Home जिला मोती की खेती कर देश की फार्म लेडी बनी चंचल भार्गव

मोती की खेती कर देश की फार्म लेडी बनी चंचल भार्गव

जवाहर लाल नेहरू कृषि अनुसंधान केंद्र में मोतियों की सफल खेती

चंचल भार्गव को मिला फार्म लेडी का सम्मान, सरकार ने सराहा

छिंदवाड़ा। जिले में 3 साल से हो रही मोतियों की खेती की सफलता के बाद जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में पदस्थ चंचल भार्गव इस खेती के लिए फार्म लेडी के के नाम से नवाजी गई हैं। चंचल भार्गव पर एक डॉक्यूमेंट्री डीडी चैनल ने भी प्रसारित की है । दरअसल पिछले 3 सालों से इस परियोजना की प्रभारी चंचल भार्गव जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय और भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र के माध्यम से मोतियों की खेती कर रही है। और 3 वर्षों में वह इस खेती में सफल भी हुई है। 18 से 22 महीना में की जाने वाली इस खेती से खासा मुनाफा देखकर सरकार ने इसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी चंचल भार्गव को दी है। जिसके तहत अब महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से जिले में मोतियों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। चंचल भार्गव की इस मेहनत और लगन की सराहना भारत सरकार ने भी की है। इसका कारण यह है कि मोतियों की खेती से जिले में एक नए रोजगार की संभावना भी उत्पन्न हुई है। जो खास तौर से महिलाओं के लिए आय का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली से वर्ष 2019-20 में आदिवासी उपयोजना प्राप्त कर 18-22 महीने के अंतराल में पहली मोती की फसल हार्वेस्ट की गई। जिसमें केंद्र को अच्छा मुनाफ़ा प्राप्त हुआ। इस वर्ष केंद्र में पुनः मोती की फ़सल हेतु बीज तालाब में डाले गए हैं । आने वाले 18-22 महीने की अवधि में पुनः केंद्र को चमचमाते हुए डिजाइनर मोती प्राप्त होंगे।

ऐसे होती है मोतियों की खेती….देखें वीडियो👇

महिला स्व सहायता समूह को भी किया खेती के लिए प्रेरित

2019-20 से लेकर अब तक मोतियों की खेती के सफल प्रयोग और का से मुनाफे को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब इसे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जोड़ दिया है जिसके तहत जिले में महिला स्वाहटा समूहों के माध्यम से मोतियों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है इसी के तहत केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ज़िला कलेक्टर शीलेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में ग्राम पालाचौरई विकासखंड जुन्नादेव की महिला स्व सहायता समूह की दीदियो द्वारा भी केंद्र से प्रेरित होकर मोती की फसल डाली गई है। परियोजना प्रभारिक चंचल भार्गव के मार्गदर्शन में पालाचौरई में अब मोतियों की खेती होगी। फिलहाल यहां बीज डाले गए हैं जो आगामी 18 से 22 महीने में तैयार होंगे।

डिजाइनर मोती कर रहे तैयार, ऐसे बनते हैं मोती

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में मोतियों की खेती का काम पिछले 3 सालों से चल रहा है। मोतियों की खेती करने के लिए पहले सीप या मसल्स को तैयार किया जाता है । और उसके बाद इन सीपों में अलग-अलग आकार के डिजाइन डाले जाते हैं । लगभग 18 से 22 महीना में इन सीपों में डाले गए डिजाइन में मोती तैयार होते हैं। दरअसल मोती के अलावा अब छिंदवाड़ा में इन सीपों में डिजाइनर मोती तैयार हो रहे हैं। जिन्हें मोती कहना ठीक नहीं होगा यह डिजाइनर पेंडेंट जैसे हैं । और बाजार में इनका प्रचलन भी ज्यादा हो रहा है। मोती के बनने की सामान्य प्रक्रिया यह है कि सीप या मसल्स में किसी बाहरी वस्तु के जाने से मोती का निर्माण होता है। और इसी प्रक्रिया के तहत अनुसंधान केंद्र में सीपों के अंदर डिजाइनर सांचे डाल दिए जाते हैं। जिनके अंदर अलग-अलग आकार और आकृतियों के मोती तैयार हो जाते हैं।

पॉजिटिव न्यूज…अविनाश सिंह
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