दीपक सक्सेना के कहने पर भाजपा में शामिल हुए थे अमित
भैया को ही नहीं मिला निगम, भतीजे की टिकट के कई दावेदार
छिंदवाड़ा। लोकसभा चुनाव 2024 मैं छिंदवाड़ा जिला कांग्रेस में मचा घमासान और कांग्रेसी नेताओं की भाजपा में एंट्री के नतीजे अब चुनाव के 2 साल बाद दिखाई देने लगे हैं। लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा नेताओं ने जितने वादे करके कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं से लेकर छोटे नेताओं तक को भाजपा में शामिल किया था। और लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की थी उन वादों की कलई खुलने के बाद अब कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं में असंतोष दिखाई देने लगा है। जो नेता भारी भरकम वादों के साथ कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए और अजेय कमलनाथ को गिराने में भाजपा का पूरा साथ दिया । अब उन्हीं नेताओं से भाजपा की वादा खिलाफी भारी पड़ने लगी।
हाल ही में कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे कांग्रेस से पूर्व मंत्री बैजनाथ सक्सेना के लड़के और कमलनाथ के बड़े करीबी रहे अमित सक्सेना ने अपनी वर्तमान पार्टी भाजपा और सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। जिसके चलते अमित सक्सेना को जिला भाजपा अध्यक्ष शेषराव यादव ने नोटिस जारी किया है। अमित सक्सेना भी उन्हीं कद्दावर कांग्रेस नेताओं में शामिल है जो लोकसभा चुनाव के पहले कमलनाथ का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। हालांकि अमित सक्सेना खुद की मर्जी से भाजपा में शामिल नहीं हुए।
बल्कि बड़े भाई दीपक सक्सेना के कहने पर उन्होंने कमलनाथ का साथ छोड़ा था। लेकिन अब कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं की जो हालात बन गई है। उसके चलते अमित सक्सेना का असंतोष आंदोलन के जरिए दिखाई देने लगा है। अमित सक्सेना ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने के साथ-साथ फसलों के नुकसान किसानों की समस्याएं इन मुद्दों को लेकर अपनी ही वर्तमान पार्टी बीजेपी और सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
अमित सक्सेना के आंदोलन से लग सकती है भाजपा में बड़ी सेंध

इस पूरे घटनाक्रम में पिछले लगभग 1 महीने से अमित सक्सेना अपने क्षेत्र में लगातार दौरे कर रहे हैं । और बारिश कम होने के कारण किसानों को हुए नुकसान के साथ-साथ जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग भी अमित सक्सेना कर रहे हैं। इसके अलावा सबसे बड़ा मुद्दा चौखड़ा में बनने वाला न्यूक्लियर पावर प्लांट का है । जिसके रेडिएशन को लेकर अमित सक्सेना ने पूरे क्षेत्र के किसानों के साथ-साथ कई भाजपा और कांग्रेस के नेताओं को अपने साथ शामिल कर लिया है। अमित सक्सेना का यह काम सीधे-सीधे सरकार के खिलाफ दिखाई दे रहा है।
हालांकि उनका कहना है कि वह जिले के जनप्रतिनिधि है और जिला पंचायत के उपाध्यक्ष होने के कारण उनकी जिम्मेदारी किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं को उठाना है। इसके बाद भी जिला भाजपा अध्यक्ष शेषराव यादव ने अमित सक्सेना को कारण बताओं नोटिस जारी कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। अब देखना यह है कि 13 अक्टूबर को आंदोलन करने पर अड़े अमित सक्सेना पीछे हटते हैं या फिर भाजपा और सरकार के खिलाफ खुलकर सामने आते हैं। आंदोलन होता है तो अमित सक्सेना का यह कदम भाजपा में बड़ी सेंध लगा सकता है। क्योंकि कांग्रेस से आयात नेता भाजपा में ज्यादा खुश नहीं है और कहीं ना कहीं वापस कांग्रेस की तरफ आस लगाए बैठे है।
दीपक सक्सेना को नहीं मिला निगम, बेटे की टिकट असंभव !
लोकसभा चुनाव मैं कमलनाथ का गढ़ तोड़ने के लिए भाजपा ने हर संभव कोशिश की। मध्य प्रदेश के बड़े-बड़े नेता प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव कई बार छिंदवाड़ा आए। इस दौरान कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ-साथ कमलनाथ के सबसे करीबी और 45 साल के साथी दीपक सक्सेना को भी चारों तरफ से घेर कर तोड़ लिया गया। दीपक सक्सेना को उनके बेटे अजय चुनमुन सक्सेना के लिए छिंदवाड़ा विधानसभा की टिकट और खुद के लिए निगम में शामिल कर राज्य या कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने के तथाकथित वादे किए गए। लेकिन जैसे ही लोकसभा चुनाव संपन्न हुए भाजपा की सरकार बनी। उसके बाद मध्य प्रदेश की राजनीति बिल्कुल बदल गई।
जो वादे कांग्रेस के नेताओं से किए गए आज 2 साल बाद भी उन बातों को पूरा नहीं किया गया। नगर निगम बर्बाद हो गया। शहर के लिए रुपए सरकार नहीं भेज रही। ऐसे कई मामले हैं जिनसे कांग्रेस से भाजपा में गए नेता अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। इसके साथ ही छिंदवाड़ा जिले में भी भाजपा के पदाधिकारी और सत्ता के पदाधिकारी में मतभेद है। मतलब साफ है कि लोकसभा चुनाव के पहले जो भी वादे किए गए थे। उन्हें पूरा करने का कोई भी इरादा मध्य प्रदेश भाजपा संगठन या सरकार नहीं रखती। अब देखना है कि अमित सक्सेना की लड़ाई कहां तक पहुंचती है।
राजनीति छिंदवाड़ा… Episode 01
Avinaash Siingh
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