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भाजपा नेताओं की जेल में भी मौज, अस्पताल के जेल वार्ड में उड़ा रहे दावत !

दिन भर मेलमिलाप का चल रहा सिलसिला, आराम फरमा रहे नेता

अस्पताल में साफ सुथरा चादर तकिया, और घर का खाना भी

छिंदवाड़ा। उत्तर प्रदेश और बिहार बाहुबली नेताओं और यूपी बिहार में सत्ता के संरक्षण में पल रहे गुंडों को जेल में मिलने वाली सुविधाओं के लिए बदनाम है। लेकिन अब ऐसी ही सुविधा छिंदवाड़ा जैसे छोटे शहर में भी नेताओं को मिल रही है। भाजपा के जिन नेताओं को न्यायालय सजा सुना रहे हैं और जेल भेजने के आदेश जारी कर रहे हैं। उन नेताओं को जेल की बजाय जिला अस्पताल के जेल वार्ड में पूरी सुख सुविधा के साथ एडमिट रखकर मौज कराई जा रही है। वह भी शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी मामूली बीमारियों के लिए । जिन में दवा शुरू होते ही कुछ घंटे में ही आराम लग जाता है। ऐसी बीमारी का बहाना बना कर नेताओं को जिला अस्पताल के जेल वार्ड में साफ सुथरा चादर – तकिया के साथ पूरी पुलिस सुरक्षा के बीच रखा जा रहा है । यह पुलिस सुरक्षा उन कैदियों के लिए नहीं है जो जेल वार्ड में भर्ती है। यह पुलिस सुरक्षा है मीडिया के लिए जो उस जेल वार्ड के फुटेज और नेताओं की गतिविधियों पर नजर ना रख सके। अब छिंदवाड़ा में भी यूपी बिहार की तर्ज में इस तरह की सुविधा मिलने लगी है। दरअसल 5 दिन पहले अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने भाजपा नेता अंशुल शुक्ला और भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के नेता अरविंद प्रताप सिंह को उनके दो साथियों के साथ जेल भेजने का आदेश जारी किया। लेकिन नेताओं को जेल की बजाय जिला अस्पताल के जेल वार्ड में रखा गया है।

देखिए कैसे जेल वार्ड में चल रही नेताओं की मौज 👇

डॉक्टर का कहना है कि भाजपा नेता अंशुल शुक्ला, भाजपा नेता अरविंद प्रताप सिंह और उनके एक अन्य साथी को घबराहट , शुगर और बीपी की शिकायत होने के बाद जिला अस्पताल के जेल वार्ड में भर्ती कराया गया है। जिन बीमारियों का नाम डॉक्टर ले रहे हैं यह बीमारियां कुछ घंटे में ही ठीक होने वाली बीमारियां हैं। क्योंकि यह परमानेंट बीमारी है शुगर के लिए लगातार दवाई लेनी पड़ती है और बीपी के लिए भी रोज एक दवा से मरीज दिनभर स्वस्थ रहता है। और घबराहट के कारण यदि किसी मरीज को अस्पताल में भर्ती भी करना पड़े तो 24 घंटे या 2 दिन में उसे छुट्टी दे दी जाती है। लेकिन हमारे भाजपा नेता पिछले 6 दिनों से जिला अस्पताल के जेल वार्ड में मौज काट रहे हैं । ना उन्हें जेल शिफ्ट किया जा रहा है और ना ही चिकित्सक उनकी फिटनेस रिपोर्ट देने में रुचि दिखा रहे हैं। और यह सिर्फ सब सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि नेताओं को जेल की रोटी ना खानी पड़े। सजा तो पड़ गई अब जेल से कैसे बचे तो उसका रास्ता जिला अस्पताल के रूप में निकल के सामने आया।

दोनों नेताओं के बीच मारपीट का था मामला, जिसमें हुई सजा

मारपीट का यह मामला 30 जून 2012 का है। मामला है खेत में कब्जे को लेकर हुए विवाद का। जिसमें भाजपा नेता अंशुल शुक्ला के चाचा और भाजपा नेता अरविंद प्रताप सिंह के बीच विवाद था। इस विवाद में अरविंद प्रताप सिंह ने 30 जून 2012 को ही अपने दो साथियों के साथ मिलकर अंशुल शुक्ला के साथ मारपीट की। जिसमें पुलिस ने अरविंद प्रताप सिंह और उनके दो साथी कमलेश जाधव और मुकेश मुकेश जाधव के खिलाफ अंशुल शुक्ला के साथ मारपीट का प्रकरण बनाया और अंशुल शुक्ला के खिलाफ अरविंद प्रताप सिंह के साथ मारपीट का प्रकरण बनाया। यह एक ही घटना के दो अलग-अलग काउंटर प्रकरण बनाए गए जिनका विचारण न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी छिंदवाड़ा के न्यायालय में हुआ।

इस मामले में विचरण न्यायालय ने 2019 में अरविंद प्रताप सिंह और उनके दोनों साथियों को दो-दो साल की सजा सुनाई और दूसरे मामले में अंशु शुक्ला को दो माह की सजा सुनाई गई। दोनों ही पक्षों ने विचारण न्यायालय के फैसले के बाद सत्र न्यायालय में अपील की। विशेष न्यायाधीश अतिरिक्त सत्र न्यायालय एट्रोसिटी सुधीर मिश्रा ने दोनों मामलों की सुनवाई की और विचरण न्यायालय के द्वारा आरोपियों को दी गई सजा को बरकरार रखा और 25 नवंबर 2025 को दोनों मामलों के चार आरोपियों को जेल भेजने का आदेश जारी किया। इसी आदेश के तहत अंशुल शुक्ला और अरविंद प्रताप सिंह सहित चार लोगों को जेल भेजा गया लेकिन वह जिला अस्पताल के जेल वार्ड में पिछले 7 दिनों से मौज काट रहे हैं।

दोनों नेताओं की हठधर्मिता ने किया उन्हें जेल जाने पर मजबूर

जमीन के कब्जे को लेकर हुआ यह विवाद बहुत ही मामूली विवाद था। अक्सर ऐसे मामलों में आपसी समझौते से विवाद का हल निकल जाता है। जिसके बाद न्यायालय दोनों पक्षों की सजा को समाप्त कर उन्हें मुक्त भी कर देता है। यह सामान्य प्रक्रिया है। न्यायालय खुद लोक अदालतों के माध्यम से इस तरह के आपसी समझौते वाले प्रकरणों को सुलझाते हैं । लेकिन इस मामले में ऐसा क्या हुआ कि दोनों पक्षों को और दोनों नामचीन नेताओं को जेल जाने की नौबत आ गई। दरअसल हुआ यह है कि विवाद के बाद 2012 से ही दोनों नेता अपनी हठधर्मिता दिखाते रहे । उन्होंने विचरण न्यायालय में भी समझौता नहीं किया और जब विचरण न्यायालय ने दोनों नेताओं को सजा सुना दी । तो अपील न्यायलय में भी दोनों नेताओं ने समझौता नहीं किया।

जबकि न्यायालय ने दोनों पक्षों से इस बात की पेशकश जरूर की कि वे लोक अदालत के माध्यम से आपसी समझौता कर इस प्रकरण को सुलझा सकते हैं। क्योंकि यह प्रकरण उतनी गंभीर प्रकृति का नहीं था और मामूली विवाद का प्रकरण था। खास बात यह है कि इस प्रकरण में 7 साल तक की सजा का प्रावधान भी नहीं था। जिसके चलते इसे समझौता योग्य माना जा रहा था। लेकिन दोनों पक्षों ने समझौता करने से इनकार कर दिया और न्यायालय में केस लड़ते रहे। आखिरकार न्यायालय ने भी विचरण न्यायालय के द्वारा दी गई सजा को दोनों नेताओं के हठधर्मिता के चलते बरकरार रखा और उन्हें जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया।

चर्चित खबर…Avinash Singh
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