैं। एक बार सांसद रह चुके हैं और दूसरी बार उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा है। इसका मतलब साफ है कि फ्लाइंग पॉलिटिक्स के भरोसे कमलनाथ ने तो राजनीति कर ली लेकिन नकुलनाथ की राजनीति नहीं चल पाएगी।

लोकसभा चुनाव के लगभग 1 साल बाद कांग्रेस की जमीन लगातार खिसकती जा रही है। जिले की जनता में भाजपा नेताओं के विरोध, सरकार की गतिविधियां, प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के बावजूद कमलनाथ कांग्रेस छिंदवाड़ा में अपना वजूद नहीं दिखा पा रही है। और नकुलनाथ के लिए कोई नया प्लेटफार्म खड़ा होता दिखाई नहीं दे रहा है। छिंदवाड़ा जिले में कांग्रेस कहीं नजर नहीं आ रही, जबकि भाजपा के ही दो या तीन गुट आपस में भिड़ते दिख रहे हैं। लेकिन इससे कमलनाथ कांग्रेस को कोई फायदा नहीं होगा और ना ही नकुलनाथ लोगों की पसंद बन पाएंगे। क्योंकि कारण वही है फ्लाइंग पॉलिटिक्स के भरोसे कब तक राजनीति चलेगी।

संगठन आज भी कमलनाथ के निर्देशों के भरोसे

छिंदवाड़ा में कांग्रेस नहीं बल्कि कमलनाथ कांग्रेस काम करती है। और कमलनाथ कांग्रेस पिछले 45- 48 सालों से कम कर रही है। कमलनाथ के फैसले पहले सही होते रहे और जिले में एक संतुलन बना रहा । लेकिन अब भी जबकि कमलनाथ अर्श से फर्श पर आ गए है। वह कांग्रेस के बड़े नेता है लेकिन कांग्रेस ही गायब है। इन हालात में भी छिंदवाड़ा में कांग्रेस का संगठन कमलनाथ के निर्देशों के भरोसे ही चल रहा है। जिले के कांग्रेस नेताओं में ऊर्जा कहीं नजर नहीं आती। जिन युवाओं में ऊर्जा है उनके पास पद नहीं है । और कांग्रेस भवन में बैठकर ही पूरी राजनीति जिला कांग्रेस का संगठन कर रहा है। जो लोग जमीन पर काम कर रहे हैं उनको कोई प्प्रतिसाद मिलता दिखाई नहीं दे रहा।

जो लोग पदों पर है वह शायद इस लायक ही नहीं है कि उनसे कमलनाथ कांग्रेस या नकुलनाथ की राजनीति को कोई फायदा हो सके । 2024 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी कमलनाथ ने संगठन को मजबूत बनाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। वही घिसे – पिटे चेहरे छिंदवाड़ा कांग्रेस की पहचान बने हुए हैं। और संगठन में जो नए बदलाव हो रहे हैं उनमें भी कोई खास चेहरे नजर नहीं आ रहे। जो नकुलनाथ की राजनीति को आगे बढ़ा सके और उन्हें जिले में स्थापित करने में मदद कर सके। ऐसी कोई बात जिला कांग्रेस के वर्तमान संगठन में नजर नहीं आती।

नेता – व्यापारी कमलनाथ ने जिनको बनाया वो छोड़ गए साथ

कमलनाथ ने 45 सालों की राजनीति में छिंदवाड़ा को हमेशा ही ऊपर रखा और यह बात जिले की जनता जानती है। लेकिन जैसे हालात बदलते हैं वैसे ही लोग उन पर उपकार करने वालों को भी भूल जाते हैं । इसका नजारा 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले देखने को मिला जहां 45 साल तक कमलनाथ के साथ कदम से कदम मिलाकर राजनीति करने वाले दीपक सक्सेना जिन्हें कमलनाथ ने व्यापार से लगाकर राजनीति में हमेशा ही छिंदवाड़ा में सबसे पहले रखा। उन्होंने ही कमलनाथ का साथ छोड़ दिया कारण जो भी हो लेकिन आज दीपक सक्सेना कमलनाथ के साथ नहीं है और नकुलनाथ की करारी हार के पीछे भी दीपक सक्सेना का बड़ा हाथ है।

कमलनाथ का साथ छोड़ने वाले अकेले दीपक सक्सेना नहीं है बल्कि कई नेता है और उनके साथ ही शहर के कई ऐसे व्यापारी भी हैं जिनको कमलनाथ ने समय-समय पर हर संभव सरकारी, व्यापारिक और आर्थिक सहयोग किया । उनका उद्योग बढ़ाया उन्हें बड़े-बड़े प्रोजेक्ट दिलाने में मदद की, ऑटोमोबाइल सेक्टर दिलाने में मदद की, कंस्ट्रक्शन की बड़ी कंपनी बनाने में मदद की। यह सभी उद्योगपति आज कमलनाथ के साथ नहीं है यह एक कड़वा सच है। जिसका नजारा लोकसभा चुनाव के पहले देखने को मिल गया है। लोकसभा चुनाव 2024 में लोगों ने कमलनाथ का साथ क्यों नहीं दिया यह एक बड़ा सवाल है क्या इसके पीछे नकुलनाथ कारण है ? या इसके पीछे केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार है ? और लोग हर दौर में उन लोगों से फायदा उठाना चाहते हैं जो लोग ऊपर बैठे और इस सवाल का जवाब शायद कमलनाथ को एक बार फिर से राजनीति पर गौर करने के लिए काफी होगा।

आदिवासी नेतृत्व ही नहीं, संगठन के पदाधिकारी कर रहे दिखावा

छिंदवाड़ा जिले में कमलनाथ कांग्रेस की जमीन लगातार की खिसकती जा रही है। इसका कारण है की छिंदवाड़ा में संगठन को मजबूत करने कोई खास प्रयास नहीं किया जा रहा है । जबकि मध्य प्रदेश कांग्रेस लगातार प्रदेश के अन्य जिलों में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए प्रयास कर रही है। लेकिन छिंदवाड़ा में तो कमलनाथ कांग्रेस चलती है यहां देखने वाली बात यह है कि छिंदवाड़ा कांग्रेस के संगठनों में जिन लोगों को जिम्मेदारी दी गई है वे लोग केवल दिखावे की राजनीति कर रहे हैं। कमलनाथ और नकुलनाथ छिंदवाड़ा आए तो उनके आगे पीछे घूमना उनको अपना चेहरा दिखाना और जैसे ही कमलनाथ और नकुलनाथ का हवाई जहाज उड़ा। संगठन के पदाधिकारी गायब हो जाते हैं कमलनाथ कांग्रेस के लिए इससे बड़ी विडंबना क्या होगी की छिंदवाड़ा जिले में एनएसयूआई और युवा कांग्रेस से ज्यादा भीड़ सेवादल में दिखाई देती है। इसके अलावा छिंदवाड़ा जिले की 40% आबादी आदिवासियों की है और हालात यह है की कमलनाथ कांग्रेस के पास कोई एक ऐसा आदिवासी चेहरा भी नहीं है जो पूरे जिले के आदिवासियों के लिए एक पहचान बन सके। वर्तमान में कांग्रेस संगठन में जिला अध्यक्ष की तलाश चल रही है और जिस तरह की राजनीति अब तक कांग्रेस में होती आई है यह भी तय है कि कोई ना कोई डमी चेहरे को ही जिला कांग्रेस की कमान सौंप दी जाएगी।

लोग कांग्रेस के साथ, फ्लाइंग पॉलिटिक्स से नहीं साध पाएंगे

छिंदवाड़ा जिले में कांग्रेस का एक बड़ा वोट बैंक है। इसके साथ ही वर्तमान राजनीति और जिले की स्थिति के चलते लोग कांग्रेस के साथ आना चाहते हैं। लेकिन सवाल फिर वही खड़ा होता है कि आखिर फ्लाइंग पॉलिटिक्स के भरोसे राजनीतिक कब तक चलेगी। कमलनाथ और नकुलनाथ तीन दिवसीय प्रवास पर छिंदवाड़ा आते हैं जिसमें से एक दिवस उनके आने और एक दिवस उनके जाने का होता है। इसके मायने यह है कि छिंदवाड़ा में केवल एक दिन ही कमलनाथ और नकुलनाथ देते हैं। यहां कमलनाथ को दोष देना ठीक नहीं होगा लेकिन नकुलनाथ भी अपने पिता की तरह फ्लाइंग पॉलिटिक्स में लगे हुए हैं। शायद इस फ्लाइंग पॉलिटिक्स के भरोसे नकुलनाथ जिले में लोगों के बीच अपना भरोसा स्थापित नहीं कर पाएंगे। इस फ्लाइंग पॉलिटिक्स के भरोसे राजनीति करने के लिए कमलनाथ ने बहुत संघर्ष किया है और अपने दौर में उन्होंने छिंदवाड़ा को पूरे देश में एक अलग स्थान पर रखा। यही कारण है कि लोग फ्लाइंग पॉलिटिक्स होने के बाद भी कमलनाथ को पसंद करते हैं । लेकिन क्या वही लोग नकुलनाथ को फ्लाइंग पॉलिटिक्स के भरोसे राजनीति करने देंगे। अब यह सवाल कमलनाथ कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सवाल है।

राजनैतिक विश्लेषण (कमलनाथ कांग्रेस)…
Avinash Singh
9406725725/7697930555