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फर्जीवाड़ा : आदिवासी छात्र – छात्राओं के नाम पर लाखों रुपए का हेरफेर !

रजिस्टर्ड संस्था की शिकायत, जांच में चल रही खानापूर्ति

आदिवासियों के मामले में भी गंभीर नहीं जिला प्रशासन

छिंदवाड़ा। एक रजिस्टर्ड संस्था सरकारी योजना के के माध्यम से आदिवासी छात्र-छात्राओं के नाम पर लाखों रूपों की ठगी कर लेती है। और शिकायत के बाद भी जिला प्रशासन और पुलिस इस मामले की जांच में केवल खाना पूर्ति करते नजर आते हैं। आदिवासी जिले छिंदवाड़ा में इस तरह के कई मामले है और एक मामला दिव्य भारत समाचार के संज्ञान में आया है, जिसमें एक रजिस्टर्ड संस्था पति पत्नी और भाई के बीच संचालित हो रही है। इस संस्था ने सरकारी योजना के नाम पर आदिवासी छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण देने और उनका प्लेसमेंट करने का फर्जीवाड़ा किया है।

जिन लोगों को प्रशिक्षण देने की बात की गई उन्हें प्रशिक्षण दिया ही नहीं गया और फर्जी सेंटर दिखाकर सरकार से लाखों रुपए का हेरफेर आहरण कर लिया गया। इस बात की शिकायत पिछले 5 साल से हो रही है, लेकिन आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई जिला प्रशासन या पुलिस ने नहीं की है। जबकि यह सीधा-सीधा मामला दस्तावेजों से छेड़छाड़, फर्जी हस्ताक्षर और कूट रचित दस्तावेज बनाने से जुड़ा हुआ है। जिसके आधार पर लाखों रुपए का गबन रजिस्टर्ड संस्था के द्वारा किए जाने का दावा शिकायतकर्ता ने किया है। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ शिकायत और दावे को सही साबित करते के लिए संबंधित फर्जीवाड़े के दस्तावेज भी प्रस्तुत किया है।

“सेवा कुंज समिति” कुकड़ाजगत चला रहे पति – पत्नी और भाई

यह मामला है रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसाइटी से रजिस्टर्ड एक संस्था सेवा कुंज समिति का। यह समिति पंजीयन के बाद से ही पति, पत्नी और भाई संचालित कर रहे हैं। समिति के पंजीयन के बाद जब एक बार दूसरे व्यक्ति को सचिव बनाया गया तो उसके हस्ताक्षर फर्जी करके समिति का संचालन किया जाने लगा। जिसकी भनक तक सचिव को नहीं लगी और सेवा कुंज समिति में पति-पत्नी और भाई कभी अध्यक्ष, कभी कोषाध्यक्ष और कभी सचिव बनकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते रहे। इस बात का दावा शिकायतकर्ता ने किया है। दरअसल सेवा कुंज समिति के फर्जीवाड़े की शिकायत करने वाला कोई और नहीं बल्कि इस समिति का एक पूर्व सचिव है। जिसके फर्जी हस्ताक्षर करने के बाद पति-पत्नी और भाई ने सेवा कुंज समिति के नाम पर आदिवासियों को प्रशिक्षण देने और उनका प्लेसमेंट कराने की योजना का लाभ उठाया। मामला सिर्फ इतना ही नहीं है कि सचिव के फर्जी हस्ताक्षर किए गए।

बल्कि मामला यह भी है कि जिस योजना के तहत आदिवासी छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण देने की बात कही गई। वह भी फर्जी था और प्रशिक्षण के साथ-साथ फर्जी प्लेसमेंट भी कर दिया गया । फर्जी केंद्र बनाए गए यहां तक की जिम सेंटर को दस्तावेजों में दिखाया गया उस केंद्र के मकान मालिक का उसे क्षेत्र में कोई मकान ही नहीं है और यह फर्जी वाला भी संस्था के एक पदाधिकारी पति सचिन के नाम पर किया गया । इस पूरे मामले की शिकायत संस्था के पूर्व सचिव मनोज सिंह ठाकुर ने की है । और संस्था का संचालन सतीश सूर्यवंशी पिता बृजमोहन सूर्यवंशी उसकी पत्नी मोनिका सूर्यवंशी और भाई मुकेश सूर्यवंशी के द्वारा किया जा रहा है।

एक साल पहले एसपी कार्यालय में शिकायत, क्या हुआ पता ही नहीं

शिकायतकर्ता मनोज सिंह ठाकुर ने पूरे दस्तावेजों के साथ इस फर्जीवाड़े और सरकार को लाखों रुपए का चूना लगाने की शिकायत पूरे दस्तावेजों के साथ पुलिस अधीक्षक छिंदवाड़ा से की थी। यह शिकायत 1 साल पहले जून 2024 में की गई थी लेकिन आज तक इस मामले में शिकायतकर्ता से पुलिस ने कोई बात नहीं की। ना ही इस बात की जानकारी दी की सरकार के साथ किए गए धोखे की शिकायत का क्या हुआ। क्या आज भी जांच लंबित है, या जांच में खाना पूर्ति कर उसे कचरे के डब्बे में डाल दिया गया है। यह जानकारी शिकायतकर्ता को अब तक नहीं मिली इस संबंध में मनोज सिंह ठाकुर का कहना है कि मैं कई बार इस बात की शिकायत कर चुका हूं लेकिन आज तक फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ और फर्जी संस्था संचालित करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई । जबकि लाखों रुपए के गबन के दस्तावेज उन्होंने पुलिस और प्रशासन को सौंपे हैं। रजिस्टर्ड संस्था के नाम पर सरकारी योजना के माध्यम से आदिवासी छात्र-छात्राओं का फर्जी प्रशिक्षण, फर्जी प्लेसमेंट और इस पूरे फर्जीवाड़े में सरकार से लाखों रुपए का लाभ लेने का मामला बहुत बड़ा है। उसके बाद भी संस्था के संचालको पर कोई कार्रवाई न होना प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।

शिकायतकर्ता – मनोज सिंह ठाकुर मोबाइल – 9300957001

Episode – 2 केनरा बैंक भी शामिल, जानकारी देने में आनाकानी

फर्जीवाड़ा… Avinash Singh
9406725725/7697930555