12 बोर बंदूक सीने में रखकर खुद को मारी गोली
चार बार भाजपा जिला अध्यक्ष, दो बार नपा अध्यक्ष रहे
छिंदवाड़ा। भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष और दो बार नगर पालिका के अध्यक्ष रहने वाले कन्हैया राम रघुवंशी ने शुक्रवार की सुबह अपने ही घर में लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर खुदकुशी कर ली । कन्हैया राम रघुवंशी 4 बार जिला भाजपा के अध्यक्ष रहने के साथ-साथ नगर पालिका छिंदवाड़ा के ऐसे अध्यक्ष रहे। जिन्होंने नगर पालिका के प्रमुख कार्यों के प्रति खुद को समर्पित किया। उनके अध्यक्षीय कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण कार्य छिंदवाड़ा शहर में हुए और मुख्य रूप से साफ सफाई का जो परिदृश्य आज छिंदवाड़ा में दिखाई दे रहा है। वह परिदृश्य नगर निगम के पहले ही कन्हैया राम रघुवंशी ने नगर पालिका छिंदवाड़ा में कर दिखाया था । वे कई सपने भी छोड़ गए कन्हैया राम रघुवंशी 10 साल छिंदवाड़ा नगर पालिका में अध्यक्ष रहे और उन्होंने ही शहर के बीचो-बीच स्थित प्रमुख भूमि जेल बगीचा में स्विमिंग पूल, ऑडिटोरियम और स्पोर्ट्स पार्क बनाने का सपना शहर वासियों को दिखाया। वे शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाए रखने के लिए हमेशा से ही तत्पर रहे। भाजपा संगठन में भी उनकी विशेष भूमिका रही। जिला भाजपा के 4 बार 1990, 1996, 2000 और फिर 2008 में अध्यक्ष रहते उन्होंने संगठन को मजबूती देने और सभी स्तर के कार्यकर्ताओं और नेताओं को साधने का कार्य किया । कन्हैया राम रघुवंशी पर पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी चंद्रभान सिंह के गरीबी होने के दावे किए जाते रहे। लेकिन सच्चाई यह है कि कन्हैयाराम रघुवंशी ने विभिन्न पदों पर रहते हुए सभी स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट बनाए रखने का कार्य भी किया है।
12 बोर बंदूक सीने से लगाकर दबाया ट्रिगर
कन्हैयाराम रघुवंशी शुक्रवार की सुबह रोज की तरह घूमने चले गए थे। वह सुबह लगभग 9:00 बजे घर वापस लौटे । उसके बाद अपने कमरे में चले गए । उन्होंने सुबह 10:30 से 11:00 बजे के बीच अपने मकान के पहले माले में जहां उनका कमरा था । इस कमरे में दरवाजा बंद किया और 12 बोर की लाइसेंसी बंदूक को जमीन पर रखकर उसकी नाल को सीने और पसलियों के बीच लगाकर ट्रिगर दबा दिया। इस घटना की जानकारी परिवारजनों को तब चली जब उन्होंने पहले माले से गोली चलने की आवाज सुनी। दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण दरवाजे को थोड़ा सा तोड़कर अंदर देखा गया तो कन्हैया राम रघुवंशी फर्श पर पड़े थे। उनका शव दरवाजे और कमरे के बीच अटका हुआ था । पुलिस को जानकारी मिलते ही कुंडीपुरा थाना प्रभारी सहित सीएसपी अजय राणा मौके पर पहुंचे और उन्होंने दरवाजे के कुंदे को तोड़कर दरवाजा खोला। पुलिस और एफएसएल की टीम ने इस घटना की एसपी अजय पांडे और एडिशनल एसपी अवधेश प्रताप सिंह के निर्देशन में बारीकी से जांच की है। कन्हैया राम रघुवंशी के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है । उनका अंतिम संस्कार शनिवार की सुबह किया जाएगा।
गद्दे के नीचे मिला सुसाइड नोट, बीमारी बताया कारण
इस घटना के बाद पुलिस ने जब वरिष्ठ भाजपा नेता कन्हैया राम रघुवंशी के कमरे की बारीकी से जांच की तो उनके गड्ढे के नीचे नागपुर के डॉक्टर की एक पर्ची के पीछे चंद लाइनों का सुसाइड नोट पुलिस को मिला है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि वह अपनी बीमारी से तंग आ गए हैं और अब जीना नहीं चाहते । इसलिए आत्महत्या कर रहे हैं। उनके इस कदम का कोई और जिम्मेदार नहीं है। पुलिस ने सुसाइड नोट बरामद कर परिवार जनों के सामने उसे जप्त किया है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से कन्हैया राम रघुवंशी का उपचार चल रहा था और वे डिप्रेशन का शिकार भी थे । उनकी धर्मपत्नी की मृत्यु 2016 में ही हो चुकी है और वह अपने मकान के ऊपर वाले कमरे में अकेले ही रहते थे।
युवाओं से तवज्जो न मिलना भी बन रहा डिप्रेशन का कारण
उम्र के साथ-साथ बुजुर्गों में युवाओं से उचित सम्मान और तवज्जो न मिलाना उनके लिए डिप्रेशन का कारण बनता जा रहा है। कन्हैया राम रघुवंशी जैसे कद्दावर नेता जो 4 बार जिला भाजपा अध्यक्ष रहे। उनका कद नगर पालिका अध्यक्ष से कहीं बड़ा था। कन्हैया राम रघुवंशी जिला भाजपा के ऐसे नेता थे जिनकी भाजपा संगठन में गहरी पैठ थी। प्रदेश संगठन के कई नेताओं से अच्छे संबंध होने के चलते कन्हैया राम रघुवंशी हमेशा से ही भाजपा में लाइमलाइट में रहे। चाहे सरकार कांग्रेस की रही हो या भाजपा की कन्हैया राम रघुवंशी एक वरिष्ठ भाजपा नेता होने के साथ-साथ सम्मानित नेता भी रहे। लेकिन अचानक नगर पालिका अध्यक्ष के पद से हटने के बाद युवाओं से सम्मान और तवज्जो ना मिलना भी कहीं ना कहीं कन्हैया राम रघुवंशी के डिप्रेशन का कारण हो सकता है। समय परिवर्तन के साथ जिस तरह से वरिष्ठ भाजपा नेताओं के अनदेखी की की गई है। उससे भाजपा का वरिष्ठ खेमा कहीं ना कहीं टूटा हुआ नजर आया है। और नेताओं में डिप्रेशन जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है। खासकर ऐसे नेता जिनके लिए सम्मान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
एक अंत…अविनाश सिंह
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