Home अपना शहर कैसे बनते हैं कलेक्टर ? छात्रा ने कलेक्टर से पूछा सवाल

कैसे बनते हैं कलेक्टर ? छात्रा ने कलेक्टर से पूछा सवाल

कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने समझाई पूरी प्रक्रिया

बच्चों के साथ किया एक पेड़ मां के नाम के तहत पौधारोपण

छिंदवाड़ा। आदिवासी अंचल तामिया के एक स्कूल में निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर शैलेंद्र सिंह को एक ऐसे सवाल का सामना करना पड़ गया जिसकी उन्हें उम्मीद भी नहीं रही होगी। दरअसल इस मॉडल स्कूल की एक छात्रा मीना कवरेती ने निरीक्षण के दौरान कलेक्टर से पूछा कि कलेक्टर कैसे बनते हैं ?, इस बच्ची की जिज्ञासा देखकर कलेक्टर भी मुस्कुरा दिए और उन्होंने बच्ची को प्राथमिक शिक्षा से लेकर स्नातक और फिर यूपीएससी की परीक्षा तक कलेक्टर बनने की पूरी प्रक्रिया इस जिज्ञासु छात्रा को समझाया । उन्होंने बच्चों से यह भी कहा कि लगन और मेहनत से अपना लक्ष्य बनाकर अगर पढ़ाई की जाए तो निश्चित रूप से सफलता प्रत्येक बच्चे को मिल सकती है। कलेक्टर तामिया के मॉडल स्कूल में निरीक्षण करने पहुंचे थे । इस दौरान उन्होंने बच्चों से वन टू वन चर्चा भी की और उनके सवालों के जवाब भी दिए । इस दौरान बच्चों के साथ कलेक्टर ने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत शाला प्रांगण में ही पौधारोपण भी किया है। इस दौरान उन्होंने छात्रा रेशम सूर्यवंशी के सवाल पर नीट, जेईई,आईआईटी परीक्षाओं की जानकारी दी और उनकी तैयारी के संबंध में मार्गदर्शन दिया। मॉडल हाई स्कूल तामिया के निरीक्षण के दौरान उपसंचालक कृषि जितेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम जुन्नारदेव सुश्री कामिनी ठाकुर, उद्यानिकी महाविद्यालय के डीन डॉ आर सी शर्मा, उपसंचालक पशुपालन डॉ. एच जी‌ एस पक्षवार , वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र छिंदवाड़ा डॉ डी सी श्रीवास्तव सहित अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

बच्चों की जिज्ञासा का समाधान और व्यावहारिक शिक्षा भी जरूरी

छिंदवाड़ा एक ऐसा जिला है जहां पर प्राकृतिक रूप से समृद्धि है । यह एक ऐसा जिला है जो चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है और आदिवासी अंचल है। यहां के विद्यार्थियों में एक प्राकृतिक पावर भी है खेलों में छिंदवाड़ा जिले के विद्यार्थी बहुत आगे जा सकते हैं। पढ़ाई और लग्न में छिंदवाड़ा जिले के विद्यार्थी बहुत आगे जा सकते हैं। लेकिन समस्या इस बात की है कि स्कूलों में केवल 10 से 5 तक की नौकरी करते शिक्षक केवल रूटिंग अध्ययन में ही बच्चों का समय बिता रहे हैं। शिक्षकों के पास आज केवल बच्चों को पास करना ही उनकी जिम्मेदारी है। जबकि निजी स्कूलों की तरह ही ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में भी खेल शिक्षक से लेकर हर तरह के शिक्षक उपलब्ध है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के मॉडल स्कूलों में भी व्यावहारिक ज्ञान की कमी है। बच्चों की जिज्ञासा शांत करने वाले शिक्षकों की कमी है। यहां तक की ट्राइबल क्षेत्र के अधिकारी एसडीएम, तहसीलदार भी तभी स्कूल पहुंचते हैं जब कलेक्टर जैसे बड़े अधिकारी निरीक्षण करने पहुंचते हैं। जबकि ऐसे स्कूलों में खेल व व्यवहारिक ज्ञान सहित सामान्य ज्ञान जैसी कक्षाएं लगाई जाए तो बच्चे निश्चित रूप से मेहनत और लगन से बड़े पदों पर भी आसीन हो सकते हैं। इस तरफ आज सरकार और प्रशासन का ध्यान जाना भी जरूरी है।

विशेष खबर…अविनाश सिंह
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