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कारनामा : खनिज अधिकारियों ने चोरों को सौंप दी 10 हजार डंपर रेत!

कलेक्टर कार्यालय में ही धरने पर बैठ गए विधायक

चांद क्षेत्र में अवैध रेत भंडारण और उत्खनन जोरों पर

छिंदवाड़ा। सरकार आला महकमों में माफिया का कब्जा किस तरह से हो गया है इस बात का ताजा तरीन उदाहरण जिले के चांद क्षेत्र में देखने को मिला । छिंदवाड़ा और पांढुर्ना के अलग होने के बाद छिंदवाड़ा जिले का रेत का कारोबार सबसे बड़े स्तर पर चांद क्षेत्र में चल रहा है । यहां वैध और अवैध सहित हर तरह का रेत माफिया सक्रिय है। वैध रेत ठेकेदार अवैध रेत का उत्खनन कर रहे हैं और भंडारण भी कर रहे हैं। इस मामले की जब शिकायतें की गई तो खनिज विभाग ने पिछले एक महीने में लगभग 10 हजार डंपर रेत पकड़ तो ली। लेकिन इस रेत को चोरों के हवाले कर दिया। अब हालात यह है कि खनिज विभाग के द्वारा पकड़ी गई रेत अवैध रूप से बिक रही है। और पूरा जिला प्रशासन तमाशा देख रहा है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब चौरई विधायक मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और यहां प्रशासन की तवज्जो पाने के लिए विधायक खुद अपने 50 से भी ज्यादा समर्थकों के साथ कलेक्टर कार्यालय के जनसुनवाई कक्ष के सामने धरने पर बैठ गए। आखिरकार कलेक्टर को उनकी फरियाद सुनने के लिए जनसुनवाई कक्ष से बाहर आना पड़ा।

माफिया के इशारे पर माफिया के लिए करवाई !

खनिज विभाग चांद क्षेत्र में पिछले लगभग एक महीने से दिन रात अवैध रेत के भंडारणों पर कार्रवाई कर रहा है। बड़ी बात यह है कि खनिज विभाग की कार्रवाई क्यों की जा रही है और किसके लिए की जा रही है इस बात के सवाल उस समय खड़े हो गए। जब खनिज विभाग रेत जप्त कर उसे माफिया के हवाले ही कर रहा है। हालांकि नियम यह है कि रेत पकड़ने के बाद उस रेत को ठेकेदार की सुपुर्द किया जाता है। और पकड़ी गई अवैध रेत की रॉयल्टी भी सरकार को जमा करनी पड़ती है। यह नियम है लेकिन खनिज विभाग की कार्रवाई पर सवाल बड़े हैं। कारण यह है कि खनिज विभाग जितनी रेत पकड़ रहा है उतनी मात्रा अपनी कार्रवाई में नहीं दिख रहा। जबकि पूरी रेत क्षेत्र के माफिया को सौंपी जा रही है। और वही रेत अवैध रूप से बेची जा रही है। खनिज विभाग पिछले एक महीने में 10 हजार डंपर से ज्यादा रेत पकड़ चुका है। लेकिन कार्रवाई में इतनी रेत दिखाई नहीं गई। इसका मतलब साफ है कि यह कार्रवाई माफिया के इशारे पर माफिया के लिए हो रही है।

प्रदूषण नियंत्रण, वन और खनिज की मिलीभगत

चांद क्षेत्र से निकलने वाली पेंच नदी में माचागोरा डैम से पानी छोड़ा जाता है। और इस क्षेत्र में पानी छोड़ने के बाद ही नदी में पानी का बहाव तेज होता है। लेकिन अभी उतनी मात्रा में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। एक जुलाई से रेत उत्खनन पर प्रतिबंध लग चुका है जो की 30 सितंबर तक लगा रहेगा। इन तीन महीना में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों के अनुसार नदियों से रेत का उत्खनन नहीं किया जा सकता। उसके बाद भी चांद क्षेत्र में बीसियों जगह से रेत निकाल कर अवैध कारोबार जारी है। आज भी प्रतिबंध के बाद रेत निकली जा रही है। लेकिन खनिज विभाग की कार्रवाई ना के बराबर है। इस मामले में वन विभाग भी शामिल है क्योंकि पेंच नदी का ज्यादातर क्षेत्र वन विभाग के अधीनस्थ आता है और जंगलों के अंदर से भी रेत का उत्खनन और परिवहन जारी है।

रेत का खेल…Avinash Singh
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