Home जिला Health industry : आरोग्य मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का कारनामा !

Health industry : आरोग्य मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का कारनामा !

गाल ब्लैडर फटा तो बिना बताए कर दिया नागपुर रेफर

महिला के शरीर में फैला जहर, मुश्किल से बची जान

छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा शहर में मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटलों की बाढ़ आ गई है। जिसे देखो वही मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल खोलकर बैठ गया। लेकिन इन अस्पतालों की स्थिति नीम हकीम खतरे जान की जैसी ही है। बिच्छू का मंत्र आता नहीं और सांप के बिल में हाथ डालने वाली हालत शहर के मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों की हो गई है। हेल्थ इंडस्ट्री के पहले एपिसोड में मामला है शहर के सबसे चर्चित आरोग्य मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल का जहां का खर्चा नागपुर के बड़े अस्पतालों से भी ज्यादा और सबसे ज्यादा मरीज भी अच्छे उपचार की चाह में इसी अस्पताल में पहुंच रहे हैं। लेकिन एक ऐसा मामला इस अस्पताल का सामने आया जिसमें मरीज की जान पर बन आई। पहले तो अस्पताल ने ऑपरेशन करने के नाम पर महिला मरीज को भर्ती कर लिया, उसके बाद केवल 10 घंटे में ही महिला की हालत सुधारने की बजाय इतनी बिगड़ गई कि उसे आनन-फानन में अस्पताल प्रबंधन ने नागपुर रेफर कर दिया। और परिजनों को जानकारी तक नहीं दी कि आखिर महिला को हुआ क्या है।

वीडियो में सुने क्या है पूरा मामला 👇

चल कर अस्पताल आई महिला ऑक्सीजन पर नागपुर गई !

यह मामला शहर के ही एक महिला मरीज का है। महिला मरीज को गाल ब्लैडर में पथरी थी और उसकी पूरी जांच नागपुर में कराई गई थी। और उसका ऑपरेशन ही होना था। परिजनों को जब नागपुर में ऑपरेशन की सलाह दी गई तो परिजनों ने इस बात पर 14 अगस्त को शहर के आरोग्य मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल परासिया रोड से संपर्क किया। और पूछा कि क्या इस बीमारी का उपचार और ऑपरेशन उनके अस्पताल में हो सकता है। इस बात पर आरोग्य मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने मरीज के परिजनों को आश्वासन दिया कि वह उसके मरीज का ऑपरेशन छिंदवाड़ा में ही कर देंगे ।

आने जाने और रहने की असुविधा से बचने के लिए अयूब खान ने अपनी पत्नी को 16 अगस्त की शाम 5:00 बजे आरोग्य अस्पताल में भर्ती कराया। जहां महिला अच्छी खासी तंदुरुस्त हालत में गई। लेकिन अचानक सुबह 5:00 बजे अस्पताल के दो चिकित्सकों ने महिला को रेफर कर परिजनों से कह दिया कि नहीं यहां से ले जाओ हम इनका उपचार नहीं कर सकते। अयूब खान जब अपनी पत्नी को लेकर नागपुर पहुंचे तो पता चला कि उसका गाल ब्लैडर फट चुका है। और पूरे शरीर में जहर फैल गया है । जिसकी जानकारी आरोग्य हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने महिला के परिजनों को नहीं दी। नागपुर में बड़ी मुश्किल से महिला की जान बच सकी है। हालांकि अभी भी उसे हाई रिस्क में रखा गया है।

आयुष्मान कार्ड देखकर चमक जाती है प्राइवेट हॉस्पिटल की आंखे

इस पूरे मामले में एक और बड़ा खेल सामने आया है और वह है आयुष्मान भारत योजना । दरअसल अयूब खान की पत्नी का उपचार 5 लाख रुपए तक का फ्री में किया जा सकता है। इसके लिए शहर के कई अस्पताल अधिकृत है और आरोग्य मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने भी आयुष्मान कार्ड देखकर ही मरीज को अपने यहां भर्ती किया गया था। लेकिन जब उसकी हालत बिगड़ गई तो अस्पताल ने मामला बिगड़ने के डर से उसे रेफर कर दिया । लेकिन आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी अस्पताल ने शाम 5:00 बजे से लेकर सुबह 5:00 बजे के बीच केवल 10 12 घंटे में 10 रुपए अस्पताल में जमा कर लिए और लगभग 10 हजार दूसरे अस्पताल से जांच और दवाइयां में खर्च कर दिए । मतलब 10 घंटे में मरीज का उपचार तो नहीं किया गया बल्कि उसके परिजनों से 20 रुपए का खर्चा अस्पताल प्रबंधन ने करा दिया। आखिर क्यों आयुष्मान कार्ड देखकर प्राइवेट अस्पतालों की आंखें चमक जाती है इस बात का खुलासा हम हेल्थ इंडस्ट्री के अगले एपिसोड में करेंगे।

Episode – 1
Health industry…Avinash Singh
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