5 महीने में 170 से ज्यादा लोगों ने गंवाई अपनी जान
एक महीने से आधी रात हादसे रोकने पुलिस के प्रयास
छिंदवाड़ा / पांढुर्णा । सड़क पर तेज रफ्तार गाड़ियां और अंधा धुंध हादसे जिनमें सैकड़ो लोगों की जान हर साल जाती है। इस बार भी केवल 5 महीने में 170 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान सड़क का हादसों में गवा दी। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है ? जिन लोगों की जाने जा रही है उनके परिवारजन केवल अफसोस ही कर पा रहे हैं । लेकिन इन हादसों का कारण कहीं ना कहीं प्रशासनिक लापरवाही और तेज रफ्तार है। हादसों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हम खुद है। जो खुद की परवाह किए बगैर शराब पीकर वाहन चला रहे हैं तो कहीं रफ्तार पर हमारा नियंत्रण ही नहीं है। पुलिस लाख प्रयास कर ले लेकिन हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे। आलम यह है कि पिछले 5 महीने में 170 लोगों से ज्यादा जान गई और सैकड़ो घायल हो गए। कई महत्वपूर्ण कारण है जो हादसों में होने वाली मौतों को नहीं रोक पा रहे हैं।
वर्तमान में सड़क हादसे सबसे बड़ी समस्या बने हुए हैं। शहर के चारों तरफ जिले के चारों मार्गों पर सड़क हादसे हो रहे हैं । और इन हादसों में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले 4 महीने में जहां अब तक 426 हादसे हो चुके हैं। वही 5 महीना में मरने वालों के आंकड़े 170 से ज्यादा हो चुके है और लगभग साढे 500 से ज्यादा लोग घायल हैं। कई तो अभी भी अस्पताल में पड़े हुए हैं। यह स्थिति इतनी भयावह है कि बिना किसी वजह से लोगों की जाने जा रही हैं। हादसे क्यों हो रहे है इसके बारे में हमको खुद को सोचना जरूरी है। कि कहीं हम नियमों की अनदेखी करके खुद की जान खतरे में तो नहीं डाल रहे हैं। और क्या इन हादसों के लिए हम खुद जिम्मेदार है ?
रफ्तार ने पार की हद…दोपहिया भिड़ंत में 5 मौत
वाहनों की रफ्तार ने हद पार कर दी है। चौपाइयां वाहनों की रफ्तार और बड़े यात्री वाहनों में हादसों में मरने वालों की संख्या ज्यादा हो तो किसी का ध्यान नहीं जाता। लेकिन जब दो दो पहिया वाहन आपस में भिड़े और मरने वालों की संख्या पांच हो तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं । बड़ी बात यह है कि जिले के अमरवाड़ा क्षेत्र में हुआ यह हादसा इतना भीषण था कि आज तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी इसकी चर्चा कर रहे हैं कि आखिर दो मोटरसाइकिल भिड़ी और 5 लोगों की मौत कैसे हो गई। इन दो वाहनों में पांच लोग सवार थे । एक वाहन में दो लोग थे और दूसरे वाहन में तीन लोग थे। पांचो की मौत हो गई और पांचो में से किसी ने भी हेलमेट नहीं लगाया था। आखिर इन पांच मौतों का जिम्मेदार कौन है। किसके सिर पर इस भीषण सड़क हादसे का ठीकरा फोड़ा जाना चाहिए यह बात समझ से पड़े।
इंजीनियरिंग फॉल्ट…परासिया रोड पर नदी में गिरा डंपर तो बनाए ब्रेकर
छिंदवाड़ा – परासिया रोड बनाने वाला नेशनल हाईवे एक बार पूरी इमानदारी से परासिया से लेकर छिंदवाड़ा तक सड़क जांच कर लें तो उस समय के जिले में मौजूद सभी नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर की नौबत आ जाए। इसका कारण यह है कि 28 किलोमीटर के इस मार्ग में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने ठेकेदार के इशारों पर काम किया। जिन रास्तों को सीधा किया जाना था वहां पर ऐसे मोड़ है कि वाहन की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा भी हो तो भी वहां सीधा खाई में गिर जाए । और यह कोई एक जगह नहीं है लगभग 10 ऐसे स्पॉट है जिन्हें ब्लैक स्पॉट करार दिया जाना चाहिए । हाल ही में रविवार को परासिया रोड पर एक डंपर सड़क के मोड पर नदी में गिर गया । तब जाकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने आनन – फानन में इस जगह पर स्पीड ब्रेकर बनाएं । जबकि इस मार्ग पर यह स्थिति कई जगह है जहां रोड सीधी होने की बजाय इतनी घुमावदार है की चालक सजग न रहे तो हादसा होना तय है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने ठेकेदार को टोल वसूलने की जिम्मेदारी तो सौंप दी लेकिन सड़क की जांच करना भूल गए की सड़क सही बनाई भी गई है या नहीं।
प्रयास : आधी रात शहर के बाहर पुलिस कर रही हेलमेट की जांच
सड़क हादसों की लगातार बढ़ती संख्या और इन हादसों में होने वाली मौतों को लेकर पुलिस अधीक्षक अजय पांडे ने गंभीरता से पूरे जिले की पुलिस को हेलमेट के लिए लोगों को सजक करने निर्देशित किया है। यहां तक की पुलिस कप्तान ने रात में शहर और ग्रामीण क्षेत्र के बाहर पुलिस को तैनात कर लगातार हेलमेट चेकिंग करने के निर्देश दिए है। पुलिस यह काम कर भी रही है उसके बाद भी लोग सजग नहीं हो पा रहे हैं। पुलिस कप्तान के इन प्रयासों से कुछ हेलमेट दिखने तो लगे लेकिन फिर भी वह काफी नहीं है। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रफ्तार कम करने का प्रयास किया है। उसके बाद भी लोग तेज रफ्तार से चल रहे और या रफ्तार एक गंभीर समस्या बनती जा रही है।
हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं…सरकारी कार्यालयों में बिना हेलमेट एंट्री ?
3 दिन पहले कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने अधिकारियों की बैठक लेकर निर्देश दिए की सड़क हादसे रोकने और सड़क हादसों में होने वाली मौतों के आंकड़े कम करने के लिए पेट्रोल पंप पर हेलमेट का नियम सख्ती से लागू किया जाए । जो भी दो पहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के पेट्रोल भरने जाए उसे पेट्रोल ना दिया जाए। यह एक अच्छा प्रयास है । लेकिन कहीं ना कहीं यह प्रयास अधूरा है। कलेक्टर कार्यालय में हर दिन 500 से ज्यादा कर्मचारी दोपहिया वाहनों से आते हैं । और कोई भी कर्मचारी हेलमेट नहीं लगता । क्या शासकीय कार्यालय में हेलमेट के अनिवार्यता को लागू नहीं किया जाना चाहिए। अगर ऐसा किया जाता है तो निश्चित रूप से शहर में हेलमेट पहनकर दो पहिया वाहन चलाने वालों की संख्या बढ़ जाएगी ।और लोग इससे जागरूक भी होंगे। कलेक्टर कार्यालय में न सिर्फ शासकीय अधिकारी कर्मचारी आते हैं बल्कि पूरे जिले से लोग कलेक्टर कार्यालय में आते हैं । सभी के लिए शासकीय कार्यालय में हेलमेट पहनकर ही दो पहिया वाहनों को एंट्री दी जानी चाहिए । ऐसा अक्सर आर्मी और एयरफोर्स के कार्यालय में देखने को मिलता है । जिसे जिला स्तर पर भी लागू किया जा सकता है।
रफ्तार…Episode -1
⛑️ चिंतनीय… Avinash Singh
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