किरायेदार लड़कियों ने गर्भपात के बाद कूड़े में फेंका नवजात !
जिंदा पैदा हुआ… कूड़े में कुत्तों ने नोच लिया मांस, मृत मिला !
छिंदवाड़ा। शहर में तीन दिन पहले एक सनसनीखेज वारदात सामने आई । पुलिस को एक कूड़े के ढेर में नवजात का कुत्तों के द्वारा नोचा हुआ शव मिला। नवजात का यह शव चंद घंटे पुराना था। और कुत्तों ने उसके मांस के लोथड़े नोच लिए थे। पुलिस ने जब नवजात का शव बरामद किया तो वह बुरी तरह से क्षतिग्रस्त था। सवाल उठा कि किसका है ये नवजात, किसने दिखाइ हैवानियत और कूड़े में नवजात को फेंक कर चला गया। कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया और कैमरे में कैद हुई वह मां जिसने नवजात बच्चे को कूड़े में फेंकने का साहस दिखाया ।
कोतवाली पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि एक लगभग 18 साल की युवती ने गर्भपात के बाद नवजात को कूड़े में फेंक दिया। बाद में उस नवजात को कुत्तों ने नोच नोच कर खाया। यह युवती ग्रामीण क्षेत्र की रहने वाली है और शहर के एक क्षेत्र में किराए के मकान में रहने वाली अपनी छोटी बहन के यहां सिर्फ गर्भपात के लिए आई थी। कूड़े में नवजात का शव मिलने के बाद जो हैवानियत सामने आई वह चौंकाने वाली है। प्रेम से शुरू हुई यह दास्तान गर्भधारण तक पहुंची और फिर शुरू हुआ हैवानियत का खेल। अनवांटेड प्रेगनेंसी वह भी लगभग 8 महीने की, जिसे रफा दफा करने के लिए युवती छिंदवाड़ा पहुंचती है। यहां गर्भपात की दवा खाकर अपना गर्भपात कर लेती है और नवजात को ले जाकर कूड़े में फेंक देती है। इस पूरे घटनाक्रम में कई सवाल खड़े हो गए जिसने भी यह दास्तान सुनी सबके रोंगटे खड़े हो गए ।
रिश्तेदार से प्रेम और गर्भधारण….!
कूड़े के ढेर में नवजात को फेंकने वाली युवती महज 18 साल की है। उसके गर्भधारण के पीछे की कहानी यह है कि युवती को अपने ही एक रिश्तेदार युवक से प्रेम हो गया। दोनों की प्रेम कहानी परवान चढ़ती रही । दोनों के प्रेम संबंधों का नतीजा यह निकला कि युवती को गर्भधारण हो गया । यह मामला नया नहीं है युवती के गर्भ में पल रहा बच्चा लगभग 8 महीने तक पलता रहा। और जब युवती को इस बात का होश आया कि वह परिवार, समाज, गांव और रिश्तेदारों को क्या जवाब देगी। तब जाकर युवक और युवती ने इस गर्व को गिराने का निर्णय लिया। इस मामले में युवक और युवती के परिवार वाले कितने शामिल है इस बात की पड़ताल तो पुलिस कर रही है ।
छिंदवाड़ा में किराए के मकान में कांड…!
गांव में बनी प्रेम कहानी शहर में आकर सनसनीखेज वारदात बन गई। दरअसल युवक और युवती ने जब गर्भपात करने का निर्णय लिया तो उन्होंने एक सुरक्षित स्थान की तलाश की। और वह स्थान उन्हें मिला छिंदवाड़ा में । युवती की छोटी बहन जो की नाबालिक है छिंदवाड़ा शहर के एक मकान में किराए से रहकर पढ़ाई करती है। इसी मकान में गर्भवती युवती भी आकर रहने लगी और फिर उसने गर्भपात करने के लिए दवाइयों का उपयोग किया। इस पूरे मामले में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं जो आगे की पड़ताल में सामने आएंगे।
गर्भपात : जीवित था नवजात…!
अपनी बहन के साथ रह रही युवती ने जब दवाइयां खाई तो आखिरकार लगभग 8 महीने के गर्भ का गर्भपात हो गया । लेकिन जब गर्भपात हुआ तब बच्चे की सांसे चल रही थी, इस बात का खुलासा पीएम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने किया है। उन्होंने दावा किया है कि जिस समय बच्चे का जन्म हुआ वह जीवित था । लेकिन कूड़े में फेंके जाने के समय बच्चा जीवित था या उसकी मौत हो चुकी थी इस बात से पर्दा नहीं उठ सका है। क्योंकि पुलिस को कूड़े के ढेर से कुत्तों के द्वारा नोचा गया शव ही मिला।
परिवार वालों की क्या भूमिका…!
गांव में बनी इस प्रेम कहानी में नवजात के कुत्तों के द्वारा नोक जाने तक का सफर तो पूरा हो गया । अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस पूरे कांड के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार है ? और किसकी क्या भूमिका है। युवती और उसके प्रेमी की भूमिका तो साफ है कि उन्होंने प्रेम किया और बाद में उस प्रेम को कूड़े में फेंक दिया। लेकिन इस पूरे मामले में युवक और युवती का साथ किस-किस ने दिया उनके परिवार की क्या भूमिका है । कोतवाली टीआई आशीष धुर्वे मामले की पड़ताल में लगे हैं और उनका कहना है कि जल्द ही इस पूरे कांड के सहयोगियों को भी बेनकाब किया जाएगा।
कहां से आई गर्भपात की दवा…!
8 महीने के गर्भ का गर्भपात करने के लिए युवक और युवती ने किसका सहयोग लिया। यह सबसे बड़ा सवाल है आखिर गर्भपात के लिए दवा कहां से आई। किस दुकान से दवा खरीदी गई, इस दवा को खरीदने के लिए किसने उन्हें प्रेरित किया । किसने दवा का नाम बताया, क्या इसमें कोई डॉक्टर या गर्भपात करने वाले दलाल शामिल है ? या गांव के किसी झोलाछाप डॉक्टर की इसमें भूमिका है। यह एक बड़ा सवाल है जो की सारी व्यवस्थाओं पर सवाल उठता है। ऐसी दवाएं बिना डॉक्टर के कैसे मेडिकल स्टोर में उपलब्ध हो रही है। और मेडिकल स्टोर वाले कैसे इन दवाओं को किसी को भी दे रहे हैं इन सवालों पर भी जांच जरूरी है।
मकान मालिकों को किराए से मतलब
शहर के हजारों मकान में किराए से लोग रह रहे हैं। सैकड़ो या हजार से भी ज्यादा ऐसे मकान है जहां पर युवक और युक्तियां अकेले रह रहे हैं। इन मकानों को किराए पर देने वाले मकान मालिकों की जिम्मेदारी सिर्फ इतनी है कि वह अपने मकान का किराया तय करें और हर महीने उन्हें किराया मिलता रहे। लेकिन उनके मकान में चल क्या रहा है किस तरह के युवक और किस तरह की युवतियां उनके मकान में किराए से रह रहे हैं। इस बात से उन्हें कोई लेना-देना नहीं हैं। पुलिस ने कई बार मुनादी करा दी की मकान को किराए से देने के बाद किराएदार की पूरी जानकारी संबंधित थाने में दी जानी चाहिए। लेकिन ऐसा कोई भी मकान मालिक नहीं कर रहा। मकान मालिकों को केवल किराए से मतलब है शहर में कई किराएदार लड़कियां ऐसी है जो संदिग्ध कारोबारों में लिप्त है । उनके मकान में कई लोग आते जाते हैं। और वह भी कई लोगों के साथ रात भर गायब रहती है। लेकिन इन सब बातों से मकान मालिक का कोई लेना-देना नहीं हैं । इस कांड के बाद अब पुलिस शहर में किराए से मकान देने वाले मकान मालिको पर भी शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।
क्या अब सेक्स एजुकेशन हो गया जरूरी ?
गांव में बनी एक प्रेम कहानी ने कई सवाल खड़े किए और यह केवल एक गांव का मामला नहीं है । ऐसे मामले शहर की गलियों में और हर गांव में मौजूद है। लेकिन इस पूरे कांड में एक सबसे बड़ा सवाल यह उठा की क्या अब बच्चे या बच्चियों को सेक्स एजुकेशन देने की आवश्यकता है ? क्या उन्हें समझाने की आवश्यकता है कि क्या गलत है और क्या सही है। या उन्हें यह समझने की आवश्यकता है कि इस तरह के कांड कई जानो को मुश्किल में डाल सकते हैं। इस मामले में गर्भपात की दवा ने नवजात की तो जान ले ली लेकिन उस दवा को लेने वाली मां की जान भी खतरे में है। कहीं ना कहीं समाज में अब इस बात की आवश्यकता बढ़ने लगी है। कि बच्चों को सेक्स एजुकेशन दिया जाना चाहिए और यह अभियान ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहर के हर क्षेत्र में चलाया जाना आवश्यक है। ताकि इस तरह की घटनाएं कम हो सके या घटित ही ना हो।
बिहाइंड द सीन…Avinash Singh
9406725725/7697930555









