7 – 8 साल से एक ही रेंज, किसकी है मेहरबानी
कार्य आयोजना इकाई में तबादला केवल दिखावा
छिंदवाड़ा। वन और वन्य प्राणियों से समृद्ध छिंदवाड़ा की परवाह वन विभाग के अधिकारियों को नहीं है। पूरे जिले में जंगल कट रहे हैं आए दिन जिले की पहचान सागौन की तस्करी हर मार्ग से हो रही है। वन प्राणियों के शिकार हो रहे हैं। और वन विभाग महिला अधिकारियों पर मेहरबान है। कई अधिकारी फॉरेस्ट की एक रेंज से दूसरे रेंज में स्थानांतरित कर दिए गए लेकिन जिले की दो महिला रेंजर ऐसी है जो पिछले सात आठ सालों से एक ही रेंज में जमी हैं। उनका तबादला कार्य आयोजना शाखा में किया जाता है । लेकिन वह भी केवल दिखावे के लिए क्योंकि कार्य आयोजना शाखा में यह महिला अधिकारी जॉइनिंग तो दिखा देती है। लेकिन प्रभार में उसी रेंज में रहती है जिस रेंज में यह कई सालों से जमी हुई है। पहले परासिया रेंज की महिला रेंजर का तबादला कार्य आयोजना शाखा छिंदवाड़ा में किया गया । 2 साल तक वे वही पदस्थ रही लेकिन इन 2 सालों के दौरान भी परासिया रेंज का प्रभाव उन्हीं के पास रहा । वहीं अब सांवरी रेंज की महिला रेंजर का तबादला भी कार्य आयोजना शाखा में कर दिया गया है। लेकिन पिछले 7 साल से जमी इस महिला अधिकारी को भी रेंज से हटाने की कोई योजना फॉरेस्ट के आला अधिकारियों ने नहीं बनाई। इसका मतलब साफ है कि अब सांवरी रेंज की रेंजर भी कार्य आयोजना शाखा में पदस्थ रहते हुए सांवरी रेंज के प्रभार में रहेगी।
सालों से एक ही रेंज, बन गई एक दूसरे का पर्याय
जिले की दो महिला रेंजर सालों से एक ही रेंज में पदस्थ है और वन विभाग के अधिकारियों का उन्हें पूरा सहयोग और संरक्षण मिल रहा है। परासिया रेंज की रेंजर अलका भूरिया सन 2017-18 से परासिया रेंज में पदस्थ है उन्हें वहां लगभग 8 साल हो चुके हैं। इस बीच एक बार उनका तबादला कार्य आयोजना शाखा छिंदवाड़ा में किया गया। इस दौरान भी हल्का भूरिया परासिया रेंज के प्रभार में रही। यानी उनकी पदस्थापना तो कार्य आयोजना शाखा में दिखाई गई लेकिन रेंज से उनका नाता नहीं टूटा। या यूं कहे की काम वे परासिया में ही करती रही।

अब यही हाल सांवरी रेंज की रेंजर कीर्ति वाला गुप्ता का भी होने वाला है। रेंजर कीर्ति बाला गुप्ता भी सांवरी रेंज में लगभग 8 सालों से पदस्थ है। उन्हें अब तक हटाया नहीं गया। हाल ही में आए तबादला आदेश मैं रेंजर कीर्ति बाला गुप्ता का तबादला कार्य आयोजना शाखा छिंदवाड़ा कर दिया गया है। अब वे भी कार्य आयोजना शाखा में पदस्थ रहते हुए सांवरी रेंज की प्रभारी रहेंगी। आखिर किस अधिकारी की मेहरबानी है कि जिले की महिला अधिकारियों को सालों तक एक ही रेंज में रखा जा रहा है। जहां हालात यह है कि यह दोनों महिला रेंजर अपनी रेंज की पर्याय बन गई हैं। सबको पता है कि परासिया में कौन है और सबको पता है की सांवरी रेंज में कौन है। क्योंकि सालों से इन्हें हटाया ही नहीं गया सवाल उठता है क्यों?
सीसीएफ बदले, डीएफओ बदले लेकिन रेंजर नहीं बदली
छिंदवाड़ा जिले के वन विभाग में पिछले 10 सालों में सीसीएफ बदल गए डीएफओ बदल गए यहां तक की कई रेंजर्स का तबादला भी हो गया। लेकिन नहीं बदली तो केवल परासिया और सांवरी रेंज की महिला रेंजर । आखिर इन दोनों महिला अधिकारियों पर किसकी मेहरबानी है। यह मेहरबानी सरकार की तरफ से है या फिर अधिकारियों की तरफ से । क्योंकि सरकार के नियम के अनुसार तो किसी भी राजपत्रित अधिकारी को एक स्थान में 3 साल से ज्यादा रखना अनुचित है । और सरकारी नियमों के अनुसार उनका तबादला भी कर दिया जाता है। लेकिन यहां मामला अलग है ऐसा कौन सा अधिकारी है जो इन महिला रेंजर्स का तबादला दूसरी रेंज में नहीं होने दे रहा। अब इस बात की पड़ताल दिव्य भारत समाचार करेगा। जल्दी इस बात का खुलासा होगा कि आखिर क्या है महिला रेंजर्स के एक ही रेंज में जमे होने की कहानी ?
Episode 2- किसकी मेहरबानी से एक ही रेंज में जमी है महिला रेंजर।
फॉरेस्ट फाइल्स… Avinash Singh
9406725725/7697930555









