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किडनी फेलियर : क्या एक सिरप है 6 मासूम बच्चों का कातिल ?

एक कंपनी के सिरप पर गहराया संदेह, दो सिरप पर बैन

डॉक्टर ही नहीं दवा कंपनियां भी लोगों की जान से खेल रही

छिंदवाड़ा। कोयलांचल में किडनी फेलियर से 6 बच्चों की मौत के मामले में भोपाल, दिल्ली और पुणे में हुई जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। आखिरकार अब एक संभावना पर काम किया जा रहा है कि क्या वायरल फीवर के बाद गंभीर होने वाले बच्चों को एक कफ सिरप के रूप में जहर दिया गया। वास्तव में जिन बड़े अस्पतालों में बच्चों की मौत हुई और उनकी मौत के कारण की जांच के लिए प्रयास किए गए । तो यह बात सामने आई की बच्चों की मौत किसी विषाक्त दवा के कारण हुई यानी किसी जहरीली दवा के कारण हुई है। और सबसे बड़ी बात जो इस पूरे मामले में कहीं ना कहीं दिखाई दी वह यह है कि जिन बच्चों को यह समस्या हुई और जिन बच्चों की मौत हुई उन सभी बच्चों को लगभग एक ही कंपनी का एक सिरप दिया था ।

यह सिरप उन्हें डॉक्टर से मिला, मेडिकल स्टोर से मिला या झोलाछाप डॉक्टरों ने उन्हें दिया। इस बात की जांच होना बाकी है। लेकिन एक बात साफ है की कोयलांचल के 6 बच्चों की मौत का कातिल एक सिरप के रूप में सामने आ रहा है। हालांकि अब तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है क्योंकि इस सिरप के सैंपल जांच के लिए गए हैं। लेकिन अब एक आखरी संभावना बची है जो इस सिरप के रूप में सामने आ रही है। कि जिन बच्चों को अचानक किडनी फेल्योर के बाद उनकी मौत हुई या उनकी हालत बिगड़ी उसके पीछे कहीं ना कहीं दवा कंपनी का बड़ा हाथ है। इस दवा कंपनी का यह सिरप कोयलांचल में तेजी से फैला और हर बीमार होने वाले बच्चे तक कैसे पहुंचाया गया यह अब जांच का विषय बन गया है।

बच्चों में पहले से नहीं थी किडनी की कोई बीमारी

छिंदवाड़ा से नागपुर रेफर होने वाले बच्चों की मौत नागपुर के अस्पतालों में हुई जहां इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए मृतकों के सैंपल पूना भेजे गए । जब जांच रिपोर्ट सामने आई तो बड़ा खुलासा हुआ। जांच रिपोर्ट में यह बात साफ कर दी गई है कि छिंदवाड़ा के जिन बच्चों की मौत नागपुर के अस्पतालों में हुई उन बच्चों में पहले से किडनी से संबंधित कोई भी बीमारी नहीं पाई गई। उनकी किडनी अचानक फैलियर हुई और उन्हें डायलिसिस की आवश्यकता पड़ गई। पुणे की जांच में इस बात की संभावना जताई गई है कि बच्चों की मौत किसी विषाक्त दवा के कारण हुई है । इस रिपोर्ट के आने के बाद नागपुर के अस्पताल भी सचेत हो गए हैं। और खास तौर से एक विशेष सिरप पर इस बात का संदेह जताया जा रहा है कि सिरप को लेने के बाद बच्चों की हालत बिगड़ी और उनकी किडनी फेलियर जैसी समस्या अचानक उत्पन्न हो गई। नागपुर के अस्पतालों ने भी ऐसी दवाओं को समय पर बंद करने की सलाह दी है।

Coldrif और nextro -DS पर लगाया बैन

भोपाल दिल्ली और पुणे की रिपोर्ट आने के बाद जिला प्रशासन सचेत हुआ है। कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने मेडिकल डीन, सिविल सर्जन और अन्य चिकित्सकों के साथ बैठक लेकर इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दो सिरप पर बैन किया है। हालांकि यह बैन स्थाई नहीं है। लेकिन इन सिरप की जांच रिपोर्ट आने तक Coldrif और nextro -DS दोनों सिरप को पूरी तरह से बंद करने के आदेश दिए गए हैं। चिकित्सकों और दवा व्यापारियों को निर्देश दे दिए गए हैं कि यह दोनों सिरप किसी भी हालत में किसी भी मरीज को नहीं दिए जाने चाहिए। इसके अलावा डॉक्टर्स की सलाह पर कलेक्टर ने बच्चों के बीमार होने पर सतर्कता बरतने का सुझाव भी लोगों को दिया है । उन्होंने कहा है कि बच्चों को बीमार होने पर केवल प्लेन सिरप ही दिया जाए ना की कांबिनेशन वाला सिरप दिया जाए। और कोई अलग तरह से सिम्पटम्स आने पर बच्चों को तत्काल चिकित्सक को दिखाया जाए और झोलाछाप डॉक्टर्स से बचकर रहा जाए।

मासूमों की मौत…Avinash Singh
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