24 सितंबर को शिकायत आज तक करवाई का इंतजार
सरकारी विभागों में हो रहे महिलाओं पर शारीरिक हमले
छिंदवाड़ा । सरकारी महकमों में महिलाओं के साथ शारीरिक हमले बड़ी आम सी बात हो गई है। जैसे-जैसे सरकार सरकारी महकमों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ा रही है । उसी तेजी से महिलाओं पर होने वाले फिजिकल हैरेसमेंट के मामले भी बढ़ रहे हैं। कई महिला कर्मचारी अपने अधिकारियों से फिजिकल हैरेसमेंट का शिकार होती है लेकिन आज भी महिलाओं में लोक लाज का डर फैला हुआ है। और वह इस बात की शिकायत वे बाहर नहीं कर पाती। यहां तक की कार्यालय में महिलाओं की सुरक्षा और उनकी शिकायतों की सुनवाई के लिए कमेटी भी बनाई गई है। लेकिन यह कमेटी भी महिलाओं की सुनवाई करने में असमर्थ नजर आ रही है।
प्रताड़ित महिला अधिकारी का एक्सक्लूजिव इंटरव्यू सुने 👇
छिंदवाड़ा शहर में एक महत्वपूर्ण विभाग के अंदर ऐसा ही एक मामला सामने आया। यहां कोई महिला कर्मचारी फिजिकल हैरेसमेंट का शिकार नहीं हुई बल्कि एक महिला अधिकारी के साथ विभाग के डीन ने बैक टच करते हुए उन्हें धमकी दी। डीन ने यह बेड टच एक बार नहीं बल्कि दो बार और तीन बार किया। ताकि महिला अधिकारी किसी तरह का संकेत दे और बात आगे बढ़े। लेकिन इस पूरे मामले में महिला अधिकारी ने अफसर को लताड़ लगा दी । तब से या महिला अधिकारी वर्किंग हरासमेंट का शिकार हो रही है । इस महिला अधिकारी को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। और डीन के द्वारा उनके खिलाफ गलत बातें विभाग में फैलाई जा रही है । आखिरकार महिला अधिकारी ने परेशान होकर इस पूरे मामले की शिकायत महिला प्रकोष्ठ थाने में की है। हालांकि 24 सितंबर को की गई शिकायत के बाद आज तक पुलिस ने कोई खास कदम इस पूरे मामले में नहीं उठाया है।
शिकायत गंभीर फिर करवाई में देरी क्यों ?
शहर के एक महत्वपूर्ण विभाग में महिला अधिकारी के साथ हो रहे फिजिकल हैरेसमेंट और वर्किंग हैरेसमेंट की शिकायत एक गंभीर मामला है। सरकारी महकमें में महिलाओं की भागीदारी अब ज्यादा हो रही है। ऐसे मामलों में बढ़ोतरी भी । और इसके साथ ही यह तय करना जरूरी है कि ऐसी गंभीर शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। महिला अधिकारी ने पूरे मामले की शिकायत न सिर्फ महिला प्रकोष्ठ थाने में किया । बल्कि अपने विभागीय अधिकारियों को भी पूरी घटना और पूरी बात से अवगत कराया है।
बाकायदा उन्होंने पत्र लिखकर इस मामले में जांच की मांग की है। लेकिन आज तक विभागीय अधिकारियों ने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया । इतना ही नहीं पुलिस ने भी केवल दोनों पक्षों के बयान लेकर मामला ठंडा बस्ती में डाल दिया है। क्या केवल एक विभाग के प्रमुख होने के नाते या एक विभाग के बड़े अधिकारी होने के नाते ऐसे मामलों से किसी आरोपी को बचाया जा सकता है। यह सवाल अब महिलाओं में उठने लगा है। साथ ही फैल रही है वह असुरक्षा की भावना जो कार्य स्थल पर महिलाओं के साथ गलत होने देने की तीमारदारी कर रही है।
physical harassment…Avinash Singh
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