स्टिंग ऑपरेशन में स्पॉट हुई पोकलेन मशीन और तीन हाइवा
आधे घण्टे में गायब हो गए हाइवा, झाड़ियों में छुपा दी पोकलेन
छिंदवाड़ा। पांढुर्णा जिले में बेलगाम हुए आपराधिक गतिविधियों में सबसे बड़ा कारोबार रेत का है। खास तौर से सौसर में रेत माफिया का राज है। पुलिस प्रशासन और खनिज विभाग पूरी तरह से रेत माफिया की जेब में है । और खुलेआम मशीनों से रेत का उत्खनन पूरे साल यहां चलता है। लेकिन रेत माफिया का दबदबा इतना भारी है कि पूरे देश में जब रेत उत्खनन पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इस दौरान भी सौसर क्षेत्र की कन्हान नदी में पोकलेन मशीन डालकर रेत का उत्खनन किया जा रहा है। यह नजारा नदी के कई क्षेत्रों में देखने को मिल जाएगा। गुरुवार को जब एक रिपोर्टर ने रामाकोना के रोहना क्षेत्र में स्पॉट रिपोर्टिंग की तो वहां एक पोकलेन मशीन के साथ नदी के अंदर तीन हाईवा ट्रक स्पॉट किए गए। बड़ी बात यह है कि जैसे ही रिपोर्टर ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया आधे घंटे में ही तीनों हाइवा ट्रक नदी से निकाल दिए गए और पोकलेन मशीन को झाड़ियां में छुपा दिया गया। पांढुर्णा जिले में अंधेर नगरी चौपट राजा जैसी स्थिति बन गई है । यहां पर प्रशासन को अवैध कारोबारों से कोई मतलब नहीं है। या यूं कहें कि अवैध कारोबारी ने पूरा सिक्का जमा लिया है। हर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी सेट है। यहां तक की खनिज अधिकारी और आबकारी विभाग भी पांढुर्णा जिले के माफिया से सेट है। सौसर में गुरुवार को साफ नजारा दिखाई दिया। जब प्रतिबंध के बाद भी कन्हान नदी से रेत का उत्खनन किया जा रहा था। यह बात सौसर पुलिस, पांढुर्णा जिला प्रशासन, और खनिज विभाग सभी को पता है कि हर दिन नदी को छलनी कर एनजीटी का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। उसके बाद भी यहां रेत माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही । बल्कि प्रशासन खुद अपनी आंख के सामने रेत का अवैध उत्खनन कर रहा है। यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचना जरूरी है कि आखिर छिंदवाड़ा से कटकर पांढुर्णा को अलग जिला तो बना दिया गया है। लेकिन यह जिला विकास करने की बजाय अपराध के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित करने में लगा हुआ है।
स्टिंग ऑपरेशन…वीडियो में देखें…
अरबों के कारोबार में माफिया, नेता, कारोबारी सब शामिल
छिंदवाड़ा जिले में जिसमे की पांढुर्णा जिला भी शामिल है। रेत का एक ठेका किया गया है । दरअसल यह ठेका पांढुर्णा जिला अलग होने के पहले ही हो गया था। पहले जहां केवल 27 करोड़ का जिले भर का रेत का ठेका था । इस बार जब नया रेत का टेंडर हुआ तो यह ठेका 80 करोड़ में पहुंच गया। उस पर जीएसटी मिलाई जाए तो लगभग 100 करोड रुपए का रेत का ठेका छिंदवाड़ा जिले में है। जिसमें सबसे ज्यादा कारोबार सौसर क्षेत्र में होता है यानी कि पांढुर्णा जिले में होता है। सौसर क्षेत्र की रमाकोना कान्हान नदी से ही अरबो रुपए की रेत हर साल निकाल कर बेच दी जाती है। बड़ी बात यह है कि ठेका केवल 100 करोड़ का है। लेकिन रॉयल्टी बचाने का खेल क्षेत्र के रेत माफिया को भली भाती आता है। सौसर में रेत के कारोबार में छोटे-मोटे रेत माफिया शामिल नहीं है। बल्कि बड़े नेताओं से लगाकर महाराष्ट्र और खंडवा बुरहानपुर जैसे जिलों के कई कारोबारी और राजनीतिक पकड़ वाले नेता भी शामिल है।
अक्टूबर से शुरू होगी वर्चस्व की लड़ाई, कोन बनेगा डॉन ?
2018 में जब प्रदेश में कमलनाथ की सरकार बनी तो सौसर के रेत कारोबार में भी कई परिवर्तन आए। सूत्रों की माने तो तात्कालिक सांसद नकुलनाथ के कहने पर रेत कारोबार में छिंदवाड़ा के कई कांग्रेस नेताओं को शामिल किया गया। और जिस कांग्रेसी नेता देखरेख में सौसर की रेत का कारोबार भाजपा सरकार में भी चल रहा था उसे भी हटा दिया गया। केवल 15 महीना में कमलनाथ सरकार तो गिर गई लेकिन रेत का सेटअप जैसा का तैसा ही बना रहा। और रेत के कारोबार से एक प्रमुख चेहरा पांढुर्णा जिले का गायब नजर आया। लेकिन अब 2024 में जिले में भाजपा ने लोकसभा चुनाव जीता है। इन हालात में संभावना जताई जा रही है कि एक बार फिर सौसर के रेत के कारोबार में फेरबदल होंगे। यहां वर्चस्व की लड़ाई भी अक्टूबर में जब रेत उत्खनन फिर से शुरू होगा उसके बाद हो सकती है। रेत का अगला डॉन कौन होगा यह लड़ाई आगे देखने को मिल सकती है। साथ ही इस कारोबार में नए माफिया की एंट्री भी संभव है। हालांकि फिलहाल रेत कारोबार को लेकर सौसर और पांढुर्णा क्षेत्र में शांति है और माफिया खुलेआम कारोबार कर रहा है। लेकिन 2018 के कई कांग्रेसी नेता आज भाजपा में शामिल हो गए और सांसद के करीबी भी माने जाते हैं इन हालात में अक्टूबर के बाद रेत कारोबार का नया रूप भी देखने को मिल सकता है।
स्टिंग आपरेशन…अविनाश सिंह
9406725725









