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बुरे फंसे डॉक्टर : डिटेक्टिव बनना महंगा पड़ा, पहुंचे सलाखों के पीछे !

मां के जेवरों ने बनाया हत्या का आरोपी

अपराधी को तलाशने गलत तरीका अपनाया

छिंदवाड़ा। शहर में एक सप्ताह पहले एक हाई प्रोफाइल मामला सामने आया । शहर के मशहूर डॉक्टर के बेटे और खुद लैंडलॉर्ड डॉक्टर हत्या के एक मामले में आरोपी बनाए गए। यह मामला अखबारों में छपा हर दिन छप रहा है। लेकिन बड़ी बात यह है कि इस पूरी घटना के पीछे की कहानी आखिर क्या है। क्या डॉक्टर हत्यारे हैं ? क्या उन्होंने किसी की हत्या की है ? या फिर अपने एक गलत फैसले के कारण आज वे सलाखों के पीछे हैं। यह मामला है शहर के देहात थाना क्षेत्र का। जहां 5 सितंबर को झाड़ियों में पड़ा एक युवक जिसकी उम्र केवल 27 साल थी गंभीर हालात में मिला। युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उस युवक ने दम तोड़ दिया।

युवक की मौत के बाद जब पुलिस की पड़ताल शुरू हुई तो सामने आया एक लैंडलॉर्ड डॉक्टर का नाम। हालांकि डॉक्टर बीएमएस है । लेकिन उनके पिता स्वर्गीय डॉक्टर रज्जन गुप्ता शहर के मशहूर डॉक्टर में शुमार रह चुके हैं। पुलिस ने अपनी कार्रवाई की और स्वर्गीय डॉक्टर रज्जन गुप्ता के बेटे डॉक्टर आशीष गुप्ता को पांच अन्य लोगों के साथ 27 वर्षीय युवक के साथ मारपीट कर उसकी हत्या करने का आरोपी बनाया। शनिवार को भी दो आरोपी नागपुर से पकड़े गए। इस तरह से देहात थाना पुलिस ने अब तक डॉ आशीष गुप्ता सहित युवक के साथ मारपीट करने वाले पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है एक आरोपी अब भी फरार है। अब सवाल यह है कि आखिर एक लैंडलॉर्ड डॉक्टर जिसके पास जीवन यापन के लिए पर्याप्त संपत्ति है वह एक हत्या के आरोप के आरोपी कैसे बना ?

मां के गुम जेवर की तलाश…हत्या तक पहुंची

दरअसल मामला इस घटना के लगभग 15 दिन पहले शुरू होता है। जिस 27 वर्षीय युवक रामकृष्ण पिता बलराम उईके की मौत हुई । उस युवक को घटना के कुछ दिन पहले डॉक्टर आशीष गुप्ता अपने ड्राइवर मृतक के अपने साथ कहीं लेकर गए थे। इस दौरान उनकी मां भी साथ थी। इस टूर के बाद जब गुप्ता परिवार वापस आया। तब तक सब कुछ सामान्य था । लेकिन अचानक डॉक्टर आशीष गुप्ता की मां ने उन्हें बताया कि उनके कुछ सोने के जेवर गायब हैं। जेवरों की तलाश शुरू की गई और फिर शक की सुई पहुंची उस ड्राइवर पर जो उन्हें लेकर टूर पर गया था। गुप्ता परिवार का पूरा संदेह इस बात पर गहरा गया की हो ना हो जो ड्राइवर उन्हें लेकर बाहर गया था। उसी ने आरोपी डॉक्टर की मां के जेवर उड़ाए हैं। अब गुप्ता परिवार अपने लाखों के जेवर वापस चाहता था । इसके लिए पहले उन्होंने उस व्यक्ति से संपर्क किया जिसने यह ड्राइवर गुप्ता परिवार को उपलब्ध कराया था। और वह व्यक्ति कोई और नहीं था बल्कि डॉक्टर का पुराना ड्राइवर आरोपी मोनू उर्फ नंदलाल चौरे था। अब यह पुराना ड्राइवर मोनू भी हत्या का आरोपी है।

दारू पार्टी के बहाने युवक का मुंह खुलवाने की योजना

ड्राइवर रामकृष्ण पर जेवर चोरी का संदेह गहराने के बाद शुरू हुआ लाखों के जेवरों की तलाश का दौर। जब डॉक्टर ने अपने बटाईदार को बुलाकर यह बात बताई तो बटाईदार ने ही यह सुझाया कि किसी तरह से रामकृष्ण से जेवर की बात उगलवाई जा सकती है। इसके लिए बाकायदा डॉक्टर ने और बटाईदार ने एक प्लान किया। जिसके तहत एक शराब पार्टी का आयोजन डॉक्टर आशीष गुप्ता के खेत में किया गया। जिसमें मोनू और बटाईदार ने रामकृष्ण को बुलवाया। साथ ही अपने कुछ दोस्तों को भी बुलवाया। इस शराब पार्टी के दौरान शराब पिलाकर मृतक रामकृष्ण से जेवर चोरी का मामला उगलवाने का प्रयास आरोपियों ने किया। लेकिन जब रामकृष्ण जेवरों के संबंध में कुछ नहीं बता पाया तो आरोपियों ने उसके साथ जमकर मारपीट की। आरोपियों की मारपीट से बेहोश हुए युवक को देहात थाना क्षेत्र में ही झाड़ियों में फेंक दिया गया। इस पूरे मामले में बड़ी बात यह है कि जब सुबह आरोपियों की शराब का नशा उतरा तो उन्होंने उस जगह जाकर देखा जहां उन्होंने युवक को फेंका था। तब भी युवक बेहोशी की हालत में वही पड़ा था । आरोपियों में से दो लोगों ने युवक को झाड़ियां से उठाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया । लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था आखिरकार इलाज के दौरान युवक ने दम तोड़ दिया।

डॉक्टर ने दारू पार्टी के लिए दिए 3700 रुपए !

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर डॉक्टर जो कि मौका ए वारदात पर मौजूद ही नहीं था आरोपी कैसे बनाया गया। दरअसल डॉक्टर ने अपनी मां के जेवर चोरी का राज उगलवाने के लिए बटाईदार के साथ मिलकर एक योजना बनाई। और इस योजना में दारू पार्टी करने के लिए पुराने ड्राइवर मोनू और बटाईदार को डॉक्टर ने 700 रुपए नगद और 3000 रुपए यूपीआई से पेमेंट किया। इन्हीं रुपयों से मोनू और बटाईदार ने अपने तीन और दोस्तों के साथ मिलकर दारू पार्टी की। जिसमें रामकृष्ण की हत्या की गई। इस पूरे मामले में डॉक्टर मौजूद नहीं था ना ही डॉक्टर मारपीट के दौरान मौजूद था और ना ही रामकृष्ण से रुपए उगलवाने के दौरान। इस पूरे मामले को पुराने ड्राइवर मोनू , डॉक्टर के बटाईदार और उनके साथ तीन अन्य लोगों ने अंजाम दिया। डॉक्टर आरोपी बनाया गया इस पूरे मामले में षड्यंत्र रचने के आरोप में । क्योंकि जिस दारू पार्टी में युवक की हत्या की गई उस दारू पार्टी का पूरा खर्च डॉक्टर ने उठाया था। वह भी केवल अपनी मां के जेवर वापस पाने के लालच में।

एक गलत फैसला और सलाखों के पीछे पहुंचा डॉक्टर

एक 27 साल के युवक की हत्या के इस मामले में गिरफ्तार किए गए डॉक्टर आशीष गुप्ता शहर के जाने-माने स्वर्गीय डॉक्टर रज्जन गुप्ता के बेटे हैं । इसके अलावा शहर के एक बहुत पुराने रईस परिवार के दामाद भी हैं। जानकारों की माने तो डॉक्टर आशीष गुप्ता को अपनी पत्नी के परिवार से भी संपत्ति में हिस्सा मिला है। और करोड़ों रुपए उनके हिस्से में आए हैं। उसके बाद भी वे आज सलाखों के पीछे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि उन्होंने एक अपराध को छुपा कर उस अपराध का पता लगाने के लिए गलत तरीका अपनाया । मां के जेवर चोरी होने के मामले में डॉक्टर आशीष को सबसे पहले थाने में एफआईआर दर्ज करानी थी। और उसके साथ ही उस संदेही का नाम भी उजागर करना था जिस पर उन्हें शक था तब शायद पुलिस कानूनी तरीके से जेवर चोरी का यह मामला निकाल पाती। लेकिन आरोपी डॉक्टर ने जो तरीका अपनाया वह तरीका शहर के एक रईस व्यक्ति के द्वारा अपनाया गया गलत तरीका था और यही कारण है कि आज डॉक्टर आशीष सलाखों के पीछे हैं।

Next Episode – शहर में और भी हैं ऐसे डॉक्टर तो अपराध में लगा रहे अपनी कमाई।

बिहाइंड द सीन…क्राइम
…Avnash singh
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