आदिवासियों को भड़काने झूठी कहानी का षड्यंत्र
दिव्य भारत समाचार ने किया था दावा, झूठा है मामला
छिंदवाड़ा। हर्रई के तुईयापानी के एक ढाबे में हुई मारपीट के मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब शिकायत करता घटना के दो दिन बाद यह कहने लगा कि उसे पेशाब पिलाई गई और उसके मुंह पर थूका गया । इस मामले ने पुलिस और जिला प्रशासन सहित पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया। लेकिन दिव्य भारत समाचार ने जब पड़ताल की तो पता चला कि यह पूरा मामला झूठा है। और आदिवासियों को भड़काने के लिए इस मामले की कहानी को बदला गया है। ढाबे में मारपीट के इस मामले में जहां फरियादी आदिवासी थे तो कुछ लोगों ने झूठी कहानी बनाकर इस मामले को तूल देने का प्रयास किया । यह मामला तब खुला जब एक कॉल रिकॉर्डिंग हर्रई – अमरवाड़ा क्षेत्र में वायरल हुई। जिसमें इस पूरे कांड में पहले दिन से शामिल एक ग्रामीण ने पेशाब कांड का पूरा सच उगल दिया।
दरअसल हर्रई क्षेत्र के तुईयापानी स्थित ढाबे में कर्मचारी और ढाबा संचालक के बीच विवाद के चलते कुछ आदिवासी युवकों के साथ मारपीट की गई। इस मामले की शिकायत भी हुई और पुलिस ने तत्काल प्रकरण भी दर्ज कर लिया। लेकिन दो दिन बाद अचानक मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब शिकायतकर्ता ने एक वीडियो जारी कर बताया कि उसके मुंह पर पेशाब की गई है और थूका गया है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने लगे। दो दिन तक इस पूरे मामले में क्षेत्र के आदिवासियों ने धरना प्रदर्शन और आंदोलन किया। आंदोलनकारियों ने आदिवासी अस्मिता को ठेस पहुंचाने वाली इस घटना पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लेकिन मामला कुछ और ही था जो ऑडियो रिकॉर्डिंग के वायरल होने के बाद खुला।
पेशाब कांड का सच सुने कॉल रिकॉर्डिंग 👇
आदिवासियों को भड़काने बनाई झूठी कहानी !
जिले के भोले वाले आदिवासियों को अक्सर भड़का कर आंदोलन करने का सिलसिला पिछले कई महीनो से चल रहा है। पहले मुकदम सरकार के नाम पर कुछ लोगों ने अपनी रोटियां सेंकने का प्रयास किया तो अब आदिवासी समुदाय को झूठी कहानी बनाकर भड़काने का प्रयास किया जा रहा है । यहां भी कई लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ इस मामले में भी हुआ। मारपीट के प्रकरण को दूसरा रंग देने के लिए एक कहानी बनाई गई और उस कहानी में शिकायतकर्ता को भी शामिल कर लिया गया। जिसके चलते शिकायतकर्ता को थाने में शिकायत के 2 दिन बाद एक वीडियो में यह कहते सुना गया कि उसके मुंह पर पेशाब की गई है। ताकि आदिवासी समुदाय इस कांड से भड़क जाए और सरकार और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने सड़कों पर उतरने लगे। इसी तरह से झूठी कहानियों के सहारे नक्सलवाद और अन्य सरकार विरोधी संगठनों की उत्पत्ति होती है। समय रहते हैं ऐसे मामलों को रोका नहीं गया तो भोले भाले आदिवासियों को भड़का कर सरकार विरोधी गतिविधियां जिले में भी शुरू हो जाएगी।
आदिवासि संस्कृति में है सामाजिक दंड का प्रावधान
छिंदवाड़ा जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है और यहां हर्रई, जुन्नारदेव, तामिया और बिछुआ पूरी तरह से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। इन सभी क्षेत्रों में आदिवासियों की अलग-अलग संस्कृति और परंपराएं हैं। जो अन्य समाज और हिंदू धर्म से भी अलग हैं। आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति संवेदनशील होता है। जिस तरह की कहानी हर्रई वाले मामले में गढ़ी गई। ऐसी घटना यदि किसी आदिवासी के साथ घटित होती हैं, तो आदिवासी परंपरा के अनुसार वह आदिवासी व्यक्ति को भी दोषी माना जाता है। आदिवासी परंपरा के अनुसार उस व्यक्ति पर भी सामाजिक दंड दिया जाता है । यह दंड कई तरह का हो सकता है , जैसे सामाजिक भोज या समाज से बेदखल करना या समाज में मिलाने के लिए किसी तरह का आयोजन करने का दंड देना । अलग-अलग जगह पर आदिवासियों की संस्कृति और परंपराओं में इसके लिए अलग-अलग प्रावधान होते हैं। यही कारण है कि ऐसी किसी घटना के होने पर पूरा आदिवासी समाज एकजुट होकर इसका विरोध करता है । ताकि आदिवासियों की संस्कृति पर किसी भी तरह का हमला न हो।
बिहाइंड द सीन…Avinash Singh
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