छत पर बनाई जाएंगी 40 दुकानें, पुरानी दुकानों की मर्रमत होगी
सबसे बड़ी समस्या पालिका बाजार के आसपास फैला अतिक्रमण
छिंदवाड़ा। शहर के बुधवारी बाजार में बना पालिका बाजार दिल्ली के पालिका बाजार की तर्ज पर एक सर्व सुविधा युक्त बाजार उस समय के तात्कालिक नगर पालिका की एक बेहतरीन सोच का परिणाम था। लेकिन पालीका बाजार बनने के बाद पैसे कानूनी दाव पेच में उलझा कि आज तक पालिका बाजार को उसकी पहचान नहीं मिल सकी। इसका कारण यह था कि नगर पालिका की जिन हस्तियों ने पालीका बाजार को डिजाइन किया था उन्हीं ने पालिका बाजार के बेसमेंट पर जिसको की एक पार्किंग के रूप में बनाया गया था। उसे ही बेच दिया और बड़ी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार नगर निगम को पालिका बाजार की पार्किंग पर अधिकार मिला है। अब महापौर ने बीड़ा उठाया है कि वह पालिका बाजार की पार्किंग उसके बेसमेंट में कराएंगे हालांकि इसके लिए बाकायदा पार्किंग का ठेका दिया जाएगा। लेकिन शहर की एक बड़ी समस्या इस पार्किंग से समाप्त हो जाएगी। विक्रम आहके का यह सपना सच होगा इस बात पर अब भी संशय बना हुआ है। दरअसल महापौर विक्रम आहकेशुक्रवार को नगर निगम के कमिश्नर सीपी राय के साथ पालिका बाजार क्षेत्र का निरीक्षण किया ।इसके पहले ही पालिका बाजार की पार्किंग में साफ सफाई कराई जा चुकी है। अब इस पार्किंग को ठेके पर देने की तैयारी चल रही है। ताकि सघन बाजार क्षेत्र की पार्किंग की समस्या समाप्त हो जाए। बाकायदा पैड पार्किंग होगी और इस पार्किंग की पूरी सुविधा ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी । ताकि लोगों को अपनी गाड़ियों को खड़ी करने के लिए एक बेहतर स्थान मिल सके। और शहर के केंद्र स्थल पर स्थित बाजार क्षेत्र में खरीदारी आसानी से करने का मौका मिल सके।
पालिका बाजार की छत पर बनेंगी 40 दुकानें
लगभग 30 साल पहले जब पालिका बाजार का निर्माण हुआ तब पालिका बाजार को दिल्ली के पालिका बाजार की तर्ज पर बहु मंजिला इमारत के रूप में तैयार करने की योजना थी। लेकिन उसके बाद कभी भी नगर निगम और नगर पालिका ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया की पालिका बाजार को विकसित किया जा सकता है । लेकिन अब महापौर विक्रम आहके पालिका बाजार को विकसित करने का एक सपना लोगों को दिखा दिया है। बड़ी बात यह है कि बेसमेंट में पार्किंग की व्यवस्था करने के साथ ही पालिका बाजार की छत पर 40 दुकान बनाने की योजना भी नगर निगम तैयार कर रही है। इसके लिए बाकायदा इंजीनियरों को निर्देश दिए गए हैं कि वह पालिका बाजार का पुराने नक्शे के तहत तैयारी करें और पालिका बाजार की छत पर 40 40 दुकानों का निर्माण कराया जाए। इन दुकानों की नीलामी भी कराई जाएगी। ताकि लोगों को शहर के बीच दुकान मिल सके। वर्तमान में पालिका बाजार में केवल बेसमेंट के अलावा एक ही फ्लोर बनाया गया है। जिसमें नगर निगम ने दुकानों में कुछ विस्तार भी किया था। लेकिन अब छत पर दुकानें बनने के बाद पालिका बाजार क्षेत्र विकसित हो जाएगा।
आसपास फैले अतिक्रमण को हटाए बिना पालिका बाजार अधूरा
दरअसल पालिका बाजार को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि शहर के बीचो-बीच बने इस परिसर में हर तरह की सुविधा मौजूद हो। दुकानदारों के अलावा ग्राहकों के लिए भी यहां पार्किंग और खरीदारी के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके। लेकिन पालिका बाजार बनने के बाद आसपास इस तेजी से अतिक्रमण फैला की पालिका बाजार का अस्तित्व ही खत्म हो गया । यहां तक की पालिका बाजार में बनी दुकानों के दुकानदार आसपास फैले अतिक्रमण से इतने परेशान हो गए कि कई दुकानदारों ने अपनी दुकान बंद कर दी। और कईयों ने अपनी दुकान बेच दी। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बुधवारी बाजार में सामने बनी दुकानों में स्थाई अतिक्रमण कर लिया गया। इसके अलावा चौड़ी सड़क पर अतिक्रमण कर अपनी दुकानों को आगे बढ़ा लिया गया। यहां तक की बुधवारी बाजार से भी पालिका बाजार के लिए कुएं की तरफ से गेट था उस गेट को भी बंद कर दिया गया। आज स्थिति यह है कि अतिक्रमण के कारण पालिका बाजार पूरी तरह से छुपा हुआ है । और यही हालात रहे तो विक्रम आहके जिस तरह की बात कर रहे हैं। वह सपना कभी भी पूरा नहीं हो पाएगा। सबसे पहले पालिका बाजार के आसपास की दुकानों का सीमांकन कराकर उनका अतिक्रमण हटाना सबसे ज्यादा जरूरी है तभी पालिका बाजार को अस्तित्व में लाया जा सकता है। और यह एक बड़ी समस्या है ।अब देखना यह है कि विक्रम आहके लोगों को जो सपना दिखा रहे हैं क्या वास्तव में वह सपना पूरा हो पता है या पालिका बाजार हमेशा की तरह अतिक्रमण की भेंट चढ़ जाता है।
शहर खबर…अविनाश सिंह
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