नगर निगम के इंजीनियर, ठेकेदार पर एफआईआर क्यों नहीं ?
यह सामान्य नहीं, एक परिवार की पूरी खुशियां ही उजड़ गई
छिंदवाड़ा। गुरुवार को शहर में अल सुबह हुआ एक हादसा दिनभर चर्चाओं मे रहा। चर्चा एक ही थी की दो महिलाएं अपने स्कूटर से योगा क्लास जा रही थी। और अचानक रास्ते पर पड़ी गिट्टी से फिसल कर उनका वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पीछे से आ रहे ट्रक की चपेट में एक महिला आ गई। यह महिला शहर के संभ्रांत परिवार की महिला थी। जिनके दोनों बच्चे बाहर रहते हैं और वह अपने परिवार की एक धूरी थी। जिसे पूरा परिवार चलता था। इस महिला की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा की क्या यह सिर्फ एक हादसा है ? या फिर शहर वासियों के साथ विकास, स्वच्छता, और सुविधाओं के नाम पर किया गया षड्यंत्र है। जहां एक तरफ एक पुलिया का निर्माण पिछले 7 महीने से चल रहा है। लोग इस जगह से बचकर निकल रहे है। लेकिन एक महिला आखिरकार गुरुवार की अल सुबह अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योगा क्लास जाने के लिए निकली और इस निर्माणाधीन पुलिया का शिकार हो गई।
क्या इस हादसे की जिम्मेदारी केवल उस ट्रक ड्राइवर की है जिसकी चपेट में महिला आई। या फिर हादसे की वजह भी इसके लिए जिम्मेदार है। यह सवाल अब हर शहरी के लिए सोचना जरूरी हो गया है।जिस तरह से शहर में निर्माण कार्य शुरू किए जाते हैं और फिर महीनो तक निर्माण कार्यों को करने का दिखावा किया जाता है। यह बात शहर में आम हो गई है। शहर के लगभग हर क्षेत्र में इस तरह की निर्माण संबंधी समस्याएं सामने आ रही है। लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन ने काम किया तो सालों चला रहा आज तक सीवरेज सिस्टम सही नहीं हो पाया। हर जगह समस्याएं है। यहां तक की दो दिन पहले पार्षदों ने नगर निगम की बैठक में हंगामा तक कर लिया। लेकिन नतीजा वही है। आखिर शहर के विकास की गति इतनी धीमी क्यों है एक पुलिया का निर्माण जो केवल 15 दिनों में पूरा हो जाना चाहिए था। उस पुलिया के निर्माण में 7 महीने लग गए और अब तक एक तरफ ही निर्माण हो पाया है। इसके अलावा पूरा मलवा सड़क पर बिखरा हुआ है। इसकी जिम्मेदारी किसकी है निगम के इंजीनियर कहां है, कमिश्नर क्या मॉनिटरिंग कर रहे हैं। और ठेकेदार क्या काम कर रहे हैं।
हादसे के लिए नगर निगम जिम्मेदार एफआईआर क्यों नहीं ?
नरसिंहपुर रोड पर हुआ यह हादसा केवल एक हादसा नहीं, सही मायने में देखा जाए तो उस ट्रक ड्राइवर का दोष सिर्फ इतना है कि वह महिलाओं के पीछे-पीछे चल रहा था। वरना यह मामला तेज रफ्तार या लापरवाही से गाड़ी चलाने का बिल्कुल नहीं है। यह मामला तो है उस वजह का जिसकी वजह से हादसा हुआ। सड़क पर चल रहे उस निर्माण कार्य का मलबा पूरी सड़क पर बिखरा हुआ था। लोगों की मजबूरी है कि उस मलबे के ऊपर से जाए या बड़ी सावधानी से बचकर निकले। सुबह-सुबह कड़कड़ाती ठंड में निकली महिलाएं आखिरकार उसे मलबे की चपेट में आ ही गई। जिसकी जिम्मेदार पूरी तरह से नगर निगम है। लेकिन पुलिस ने इस पूरे मामले में प्रकरण केवल ट्रक ड्राइवर पर दर्ज किया है।
जबकि इस हादसे के लिए नगर निगम के महापौर, कमिश्नर, इंजीनियर और निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार पूरी तरह से इस हादसे के लिए जिम्मेदार है । जो 7 महीने में भी एक छोटी सी पुलिया का काम शहर में नहीं कर पाए। इसके अलावा निर्माण संबंधी नियमों का पालन करना भी ठेकेदार ने उचित नहीं समझा। ना सेफ्टी फीचर्स निर्माण कार्य स्थल पर लगे हुए हैं । ना यहां मालवा सही तरीके से रखा हुआ है। बल्कि गिट्टी पूरी सड़क पर फैली हुई है। यह देखने की जिम्मेदारी नगर निगम की है ना कि उसे ट्रक ड्राइवर की जो किस्मत के फेर में इस हादसे की चपेट में आ गया। इस पूरे मामले में पूरी तरह से नगर निगम जिम्मेदार है। और नगर निगम के वह पदाधिकारी, अधिकारी और ठेकेदार जिम्मेदार है जिन्होंने निर्माण कार्य में लापरवाही बरती है। इसलिए एफआईआर उन पर भी होनी चाहिए।
घूस लेकर निर्माण की अनुमति फिर आंख बंद, चल रही मनमानी
नगर निगम ने पूरे शहर के यही हाल हैं। चाहे मामला नगर निगम के द्वारा कराया जा रहे निर्माण कार्यों का हो। या मामला निजी भवनों और मल्टी स्टोरी बिल्डिंग का हो । हर तरफ सड़क पर मालवा बिखरा पड़ा है। नगर निगम के अधिकारी रुपए लेकर नक्शा पास करने और निर्माण की अनुमति देते हैं। उसके बाद अपनी आंखें बंद कर लेते हैं। पूरे शहर के हाल यह है कि निर्माण कार्यों के दौरान जिन सुरक्षा और सुविधाओं का ख्याल रखा जाना चाहिए। वह बिल्कुल नहीं रखा जा रहा । शहर में बन रही हर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के सामने सड़क पर मालवा पड़ा है। रेत और गिट्टी पड़ी है। बच्चे और बच्चियों स्कूल और ट्यूशन आने जाना इस जगह से कर रहे हैं।
वे कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। यह जिम्मेदारी नगर निगम की है कि निर्माण की अनुमति देने के बाद वहां का सुरक्षा विजिट भी किया जाना चाहिए। बाकायदा इस बात के लिए पूरा इंजीनियर उसे क्षेत्र के लिए तैनात रहता है। लेकिन इंजीनियर साहब को तो केवल रुपयों से मतलब है। बाकि जनता जाए तेल लेने हादसे हो लोग मरे या ट्रैफिक जाम हो। इस बात से नगर निगम का कोई लेना देना नहीं है। बड़ी विडंबना है कि छिंदवाड़ा जैसे स्वच्छ और व्यवस्थित शहर में आज नगर निगम के यह हाल है कि वह सुरक्षा और सुविधाओं का ध्यान तक नहीं रख पा रही है।
अंधेर नगरी चौपट राजा… Avinash Singh
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