Home अपना शहर शुक्ला ग्राउंड स्टोरी पार्ट 3 : 2025 तक जैन समाज के नाम...

शुक्ला ग्राउंड स्टोरी पार्ट 3 : 2025 तक जैन समाज के नाम दर्ज थी जमीन !

सन्मति शिक्षण संस्थान से अचानक नगर निगम का नाम हो गया दर्ज

35 साल में जो काम नहीं हो सका, वो महज एक साल में कैसे हुआ

छिंदवाड़ा। सम्मत सागर जी महाराज की मंशा अनुरूप शुक्ला ग्राउंड की जमीन में से खरीदी गई 20 हजार वर्ग फुट भूमि पर एक जैन धर्म का शिक्षण संस्थान स्थापित किया जाना था । जिसमें सामान्य शिक्षा के साथ-साथ जिन धर्म की शिक्षा भी बच्चों को दी जानी थी। यह जमीन 1989 में खरीदी गई और तब से लेकर 2025 तक यह जमीन सन्मति शिक्षण संस्थान के नाम पर ही दर्ज रही। लेकिन अचानक 2025 में दस्तावेजों में बड़ी हेयर फेर की गई। और इस हेर फेर के चलते 35 साल में जो काम नहीं हो सका । वह काम महज एक साल में हो गया। और 2025 में राजस्व दस्तावेजों से सन्मति शिक्षण संस्थान की 20 हजार वर्ग फुट जमीन को नगर निगम के नाम चढ़ा दिया गया। इतना बड़ा हेर फेर अचानक नहीं हुआ। जिसमें कई रसूखदार शामिल है। यह खेल जितना सामान्य दिखाई दे रहा है । उससे भी कहीं ज्यादा बड़ा है। क्योंकि जमीन जैन समाज ने खरीदी थी। जिसका उपयोग जैन समाज की भलाई के लिए किया जाना था। लेकिन कुछ लोगों ने इस पूरे मामले में समाज को धोखे में रखकर करोड़ों की मलाई खा ली। और अपने इसी कर्मकांड को छुपाने के लिए राजस्व दस्तावेजों में बड़े हेर फेर किए गए।

किसने किया खेल, क्या सिर्फ़ नगर निगम शामिल ? 👇

क्या नगर निगम ने हड़पी जमीन…नहीं, भू माफिया शामिल

शुक्ला ग्राउंड की 20 हजार वर्ग फुट जमीन जो की सन्मति शिक्षण संस्थान के नाम पर दर्ज थी। इस जमीन को नगर निगम के नाम पर चढ़ाने के लिए पिछले 35 सालों में पहले नगर पालिका और फिर नगर निगम ने कई बार प्रयास किया। लेकिन यह प्रयास इसलिए सफल नहीं हो पाए क्योंकि सन्मति शिक्षण संस्थान कि इसमें कोई सहमति नहीं थी । ना ही किसी तरह की अनुमति अनुमति शिक्षण संस्थान ने दी थी। एक तरफा कार्रवाई नहीं हो सकती थी और सहमति और अनुमति की आवश्यकता थी। इसलिए राजस्व अधिकारियों ने पिछले 35 साल में कभी भी दस्तावेजों से छेड़छाड़ नहीं की। यही कारण है कि 2025 तक राजस्व दस्तावेजों में इस जमीन पर सन्मति शिक्षण संस्थान का ही नाम दर्ज रहा।

अचानक 2025 में भू माफिया ने ऐसा कौन सा खेल खेला जिसके चलते अचानक जमीन नगर निगम के नाम स्थानांतरित कर दी गई। यहां सबसे बड़ा सवाल जो आपके जेहन में उठ रहा है वह यह है कि इस पूरे मामले में जैन समाज की जमीन को नगर निगम ने हड़पा है।लेकिन यह पूरा मामला जितना सामान्य दिख रहा है ! उतना सामान्य नहीं है । इस पूरे खेल के पीछे शहर के बड़े भू माफिया शामिल है । जिसकी इबारत 35 साल पहले ही लिख दी गई थी । और इन भू माफिया ने जैन समाज की इस भूमि के नाम पर करोड़ों रुपए का मुनाफा भी कमाया है। जिसका खुलासा आने वाले दिनों में किया जाएगा। फिलहाल राजस्व दस्तावेजों की हेर फेर बड़ा विषय है। कि अचानक तहसीलदार ने बिना किसी आवेदन के किसके कहने पर दस्तावेजों में हेर फेर की, क्योंकि यह मामला फ्रॉड से भी जुड़ा हुआ है।

पूरे समाज के रुपये लगे, रजिस्ट्री हुई फिर भी जमीन कर दी गायब

सम्मत सागर जी महाराज के कहने पर छिंदवाड़ा जिले के जैन समाज ने 56 हजार रुपए की राशि एकत्रित की । यह रुपए किसी एक व्यक्ति ने नहीं दिए बल्कि पूरे समाज ने चंदा करके इस जमीन के लिए यह रुपए जमा किए। 20 हजार वर्ग फुट जमीन खरीदी गई। जमीन की रजिस्ट्री सन्मति शिक्षण संस्थान के नाम पर हुई। और एक संकल्प लिया गया कि इस जमीन पर एक शिक्षण संस्थान बनाया जाएगा । लेकिन अचानक जमीन गायब हो गई । पिछले 35 सालों में किसी को नहीं पता कि जैन समाज की एक भूमि शुक्ला ग्राउंड की भूमि में शामिल है। इन 35 सालों में जैन समाज के कई बुजुर्ग नहीं रहे, और कई युवा आ गए और कहानी ओझल हो गई। लेकिन भू माफिया का यह खेल आखिर सामने आना ही था। क्योंकि जो जमीन खरीदी गई वह एक संत के कहने पर खरीदी गई थी। एक बहुत पवित्र मंशा के लिए इस जमीन को खरीदा गया था । फिर इस जमीन पर किया जाने वाला खेल उजागर तो होना ही था । लेकिन अभी इसमें कई पार्ट बाकी है । जिनमें उन भू माफियाओं का भी खुलासा होगा जिन्होंने एक महान संत की मंशा को पलीता लगा दिया और पूरे समाज को धोखा दिया।

बिहाइंड द सीन…Avinaash Siingh
9406725725/7697930555