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सरकारी दफ्तरों में बाबू राज, सालों से एक ही कुर्सी और एक ही चैंबर !

प्रमोशन हो गए, ट्रांसफर हो गए लेकिन नं पोस्टिंग हुई न रिलीविंग

कलेक्टर कार्यालय से लेकर जनपद, और तहसील कार्यालय यही हाल

छिंदवाड़ा। सरकारी कार्यालय में बाबू राज आम बात है। लेकिन छिंदवाड़ा में यह आम बात नहीं है यह आम बात से बड़ी बात है। क्योंकि यहां सालों से कुछ खास चेहरों की ही चल रही है। कलेक्टर बदल गए, एसडीएम बदल गए कलेक्टर कार्यालय के सारे बड़े अधिकारी बदल गए। लेकिन नहीं बदले तो विभागों में बैठे बाबू और ऐसे कर्मचारी जिन्हें भरपूर संरक्षण मिल रहा है। इन बबुयों का राज अकेले कलेक्टर कार्यालय में नहीं है, बल्कि पूरे जिले के एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय, और जनपद कार्यालय में भी यही हाल है। छिंदवाड़ा के हाल इतने बेहाल है कि कलेक्टर कार्यालय में पिछले दिनों 39 बाबुओं के प्रमोशन हुए। लेकिन इन्हें उस कुर्सी से नहीं हटाया गया जहां वे पिछले कई सालों से पदस्थ है। जबकि प्रमोशन के बाद नई पदस्थापना का नियम है। इस नियम की पूरी तरह से अनदेखी छिंदवाड़ा कलेक्टर कार्यालय में देखी जा रही है।

39 लोगों के प्रमोशन के बाद केवल 10 लोगों को नई पोस्टिंग दी गई और उनमें से भी कई आज भी उसी कुर्सी पर बैठे हैं उन्हें रिलीव नहीं किया गया। जिला प्रशासन इस मामले में पूरा उदासीन नजर आ रहा है। कलेक्टर कार्यालय में पहले से जमे मठाधीश और बाबुओं के मसीहा इतने ताकतवर है की कलेक्टर चाहे कोई भी हो इन बाबुओं को हटाना उनके बस में नहीं है। कलेक्टर कार्यालय के कई विभागों में तो बाबुओं का कार्यकाल 15 से 20 साल तक का हो चुका है। लेकिन उन विभागों से उन्हें आज तक नहीं हटाया गया और ना ही उन्हें कोई नई जिम्मेदारी दी गई। वह जहां जमे है वहीं जमे हैं। वही कुर्सी है और वही कार्यालय। आखिर किस तरह के कलेक्टर का इंतजार छिंदवाड़ा की प्रशासनिक व्यवस्था को करना पड़ेगा जो व्यवस्थाओं को नए सिरे से स्थापित कर सके या बड़ा सवाल है।

वीडियो में देखे छिंदवाड़ा का बाबूराज …👇

स्मार्ट वर्कर्स का उपयोग नहीं, कई विभागों में उदासीन कर्मचारी

छिंदवाड़ा कलेक्टर कार्यालय में कई बाबू और कर्मचारी बहुत स्मार्ट वर्कर है। जिनका उपयोग जनता से जुड़े विभागों और महत्वपूर्ण विभागों में किया जा सकता है। खासतौर से ऐसे विभागों में जहां पर समझदार अनुभवी और जानकार बाबू और कर्मचारियों की आवश्यकता है। वहां पर स्मार्ट वर्क्स को पोस्टिंग दी जा सकती है। लेकिन यह स्मार्ट कर्मी अपनी प्रतिभा के विपरीत ऐसे विभागों में बैठे हैं जहां उन्हें काम नहीं करना पड़ रहा। इसके उलट संवेदनशील विभागों में ऐसे बाबू और कर्मचारियों को पदस्थ किया गया है जो ठीक से काम तक नहीं कर पाते। कई बाबू और कर्मचारियों को तो कंप्यूटर का कीबोर्ड तक नहीं पता। उसके बाद भी उन बाबुओं को संवेदनशील विभागों में पदस्थ किया गया है। यह बड़ी विडंबना है कि काम करने वाले कर्मचारियों को बेकाम विभागों में रखा जा रहा है और जिन्हें काम आता ही नहीं उन्हें संवेदनशील विभागों में काम करने के लिए पोस्टिंग की गई है। इसके पीछे भी बाबू राज ही जिम्मेदार है।

छिंदवाड़ा प्रशासन…Avinaash Siingh
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