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मौत का तांडव : 17 मासूमों की मौत, क्या सिर्फ डॉक्टर और सिरप जिम्मेदार ?

पूरा सिस्टम भ्रष्ट, अरबों रुपए का खेल, दवा का फर्जीवाड़ा

इंस्पेक्टर से ड्रग कंट्रोलर और स्वास्थ्य मंत्रालय तक रैकेट

छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले के मासूम बच्चों की मौत पर सियासत शुरू हो गई है । सरकार 16 बच्चों के मौत के बाद जागी और आखिरकार एक डॉक्टर को बलि का बकरा बनाया गया। दवा कंपनी पर जो भी कार्रवाई की वह कार्रवाई तमिलनाडु सरकार ने की। इधर कांग्रेस मासूमों की मौत के मामले में सरकार को घेर रही है और स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा मांग रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मासूम बच्चों की मौत का जिम्मेदार क्या सिर्फ एक डॉक्टर और वह सिरप है जिसमें मौत बांटी गई । इस सवाल ने छिंदवाड़ा जिले ही नहीं बल्कि पूरे देश में लोगों को झकझोर कर रख दिया है। यह पूरा मामला हेल्थ इंडस्ट्री से जुड़ा जिसके एपिसोड हम लगातार बना रहे हैं। यह मसला भी उसी में शामिल है। पूरा मामला हेल्थ इंडस्ट्री का है।

एक 2 रुपए का सिरप कैसे 150 रुपए का हो जाता है। यह किसी को पता भी नहीं चलता और उस पर भी सबसे बड़ी बात यह है कि इस जहर को बांटने में जितनी दवा कंपनी जिम्मेदार है उतनी ही सरकार और उतनी ही सरकार के नुमाइंदे भी। जो जहर बेचने के लिए भी कमीशन ले रहे हैं । यह पूरा खेल एक माफिया का है और यह माफिया दवा कंपनी से लेकर ड्रग इंस्पेक्टर , ड्रग कंट्रोलर और स्वास्थ्य मंत्रालय तक फैला हुआ है । क्या 17 बच्चों की मौत इस मौत के कारोबार पर अंकुश लगा पाएगी । अब यह सबसे बड़ा सवाल प्रदेश के राजनेताओं, मुख्यमंत्री और सरकार से है की क्या छिंदवाड़ा के 17 शहीदों की हत्या जहर के इस कारोबार को रोक पाएगी और लोगों को न्याय मिलेगा।

लाव लश्कर के साथ पहुंचे नेता – मुख्यमंत्री, मुंह ताकते रहे पीड़ित

16 मासूम बच्चों की मौत के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री को छिंदवाड़ा आना पड़ा। मुख्यमंत्री का दौरा भी तब बना जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोमवार को छिंदवाड़ा और परासिया जाने का अपना प्रोग्राम जारी किया। आनन फानन में मुख्यमंत्री ने 6 अक्टूबर के अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर छिंदवाड़ा का रुख किया । और परासिया में न्यूटन पहुंचकर मासूम शहीदों के परिजनों से मुलाकात की। सबसे बड़ी बात तो यह है कि मुख्यमंत्री के साथ छिंदवाड़ा जिले के वह नेता भी नजर आए जो पिछले एक महीने में कभी किसी मासूम बच्चों के परिजन से मिलने नहीं पहुंचे। वह भी मुख्यमंत्री के बहाने मासूम शहीदों के परिजनों को सांत्वना देते नजर आए । और मासूम बच्चों के परिजन नेता, मुख्यमंत्री का मुंह ताकते बैठे रहे।

क्योंकि जो उन्हें मिलना था उसकी घोषणा तो मुख्यमंत्री पहले ही कर चुके । कांग्रेस के एक्टिव होने के बाद ड्रग माफिया से जुड़े अधिकारियों को हटाया गया । इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका परासिया विधायक सोहन वाल्मीकि ने निभाई । उन्होंने पहली मौत के बाद ही मुख्यमंत्री और कलेक्टर को इस बात से अवगत करा दिया था कि यह गंभीर मामला है। लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी। उनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और नकुलनाथ भी एक महीने के दौरान कभी भी मासूमों की खोजखबर लेने नहीं पहुंचे। आखिरकार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी को छिंदवाड़ा आकर कांग्रेस की उपस्थिति दर्ज करानी पड़ी।

IMA का विरोध जायज लेकिन सिस्टम में डॉक्टर भी शामिल

परासिया के सरकारी डॉक्टर शिशु रोग विशेषज्ञ प्रवीण सोनी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का प्रकरण दर्ज किया गया है। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और जेल भी भेज दिया गया है । जिसका इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भारी विरोध जताया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का विरोध जायज है क्योंकि डॉक्टर किसी दवा को मरीज के स्वास्थ सुधार के लिए लिखता है। जिसका उसे अधिकार है और डॉक्टर को नहीं पता होता कि जो दवा वह लिख रहा है उस दवा में दवा में दर्शाए गए कंटेंट के अलावा भी और कुछ मौजूद है । लेकिन मौत के कारोबार के इस पूरे रैकेट में कहीं न कही डॉक्टरों की भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। दवा कंपनी डॉक्टरों को फॉरेन टूर दे रही है । दवा कंपनी डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट दे रही है । और दवा कंपनी डॉक्टरों को मोटा कमीशन दे रही है। उसके बाद डॉक्टर दवा लिख रहे। इस बात की तरफ भी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का विरोध सामने आना जरुरी है। क्योंकि आज डॉक्टर बिना किसी गलती के आरोपी बनाएं गए हैं लेकिन कहीं न कहीं इस कारोबार के लिए डॉक्टर भी जिम्मेदार है।

Health industry…. लगातार जारी…

17 शहीद… Avinash Singh
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