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भाजपा : जिले के किस नेता को मिलेगी निगम या मंडल में जगह ..?

पंडित रमेश दुबे का नाम प्रदेश में आते ही भाग दौड़ शुरू

दीपक सक्सेना से किया था निगम में शामिल करने का वादा

छिंदवाड़ा। सरकार निगम और मंडलों में नेताओं की नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया है। अब तक निगम और मंडल मंत्रियों के भरोसे चल रहे थे और प्रशासनिक प्रभारी के बाद मंत्रियों को निगम और मंडलों को प्रभार भी दे दिया गया था। पूरे प्रदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेता निगम और मंडलों में शामिल होने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। यहां तक की लोकसभा चुनाव के पहले कई नेताओं को निगम का प्रलोभन देकर भाजपा में शामिल किया गया । लेकिन सरकार बनने के साल भर बाद भी ऐसी कोई स्थिति अब तक बनी नहीं थी। अब निगम और मंडलों में नेताओं की नियुक्ति का रास्ता साफ होने के बाद छिंदवाड़ा जिले में भी हलचल बढ़ गई है। कि आखिर किस नेता को निगम में जगह मिलेगी इसमें प्रमुख रूप से तीन नाम पूरे जिले में चर्चा का विषय बने हुए हैं। जिनमें से एक नाम प्रदेश स्तर पर चल रहा है वह नाम है पूर्व विधायक चौरई के कद्दावर नेता पंडित रमेश दुबे का। दूसरा नाम है लोकसभा चुनाव के पहले कमलनाथ का 45 साल पुराना साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री दीपक सक्सेना का। और तीसरा नाम है भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी चंद्रभान सिंह का । यह तीनों ही नेता निगम अध्यक्ष बनने की कतार में हैं। अब इसमें से किसको मौका मिलता है इस बात को लेकर जिले भर में चर्चा चल रही है।

किस नेता की जिले में क्या स्थिति क्या पड़ेगा प्रभाव….

पंडित रमेश दुबे….

पंडित रमेश दुबे बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं। और भाजपा के साथ उनका बड़ा पुराना नाता है। लगभग तीन बार चौरई विधानसभा से विधायक रहे पंडित रमेश दुबे 2008 में मंत्री पद के प्रबल दावेदार थे। लेकिन विधानसभा चुनाव 2008 में पंडित रमेश दुबे चुनाव हार गए और मंत्री नहीं बन पाए। भाजपा के जिला संगठन में जिला अध्यक्ष रहे पंडित रमेश दुबे निर्विवादित नेता है। प्रदेश संगठन में उनका खास रसूख है। फिलहाल निगम की दौड़ में पंडित रमेश दुबे का नाम प्रदेश स्तर पर चल रहा है।

राजनीति पर क्या प्रभाव…
पंडित
रमेश दुबे को निगम का अध्यक्ष बनाया जाता है तो इसका प्रभाव सबसे ज्यादा चौरई क्षेत्र की राजनीति पर पड़ेगा ना कि जिले की राजनीति पर। क्योंकि पंडित रमेश दुबे चौरई क्षेत्र में राजनीति करते हैं। और अब चौरई क्षेत्र में भी राजनीति के युवा समीकरण तैयार हो रहे हैं। इन हालात में पंडित रमेश दुबे को निगम की कमान मिलने का मतलब साफ है की चौरई क्षेत्र का पावर सेंटर एक बार फिर पंडित रमेश दुबे के घर से संचालित होने लगेगा । और लखन वर्मा, बंटी पटेल, बबलू पटेल जैसे नेता फिर से हाशिए पर नजर आएंगे लेकिन पंडित रमेश दुबे के निगम में शामिल होने का ज्यादा प्रभाव जिले की राजनीति पर नहीं पड़ेगा।

चौधरी चंद्रभान सिंह….

चौधरी चंद्रभान सिंह भाजपा के कई सालों तक जिले भर के अग्रणी नेता रहे। उनकी राजनीति न सिर्फ छिंदवाड़ा विधानसभा तक सीमित रही बल्कि वह जिले के अग्रणी भाजपा नेता में शुमार रहे। तीन बार भाजपा से छिंदवाड़ा विधायक बने चौधरी चंद्रभान सिंह दो बार कैबिनेट मंत्री रहे। भाजपा के जमीनी नेताओं में उनका खाता दबदबा भी है।

राजनीति पर क्या प्रभाव…
भाजपा की वर्तमान राजनीति में पिछले 7 साल से निष्क्रिय रहे चौधरी चंद्रभान सिंह शेषराव यादव के जिला अध्यक्ष बनने के बाद एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। और उनका खेमा वर्तमान में जिला संगठन का सबसे बड़ा गुट है। चौधरी चंद्रभान सिंह फिलहाल कोई पद नहीं चाहते लेकिन भाजपा के प्रदेश संगठन ने कई बार चौधरी चंद्रभान सिंह को निगम में शामिल करने की बात कही है । चौधरी चंद्रभान सिंह किसी निगम के अध्यक्ष बनते हैं तो इसका प्रभाव जिला भाजपा संगठन की राजनीति पर जरुर पड़ेगा। जिला भाजपा संगठन मजबूती से खड़ा होगा इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि आज जिले भर के भाजपा नेता जिला भाजपा अध्यक्ष शेषराव यादव और पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी चंद्रभान सिंह के करीबी है।

दीपक सक्सेना…

निगम अध्यक्ष की दौड़ में तीसरा सबसे बड़ा नाम 45 साल तक कमलनाथ के करीबी रहे, कांग्रेस के चार बार विधायक और कांग्रेस सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री, 2018 विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रहे वर्तमान भाजपा नेता दीपक सक्सेना का है। दीपक सक्सेना लोकसभा चुनाव के पहले सांसद बंटी विवेक साहू के समर्थन में भाजपा में शामिल हुए। इस दौरान दीपक सक्सेना को भाजपा संगठन, मुख्यमंत्री सहित सभी नेताओं ने निगम में शामिल करने का प्रलोभन भी दिया था। यही कारण है कि दीपक सक्सेना को निगम में जगह मिलने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। कुछ भाजपा नेताओं का मानना है कि भाजपा संगठन ने जो वादा किया था उसे पूरा करेगा। अब देखना यह है कि भाजपा में महज 1 साल के राजनीतिक कैरियर वाले पूर्व कांग्रेसी नेता दीपक सक्सेना को भाजपा संगठन निगम के काबिल मानता है या नहीं।

राजनीति पर क्या प्रभाव…
अब बात करते हैं उनके निगम अध्यक्ष बनने के बाद जिले की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा। दरअसल दीपक सक्सेना जिले में कमलनाथ के बाद सबसे बड़े नेता रहे और और जिले में कांग्रेस की राजनीति शिकारपुर के बाद रोहना दरबार से संचालित होती रही है। अब दीपक सक्सेना भाजपा में हैं और एक बार फिर पावर में आते हैं तो जिला भाजपा का तीसरा पावर सेंटर जिला मुख्यालय में रोहना दरबार ही रहेगा यह बात साफ है। अब तक जिला भाजपा केवल सांसद विवेक बंटी साहू के कार्यालय और जिला भाजपा कार्यालय से संचालित हो रही है। लेकिन दीपक सक्सेना को निगम में मौका मिलता है तो अपनी आदत से मजबूर दीपक सक्सेना भाजपा का एक नया पावर सेंटर तैयार करेंगे। जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव छिंदवाड़ा विधानसभा पर पड़ेगा। क्योंकि दीपक सक्सेना के समर्थक छिंदवाड़ा विधानसभा में सबसे ज्यादा है। और छिंदवाड़ा शहर सहित विधानसभा से कई कांग्रेसी दीपक सक्सेना के साथ भाजपा में शामिल हुए।

राजनैतिक विश्लेषण भाजपा…
Avinash Singh
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